कई पाठ पढ़ाती है फुटबाॅल के बेताज बादशाह सर मैट बस्बी की कहानी

मैदान और उसके बाहर किये कई प्रयोग और फुटबॉल को दिए नए आयाम फुटबाॅल की दुनिया को कई मशहूर खिलाड़ी दिये मैट बस्बी नेमैनचेस्टर युनाईटेड क्लब को पहुंचाया शिखर परटीम के मैनेजर रहते यूरोपियन कप जितवायादुर्घटना में खिलाडि़यों की मौत के बाद खड़ी की नई टीम

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तीन दशक से भी अधिक समय तक फुटबाॅल खिलाडि़यों द्वारा ‘‘बाॅस’’ के नाम से पुकारे जाने वाले सर मैट बस्बी अगर आज जीवित होते तो उम्र का शतक लगा चुके होते। प्रतिष्ठित फुटबाॅल क्लब मैनचेस्टर युनाईटेड की कमान सफलतापूर्वक संभालने वाले मैट बस्बी की बराबरी और कोई नहीं कर सका है और आज भी इस खेल के दिग्गज उनका नाम आदर और श्रद्धा के साथ लेते हैं।

खेल की दुनिया में बस्बी को लीक से हटकर फैसले लेने के लिये जाना जाता है। एक समय में जब सभी क्लब दूसरे क्लबों के सफल और नामचीन खिलाडि़यों को मोटी रकम के लालच में अपनी टीम में शामिल करने में लगे हुए थे उस समय में बस्बी ने अपनी टीम में युवाओं और नये खिलाडि़यों पर दांव लगाया और उन्हें सफल बनाया। वह मैट बस्बी ही जिन्होंने अपने समय के नामचीन खिलाडि़यों बिल फोल्क्स, लियाम व्हेलन, डंकन एडवर्डस और बाॅबी कार्लटन जैसे न जाने कितनों खिलाडि़यों को कामयाबी की सीढि़यों पर चढ़ाया और उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां से उनका नाम पूरी दुनिया में मशहूर हुआ।

खेल के इतिहास में आज भी इन खिलाडि़यों को ‘‘द बस्बी बेब्स’’ के नाम से जाना जाता है। यह बस्बी का ही जलवा ओर लगन थी जिसने उनकी ‘‘बेब्स टीम’’ को 1956 और 1957 में लगातार दो बार लीग चैंपियन का खिताब जीतने के लिये प्रेरित किया और 1957 में यह टीम प्रतिष्ठित एफए कप की उपविजेता भी रही।

यह मैट बस्बी ही थे जिन्होंने 1956 में अपनी टीम मैनचेस्टर युनाईटेड को लीग चैंपियनशिप का खिताब जिताने के बाद उस समय की सबसे मशहूर टीम रियल मैड्रिड के मैनेजर के पद को ठुकरा दिया था। बस्बी ने उस समय रियल के मुखिया की पेशकश को यह कहकर ठुकरा दिया कि ‘‘मैनचेस्टर मेरा स्वर्ग है’’।

1957-58 के फुटबाॅल सीजन की शुरुआत में इस टीम का मनोबल सातवें आसमान पर था और बस्बी की यह टीम यूरोपियन कप के खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था और उस समय एक ऐसा हादसा हुआ जिसने समूचे खेल जगत को हिलाकर रख दिया।

बेलग्रेड में एक मैच खेलकर लौट रही टीम को लेकर आ रहा हवाईजहाज म्यूनिख एयरपोर्ट पर एक दुर्घटना का शिकार हो गया और इस हादसे में टीम के आठ मुख्य खिलाडि़यों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस दुर्घटना में मैट बस्बी भी बुरी तरह जख्मी हुए लेकिन इस जुनूनी ने हार नहीं मानी और जल्द ही मैदान में वापसी की।

बस्बी के अस्पताल प्रवास के दौरान उनके सहायक जिम मर्फी ने मैनचेस्टर युनाईटेड टीम की कमान संभाली। उसी दौरान प्रतिष्ठित एफए कप में शैफील्ड टीम के खिलाफ मुकाबले से ठीक पहले सर मैट बस्सी के बुदबुदाये शब्द ‘‘जिम, झंडे को फहराते रहना’’ आज भी इतिहास के पन्नों में अमर हैं।

