आखिरी बार कतार लगवा रहा हूं : प्रधानमंत्री मोदी

नरेन्द्र मोदी ने जन-सभा में पूछा, ‘‘अगर कोई ये काम करता है तो वह गुनाहगार है क्या ? कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ लडता तो गुनाहगार है क्या ? मैं हैरान हूं कि आजकल मेरे ही देश में कुछ लोग मुझे गुनाहगार कह रहे हैं। क्या मेरा यही गुनाह है कि भ्रष्टाचार के दिन पूरे होते जा रहे हैं ? क्या यही मेरा गुनाह है कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड रहा है ? ’’

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भारत को ‘बेईमानों’ से मुक्ति दिलाने का संकल्प दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के आगे लंबी कतारें लगने पर आज कहा कि मिट्टी का तेल और चीनी के लिए 70 साल से कतारें लगा रही जनता से वह आखिरी बार कतार लगवा रहे हैं।  देश को नकद लेनदेन से मुक्ति दिलाने का आहवान करते हुए मोदी ने मोबाइल के जरिए खरीद फरोख्त करने का सुझाव दिया और नौजवानों से अपील की कि वे देशवासियों को मोबाइल के जरिए लेनदेन करना सिखायें। उन्होंने यहां भाजपा की परिवर्तन यात्रा के तहत आयोजित जनसभा में कहा, ‘‘आपने वो सरकारें अब तक देखी हैं जो अपने लिए काम करती हैं। अपनों के लिए करने वाली सरकारें बहुत आयीं। आपके लिए करने वाली सरकार भाजपा ही हो सकती है।’’ मोदी ने कहा, ‘‘इस देश को भ्रष्टाचार ने बर्बाद किया है। इस देश को भ्रष्टाचार ने लूटा है। गरीब का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। गरीब का हक छीना है। हमारी सभी मुसीबतों की जड में भ्रष्टाचार है। कानून का उपयोग करके बेईमान को ठीक करना होगा। भ्रष्टाचार को ठिकाने लगाना होगा।’’ उन्होंने पूछा, ‘‘अगर कोई ये काम करता है तो वह गुनाहगार है क्या ? कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ लडता तो गुनाहगार है क्या ? मैं हैरान हूं कि आजकल मेरे ही देश में कुछ लोग मुझे गुनाहगार कह रहे हैं। क्या मेरा यही गुनाह है कि भ्रष्टाचार के दिन पूरे होते जा रहे हैं ? क्या यही मेरा गुनाह है कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड रहा है ? ’’ मोदी बोले, ‘‘हिन्दुस्तान की पाई पाई पर अगर किसी का अधिकार है तो सवा सौ करोड देशवासियों का है। मैं आपके लिए लडाई लड रहा हूं। ज्यादा से ज्यादा :विरोधी: मेरा क्या कर लेंगे ? हम तो फकीर आदमी हैं, झोला लेकर चल पडेंगे। ये फकीरी है, जिसने मुझे गरीबों के लिए लडने की ताकत दी है।’’ 

नोटबंदी के फैसले को सही बताते हुए मोदी ने कहा कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड रहा है। बैंकों का राष्ट्रीयकरण गरीबों के नाम पर हुआ था लेकिन इस देश के आधे से अधिक लोग ऐसे गरीब थे जिन्हें कभी बैंक के दरवाजे तक जाने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने कहा कि सबसे पहले बैंक में गरीबों का खाता खुलवाउंगा तो लोग मेरा मजाक उडा रहे थे। बडे बडे लोग अपनी पाकेट में कार्ड रखते हैं। कुछ लोगों की जेब में तो पांच पांच दस दस कार्ड होते हैं। हमने 20 करोड गरीबों को रूपे कार्ड दे दिया। अगर इस देश के गरीब को ताकत दी जाए तो गरीबी खत्म हो जाएगी।’’ मोदी ने कहा कि पहले नोटें छपती थीं और महंगाई बढ रही थी और नोटों के बंडल कहीं छिप जाते थे। ‘‘मैं अभी पीछे लगा हूं .. निकालो आ रहा है .. आपने देखा होगा कोने कोने से। कुछ लोग तो गरीबों के पैर पकड रहे हैं। ऐसा करो कि मेरा दो तीन लाख रूपये खाते में डाल दो। कभी किसी अमीर को गरीब के पैर पकडते नहीं देखा था। आज जिन बेईमान लोगों ने पैसा जमा किया है वो गरीबों के घर पर भी कतार लगाकर खडे हैं। बैंक के बाहर तो वो कतार लगाता है जिसमें ईमानदारी का माद्दा होता है। बेईमान गरीबों के घर के बाहर चोरी चुपके कतार लगाये हुए हैं।’’ उन्होंने कहा कि जब जनधन खाता खोला गया था तब गरीबों को भी पता नहीं था कि ये कैसे काम आएगा। ‘‘अब बताइये .. काम आ रहा है कि नहीं ? मैं देश के सभी जनधन खाते वाले गरीबों को कहना चाहता हूं कि जिसका भी पैसा बैंक में रखा है वो उठाइये मत। एक रूपया मत उठाइये। वो आपके घर के चक्कर काटेगा, आपके पैर पकडेगा।’’

