'सिर्फ ज्ञान से नहीं चलती दुनिया, काम करना पड़ता है'

एक एंटरप्रेन्योर, जो ‘ज्ञानी’ से बना ’कर्मठ’

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जितामित्रा थथाचरी डिजिटल मार्केटिंग सॉल्यूशन बेस्ड अपना स्टार्टअप चलाते हैं। इससे पहले वो मॉनीटर ग्रुप में 5 साल तक स्ट्रैटजी कंसल्टेंट रह चुके हैं। दूसरों को ज्ञान देने’’ की अपनी नौकरी के दौरान एहसास हुआ कि असल काम, ज्ञान के बाद शुरू होता है। और जब ये एहसास गहरा हुआ, तो फिर नौकरी छोड़ काम में जुट गए। जितामित्रा की जुबानी, ज्ञानी से कर्मठ बनने की कहानी-

जितामित्रा थथाचरी
जितामित्रा थथाचरी

स्टार्ट अप और बिजनेस की दुनिया में स्ट्रैटजी कंसल्टेंट (रणनीति सलाहकार) काफी बदनाम हैं। 5 सालों से ज्यादा मॉनीटर ग्रुप (माइकल पोर्टर के द्वारा शुरू की गई रणनीति सलाह देने वाली कंपनी) में बिताने के बाद मैंने तमाम शिकायतें सुनीं -

• कैसे एक युवा सलाहकार उद्योग जगत के दिग्गज कारोबारियों को कोई उपयोगी बात बता सकता है।

• ऐसी योजना किस काम की, जिसके कार्यपालन में ही 5 साल लग जाएं।

• सलाहकार स्लाइड्स बनाने के अलावा और कोई काम नहीं करते।

• अगर आप फैसले लेना नहीं जानते हैं, तो निश्चित रूप से आप लोगों को सलाह दे सकते हैं।

• आप कभी अपना पैसा मुंह के पास नहीं रखते (मुझे लगता है पॉल ग्राहम को इसका मतलब पता है, तभी उसने प्रबंध परामर्श को ‘गेमिंग द सिस्टम’ का एक वर्जन कहा है।)

मैंने अपने कार्यकाल में दोस्तों, रिश्तेदारों और लंबी उड़ानों के दौरान बातचीत होने पर सहयात्रियों से भी ऐसे कई कमेंट सुने हैं। और देखा है कि कैसे इन शिकायतों का हमने मॉनीटर ग्रुप में सामना किया है – स्थापित उद्योगों में बड़ी कंपनियों को सलाह देने के दौरान इसी विरोधाभास ने मुझे स्टार्ट अप के लिए प्रोत्साहित किया।

1. इससे कोई मतलब नहीं कि आप कौन हैं या क्या जानते हैं। आपके पास एक परिकल्पना होने और सीखने के लिए तैयार रहने की ज़रुरत

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से होने के चलते, मैं डिडक्टिव एप्रोच (निगमनात्मक दृष्टिकोण) से चलता था, जो आप जानते हैं वहां से शुरू करना और निष्कर्ष की तरफ आगे बढ़ना। लेकिन, एक परिकल्पना आधारित, विवेचनात्मक दृष्टिकोण (इंडक्टिव एप्रोच) दूसरे सिरे से शुरू होती है – इसमें आप कोई अनुमान लगाते हैं और उसके बाद इसका परीक्षण शुरू करते हैं ( और ज़रूरत के मुताबिक़ उसमें सुधार करते हैं )। उद्योगों को समझने में ये डाटा पर आधारित सीखने की पद्धति काफी सहायक है। इसीलिए कंपनियां अपने भरोसे को आईऩे में देखने, उनका परीक्षण करने और कंपनी एक्जिक्यूटिव्स को इंडस्ट्री किस तरह आगे बढ़ रही है, इसको समझने में मदद करने के लिए स्ट्रैटजी कंस्लटेंट्स (रणनीति सलाहकारों) को नियुक्त करती हैं।

अनुमान लगाना, गलत सिद्ध किया जाना और उन गलितयों को सही करना, इस प्रक्रिया को बार-बार कई प्रोजेक्ट्स में करने से आपकी अपनी अज्ञानता में स्वस्थ सुधार होता है। स्टार्ट अप करने के दौरान मैंने इसे बेशकीमती पाया – मुझे भले ही सही उत्तर न पता हो, लेकिन कैसे अपने भरोसे का परीक्षण करें और अपने तरीके से काम करें, ये मै जानता हूं।

2. अनिश्चितता के साथ ‘ठीक होने’ की ज़रुरत

रणनीति और परिचालन परामर्श के बीच एक मतभेद समयसीमा का है – रणनीति और अधिक लंबे समय के लिए है। जिन उद्योग प्रवृत्तियों पर आप आश्रित होते हैं, वो 3-4 साल तक रहती हैं- कुछ लोगों ने तब तक शुरुआत ही नहीं की होती। इसलिए वहां अस्पष्टता रहेगी। लेकिन, तब भी आपको कुछ दांव लगाने होंगे और उन्हें मान्य ( या अमान्य) करार देने के लिए कुछ रचनात्मक तरीके खोजने होंगे – उद्योग जगत के जानकारों से बात करे, संबंधित उद्योगों की प्रवृत्तियों और समान तरह की अर्थव्यवस्था के विकास पर नज़र डालें, आदि। लेकिन, इनमें से कुछ भी आपको पूर्ण जवाब नहीं देगा – आपको खुद ही फैसला लेकर अपने लक्ष्य के मुताबिक़ इनमें सबसे बेहतर विकल्प चुनना होगा। इसिलए, सिर्फ ऐसा नहीं है कि आपको सही उत्तर पता नहीं है, आपको पूरी तरह निश्चित उत्तर कभी नहीं मिल सकता।