इस दुर्धटना में अपनी टीम के मुख्य खिलाडि़यों को खोने के बाद बस्बी अंदर से बिल्कुल टूट गए थे। निराशा के इस दौर में उनकी पत्नी ने उन्हें टीम के मैनेजर के तौर पर दोबारा मैदान पर वापस आने के लिये प्रोत्साहित किया। बस्बी ने विमान दुर्घटना में टीम के जीवित बचे सदस्यों बाॅबी कार्लटन, हैरी ग्रेग और बिल फोल्क्स को लेकर एक बिल्कुल नई टीम का गठन किया।

इस नई टीम में उन्होंने जाॅर्ज बेस्ट और डेनिस लाॅ जैसे नए खिलाडि़यों को मौका दिया जिन्होंने बाद में खेल की दुनिया में अपना नाम रोशन किया। बस्बी की यह नई टीम जल्द ही जीत के रास्ते पर चल निकली और आज भी उन जीवित खिलाडि़यों बाॅबी, ग्रेग और बिल को ‘‘होली ट्रिनिटी’’ के नाम से जाना जाता है। इन सबके साझा प्रयासों और करिश्माई खेल की बदौलत इस टीम ने बुलंदियों के हर शिखर को छुआ और लगभग हर प्रतिष्ठित ट्राॅफी को अपनी झोली में डाला।

इस विमान दुर्घटना के करीब दस साल बाद 29 मई 1968 को मैनचेस्टर युनाईटेड यूरोपियन कप को जीतने वाला पहला इंग्लिश क्लब बना। फाइनल मुकाबले में इस टीम ने पुर्तगाल की खतरनाक टीम बेनफीका को चार गोल के मुकाबले एक गोल से हराया। दुर्घटना में जीवित बचे जाॅर्ज बेस्ट को इस प्रतियोगिता के अलावा उस वर्ष का विश्व का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद मैनचेस्टर युनाईटेड के मैनेजर सर मैट बस्बी ने गर्व से कहा कि इस टीम ने पूरी दुनिया के सामने उनका सिर फख्र से ऊँचा कर दिया है। ‘‘इस टीम के खिलाडि़यों ने फुटबाॅल का खेल पूरे दिलोजान से खेला और दुनिया को दिखा दिया है कि मैनचेस्टर युनाईटेड के खिलाड़ी किस मिट्टी के बने हैं। यह जीत मेरी जिंदगी के सुखद पलों में से एक है और आज के दिन पूरे इंग्लैंड में मुझसे ज्यादा प्रसन्न व्यक्ति शायद ही कोई हो।’’

ऐतिहसिक जीत के बाद सर मैट बस्बी मैनचेस्टर युनाईटेड के मैनेजर पद से रिटायर हो गए लेकिन ताउम्र वे क्लब के साथ निदेशक के तौर पर जुड़े रहे। खेल के प्रति उनके योगदान को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उनहें ‘‘नाईटहुड’’ की उपाधि से भी नवाजा।

आखिरकार 20 जनवरी 1994 को 85 साल की उम्र में फुटबाॅल के इस दिग्गज ने कैंसर से हार मान ली और हमेशा के लिये दुनिया को अलविदा कह दिया। बस्बी को मैनचेस्टर में उनकी पत्नी जीन की कब्र के बगल में दफना दिया गया।

मैट की टीम के स्टार खिलाड़ी रहे बाॅबी काॅर्लटन अपनी जीवनी ‘‘माई मैनचेस्टर युनाईटेड ईयर्स’’ में उनके बारे में विस्तार से लिखते हैं। ‘‘मैट ने हमेशा हमको समझाया कि फुटबाॅल सिर्फ एक खेल नहीं है। इस खेल में वह ताकत है जो आम आदमी को खुशी देती है। वे हमेशा मैनचेस्टर युनाईटेड रहे और मुझे लगता है कि मैं भी रहूंगा।’’

मैट की मृत्यु के दो साल बाद खेल के प्रति उनके योगदान को सम्मान देते हुए उनकी कांसे की एक प्रतिमा स्थापित की गई। कुद समय बाद उनकी इस प्रतिमा के बराबर में उनकी महान तिकड़ी ‘‘होली ट्रिनिटी’’, जाॅर्ज बेस्ट, डेनिस लाॅ और बाॅबी कार्लटन की प्रतिमाएं भी लगाई गईं।

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