मिड डे मील की क्वॉलिटी चेक करने के लिए बच्चों के साथ खाने बैठ गए डीएम

आईएएस ऑफिसर की नेकदिली...

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श्री देवी विलासम स्कूल को केरल के सबसे अच्छे सरकारी स्कूलों में से एक माना जाता है। यहां करीब 1,600 स्कूल बच्चे पढ़ते है। इसीलिए इसे जिले के सबसे बड़े स्कूलों में गिना जाता है। बच्चों की संख्या के मामले में यह स्कूल काफी बड़ा है। इसीलिए कलेक्टर ने स्कूल का दौरा किया।

स्कूल में बच्ची के साथ मिड डे मील का भोजन करते डीएम सुहास
स्कूल में बच्ची के साथ मिड डे मील का भोजन करते डीएम सुहास
कलेक्टर सुहास समय-समय पर बच्चों को ऐसी ट्रिप करवाते रहते हैं। इसके साथ ही वे कई सारी प्रतियोगिताएं भी करवाते हैं जिनमें बच्चों को कलेक्टर के साथ एक दिन बिताने काम मौका भी मिलता है। 

केरल के अलप्पुझा जिले में स्थित सरकारी श्री देवी विलासम स्कूल में रोज की तरह सारे बच्चे मिड डे मील का भोजन कर रहे थे, लेकिन आज उनके साथ एक खास शख्स भोजन कर रहा था। यह कोई और नहीं जिले के कलेक्टर एस सुहास थे। जो कि स्कूल की जांच करने के लिए दौरे पर थे और उन्होंने फैसला किया कि वे बच्चों के साथ ही दोपहर का भोजन करेंगे। दरअसल वे खाने की गुणवत्ता भी जांचना चाहते थे। सुहास के मुताबिक वे लंच के वक्त इसीलिए स्कूल गए थे ताकि खाने की क्वॉलिटी जांच सकें जिससे बच्चों को सुरक्षित और साफ भोजन सुनिश्चित हो सके।

श्री देवी विलासम स्कूल को केरल के सबसे अच्छे सरकारी स्कूलों में से एक माना जाता है। यहां करीब 1,600 स्कूल बच्चे पढ़ते है। इसीलिए इसे जिले के सबसे बड़े स्कूलों में गिना जाता है। बच्चों की संख्या के मामले में यह स्कूल काफी बड़ा है। इसीलिए कलेक्टर ने स्कूल का दौरा किया। सुहास ने अलप्पुझा डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के फेसबुक पेज पर इस दौरे से जुड़ी फोटोज शेयर की हैं और अपना अनुभव भी साझा किया। इन फोटो में सुहास बच्चों के साथ खाना खा रहे हैं और उनसे बातें भी कर रहे हैं।

फेसबुक पोस्ट के मुताबिक सुहास स्कूल में खाने की गुणवत्ता से संतुष्ट हुए और उन्होंने स्कूल की तारीफ भी की। उन्होंने बताया कि मिड डे मील के खाने में चावल, दही, खीरा और आलू की सब्जी भी थी। सुहास ने एक महीने पहे ही अलपुझा जिले में कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाली है। इसके पहले वे वायनाड जिले के जिला कलेक्टर थे। उन्हें उनके अनोखे प्रयासों और पहलों के लिए पुरस्कृत भी किया जा चुका है। सुहास 2012 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। उन्होंने मेरिलैंड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया जैसे संस्थानों से अपनी पढ़ाई पूरी की है। वे आदिवासी इलाकों में भी कई काम कराने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आदिवासी बच्चों को फिर से स्कूल भेजने के लिए कई सारे कदम उठाए थे।

कलेक्टर सुहास समय-समय पर बच्चों को ऐसी ट्रिप करवाते रहते हैं। इसके साथ ही वे कई सारी प्रतियोगिताएं भी करवाते हैं जिनमें बच्चों को कलेक्टर के साथ एक दिन बिताने काम मौका भी मिलता है। सुहस सीधे इन सरकारी स्कूलों में जाते हैं और उनके साथ बैठकर खाना भी खाते हैं। वे स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों से उनकी समस्याएं सुनते हैं और उन्हें दूर करने का प्रयास भी करते हैं। स्कूल में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए इसके लिए भी सुहास ने कई कदम उठाए हैं। उनके इन कदमों से इलाके में शिक्षा की स्थिति में काफी सुधार आया है और बच्चों के ड्रॉपआउट रेट में भी काफी गिरावट आई है।

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