और इसी तरह मेरे स्टार्ट अप में भी है – मैं नहीं जानता कि मेरा उत्पाद लोगों को पसंद आएगा, नापसंद किया जाएगा या फिर सबसे बुरा – नज़रअंदाज कर दिया जाएगा - पहले शुरुआती इस्तेमाल करने वालों में, फिर उनका अनुसरण करने वालों और अंत में बचे हुए लोगों में ( अगर उतनी दूर तक जा पाता है ) । लेकिन, मैं कठिन परिश्रम करता रहूंगा, और मैं सही रास्ते पर हूं ये सुनिश्चित करने के लिए छोटे-छोटे परीक्षण करने के रास्ते निकालूंगा।

3. ग्राहक की ज़रुरतों को पूरा करना पहला उद्देश्य

थोड़ी देर के लिए, दूसरे अर्थों की उपेक्षा करके सिर्फ ग्राहक सेवा परामर्श के पेशे की प्राथमिकता है – मैंने मॉनीटर में काम करने के दौरान सहकर्मियों से हमेशा ये सुना है। चाहे ये वीकेंड में अचानक से आ टपका काम हो या फिर असमय कार्यक्षेत्र का चक्कर लगाना, आप ये सब करते हैं अगर इससे ग्राहक को फायदा है।

आज मेरे पास एक सीधे उपभोक्ता से जुड़ा (कंज्यूमर फेसिंग) एंड्रॉयड एप है। हर थोड़ी देर में मुझे एक कड़वी समीक्षा या फिर गैरज़रूरी कठोर 1-स्टार रेटिंग मिलती है। लेकिन, अयोग्य उपयोगकर्ताओं को बुरा भला कहना मेरा काम नहीं है – अगर मैं उन्हें अच्छी सेवा देने का लक्ष्य रखता हूं, तो मुझे पूरा भरोसा है कि मुझे भविष्य मे इन रेटिंग्स की चिंता करने की ज़रूरत नहीं होगी।

4. संक्षिप्तता संचार की आत्मा है

आलोचक सही हैं जब वो कहते हैं कि सलाहकार बहुत सारी पॉवरप्वाइंट स्लाइड्स बनाते हैं। बच्चे, मैंने ज्यादा स्लाइड्स बनाई थीं !........दरअसल, स्लाइड्स के बारे में सही बात ये है कि इनमें सीमित जगह होती है, ये माइक्रोसॉफ्ट वर्ड डॉक्यूमेंट की तरह नहीं हैं। इनमें आपको अपनी बात संक्षेप में कहनी होती है। और सबसे पहले आपको ये कहना होता है कि क्यों आपकी बात महत्वपूर्ण है (या जैसा कि मॉनीटर में कहते हैं, आपको ‘सो व्हाट्स’ को सामने लाना होता है)।

मैंने स्लाइड बनाने के काम में 10 हज़ार घंटे खपाए हैं। उस पर भी इसमें महारत हासिल नहीं हुई है (ग्लैडवेल गलत था), लेकिन ये जानता हूं कि कैसे मुख्य संदेश को कम-से-कम शब्दों में और ठीक सामने रखना है और ये स्टार्ट अप के लिए बहुत ही उपयोगी कौशल है। चाहे संभावित ग्राहकों के ई-मेल में हो, फेसबुक एड्स के लिए असरदार कॉपी हो या कम समय में निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए ऊंची आवाज़ में बातें हों, संक्षिप्तता स्टार्टअप्स के लिए अमूल्य है।

5. विचार बेकार हैं, कार्यपालन ही कुंजी

मुझे पता है ये काफी ‘वैश्विक’ लगता है (और ऐसा है, मैं झूठ नहीं बोलूंगा), लेकिन एक के बाद एक प्रोजेक्ट्स ने मुझे सिखाया है कि अच्छी तरह स्पष्ट रणनीति का भी कोई मतलब नहीं रह जाता, जैसे ही एक बार आप लागू करना शुरू कर देते हैं। एक ऐसा ही मामला था, जहां हमने रणनीति तैयार की और छोड़ दिया। कुछ महीनों बाद ग्राहक हमारे पास आया और बोला सब कुछ बर्बाद हो गया है, क्या आप वापस आकर हमारी मदद कर सकते हैं। हम निश्चित रूप से बेहतर कर सकते थे – एक ऐसी योजना बनाकर छोड़ जाना जिसे ग्राहक लागू कर सके और इसे ग्राहक की टीम को समझाना, ये हमारी जिम्मेदारी थी।

लेकिन, मेरे लिए बड़ी सीख ये थी कि आपकी योजना बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती, इसे शुरू करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, लेकिन आपको इसे प्रभावशाली तरीके से निष्पादन करने की ज़रूरत होती है। इसे व्यवहारिक होने की ज़रूरत होती है।

उसी लेख में जहां पॉल ग्राहम कहते हैं कि प्रबंधन परामर्श सिस्टम से खेलना है, उन्होंने कॉलेज की समानता का भी उल्लेख किया है। और, भले ही उनके पहले कथन से मैं पूरी तरह सहमत नही होऊं, दूसरा पूरी तरह सही है। अगर आप कभी अपना खुद का बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं तो रणनीति परामर्श कंपनी आपको सिखाने के लिए सबसे अच्छा स्कूल है।

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