वर्ल्ड प्रतियोगिता में दो करोड़ स्कॉलरशिप जीतने की रेस में यह भारतीय छात्र

दुनियाभर के 6,000 स्टूडेंट्स को पीछे करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाने वाला 15 वर्षीय भारतीय छात्र समय गोडिका

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प्रतियोगिता की शुरुआत इसी साल 1 सितंबर को हुई जिसमें 13 से 18 साल के छात्रों को रिसर्च करने के लिए लाइफ साइंस, गणित या फिजिक्स विषय से जुड़े जटिल मुद्दों पर विडियो बनाने थे। बेंगलुरु के रहने वाले समय ने दुनियाभर के 6,000 स्टूडेंट्स को पीछे करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। 

समय गोडिका
समय गोडिका
इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पाने वाले प्रतिभागी को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे वहीं जिस अध्यापक से प्रेरित होकर प्रतिभागी ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया होगा उसे भी तीस लाख का पुरस्कार मिलेगा।

 समय को यह पुरस्कार फेसबुक पर उसके विडियो को मिले लाइक, शेयर और पॉजिटिव रिऐक्शन्स के आधार पर मिलेगा। सभी 30 प्रतिभागियों के विडियो पब्लिक वोट की खातिर फेसबुक पर शेयर किए गए हैं।

कैंसर, अल्जाइमर या पार्किन्सन जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए सिर्फ मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती। व्रत या भूखे रहने और सेल्फ-क्लीनिंग सिस्टम के पीछे काम करने वाला मैकेनिज्म, ऑटोफजी न केवल आपको स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि इस तरह की गंभीर न्यूरोलॉजिकल और बायोलॉजिल बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करता है। इसी आइडिया से प्रेरित होकर नेशनल पब्लिक स्कूल कोरमंगला (बेंगलुरु) से पढ़ाई करने वाले 15 साल के समय गोडिका बेंगलुरु को विश्व में पहचान दिलाने वाले हैं। इस विषय पर एक सरल सा विडियो बनाकर समय ने 'ब्रेकथ्रू जूनियर चैलेंज' में टॉप-30 में जगह बनाई है। इस प्रतियोगिता को फेसबुक, गूगल और खान अकैडमी ने स्पॉन्सर किया है।

इस प्रतियोगिता की शुरुआत इसी साल 1 सितंबर को हुई जिसमें 13 से 18 साल के छात्रों को रिसर्च करने के लिए लाइफ साइंस, गणित या फिजिक्स विषय से जुड़े जटिल मुद्दों पर विडियो बनाने थे। समय ने दुनियाभर के 6,000 स्टूडेंट्स को पीछे करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब वे 3 नवंबर का इंतजार कर रहे हैं जब विजेता और उपविजेताओं की घोषणा की जाएगी। ब्रेकथ्रू चैलेंज में एंगेजमेंट, क्रिएटिविटी, सजावट और कठिनाई जैसे मुख्य कारकों पर फोकस किया जाता है।

समय ने कहा, 'मेरे कुछ रिश्तेदार न्यूरो की समस्या से पीड़ित हैं इसलिए मैंने उनकी समस्याओं को लेकर रिसर्च करना शुरू किया। इस विषय ने मेरे भीतर कौतूहल पैदा किया और पता चला कि व्रत रखने या भूखे रहने से इन बीमारियों को खत्म करने में काफी मदद मिलती है।' समय योशिनोरी ओशुमी के काम से काफी प्रभावित हैं जिन्हें साल 2016 के लिए मेडिसिन के क्षेत्र में उनके सेल्युलर ऑटोफजी काम में नोबल पुरस्कार मिला है। इस प्रतियोगिता में दुनिया के 8 भौगोलिक क्षेत्रों के स्टूडेंट्स शामिल हैं। इसमें भारत, एशिया (चीन समेत), मिडल ईस्ट (अफ्रीका), यूरोप, ऑस्ट्रेलिया/ न्यूजीलैंड, साउथ अमेरिका, नॉर्थ अमेरिका, सेंट्रल अमेरिका/ मैक्सिको के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

समय ने अपने विडियो में इस बायोलॉजिकल प्रोसेस को कई सारे अनोखे और दिलचस्प एनिमेटेड स्टोरी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है। उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त हो चुके अंग और ऊतक सड़-गल कर एनर्जी क्रिएट करते हैं जिससे बीमारियों को खत्म करने में काफी मदद मिलती है। उन्होंने कहा, 'मैं बस अपने विचार लोगों से साझा करना चाहता हूं। अगर मुझे यह पुरस्कार मिलता है तो मैं इस दुनिया के लिए कुछ अच्छा बनाने की कोशिश करूंगा। यह पुरस्कार हासिल करना तो काफी दूर की बात है, लेकिन मुझे जीतने की पूरी उम्मीद है।' प्रतियोगिता में टॉप-15 प्रतिभागियों को विनर के लिए चयन किया जाएगा।

समय के विडियो को सभी प्रतिभागियों के विडियो के साथ 23 अक्टूबर को फेसबुक पर शेयर किया गया था। लेकिन उस विडियो पर आए रिऐक्शन और उसके व्यूज को देखें तो वे सबसे आगे चल रहे हैं। उनके विडियो पर अभी तक कुल 10 हजार रिऐक्शन आए हैं और उसे तकरीबन 1.30 लाख लोगों ने देखा है। 

अगर शेयर की बात करें तो उनके विडियो को अब तक कुल 6550 बार शेयर किया जा चुका है। अभी अंतिम निर्णय होने में तीन दिन शेष हैं इस आधार पर कहा जा सकता है कि समय के जीतने के चांसेज काफी ज्यादा हैं। हालांकि भारत की ओर से राम्या भी इस प्रतियोगिता में शामिल हैं लेकिन उनका विडियो अभी इस मामले में काफी पीछे है।

इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पाने वाले प्रतिभागी को लगभग डेढ़ करोड़ प्रदान किए जाएंगे वहीं जिस अध्यापक से प्रेरित होकर प्रतिभागी ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया होगा उसे भी तीस लाख का पुरस्कार मिलेगा। वहीं विजेता के स्कूल को साइंस लैब विकसित करने के लिए भी 70 लाख रुपये दिए जाएंगे। 

समय ने कहा, 'मैं न्यूरोसाइंस में उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता हूं और इस स्कॉलरशिप में मुझे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में पढ़ने का रास्ता आसान हो जाएगा।' समय को यह पुरस्कार फेसबुक पर उसके विडियो को मिले लाइक, शेयर और पॉजिटिव रिऐक्शन्स के आधार पर मिलेगा। सभी 30 प्रतिभागियों के विडियो पब्लिक वोट की खातिर फेसबुक पर शेयर किए गए हैं। विजेताओं की घोषणा आगामी 2 दिसंबर को अमेरिका के लॉस ऐंजेल्स में होगी।

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