मोदी ने नोटबंदी के कारण हो रही परेशानियों के निदान के लिए 50 दिन का समय मांगते हुए कहा, ‘‘ये कतार कतार की चर्चा करने वाले नेताओं से पूछना चाहता हूं .. भूल गये कि चीनी के लिए भी कभी कतार में खडा रहना पडता था। मिटटी के तेल के लिए कतार लगानी पडती थी .. आपने :अन्य दल: इस देश को कतार में 70 साल तक खडा किया है। उन कतारों को खत्म करने के लिए ये मैंने आखिरी कतार लगायी है।’’ उन्होंने जनधन खाताधारकों से अपील की कि जितने पैसे उनके बैंक में आये हैं, कोई कितना भी दबाव डाले उसे नहीं निकालें। ‘‘अगर रखे रखा तो मैं कोई रास्ता खोजूंगा। मैं दिमाग लगा रहा हूं अभी। दिमाग खपा रहा हूं। गरीब के खाते में जिन्होंने गैर कानूनी ढंग पैसा से डाला है वो जाए जेल में और गरीब के घर में जाए रूपया।’’ मोदी बोले, ‘‘ मैं हैरान हूं। आपने देखा होगा अच्छे अच्छे लोगों के चेहरे से चमक चली गयी है। पहले पूरा दिन मनी मनी करते थे अब मोदी मोदी बोल रहे हैं। मैं देशवासियों को फिर कहता हूं कि आपको कष्ट हो रहा है और देश के लिए आप कष्ट झेल भी रहे हैं। लोग आपको आकर भडकाने की कोशिश करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोग दो तीन घंटे से खडे हैं। बैंक पैसा नहीं दे रहा है लेकिन कोई गुस्सा नहीं कर रहा है क्योंकि देश की जनता के इरादे नेक हैं। जनता को पता है कि ये ईमानदारी का प्रयास है। जब विश्वास हो जाता है तो ये देश कुछ भी सहने को तैयार होता है, ये मैंने अनुभव किया है।’’ मोदी ने कहा कि देश का सामान्य नागरिक बेईमानी से तंग आ चुका है। आज देश के सवा सौ करोड लोगों ने कष्ट झेलकर भी इस लडाई को अपने कंधों पर उठा लिया है क्योंकि देश का सामान्य नागरिक बेईमानी नहीं चाहता।

मोदी ने कहा कि देश में ऐसी हवा बन गयी थी कि सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। नेताओं की जेब भर दो, काम चल जाएगा। अब वो नहीं चलेगा। पुराने रास्ते बंद हो चुके हैं। असहाय लोगों को आज लगने लगा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई को जीतना है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि आपने जो मेहनत की है .. घंटों कतार में बिना खाये पिये खडे रहे हैं .. मैं मेरे देशवासियों की तपस्या को बेकार नहीं जाने दूंगा। ईमानदारी के जितने रास्ते मुझे सूझेंगे, मैं देश को उस रास्ते पर ले जाने के लिए कोई कमी नहीं रहने दूंगा, ये विश्वास दिलाना चाहता हूं।’’ कैशलेस अर्थव्यवस्था की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि अब मोबाइल फोन में ही बैंक आ गया है। जो खर्च करना है, मोबाइल के जरिए करें। एटीएम पर जाकर नोट निकालना अब जरूरी नहीं है। आप अपने मोबाइल से भी खर्च कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेईमानी का पैसा बाहर निकालना है और भ्रष्टाचार समाप्त करना है। भविष्य में ये बीमारी खडी ना हो, इसके लिए भी दरवाजे बंद करने हैं।

मोदी ने नोटबंदी से किसानों को समस्या होने की विपक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा, ‘‘ मैं किसानों का विशेष रूप से वंदन करना चाहता हूं कि तकलीफ के बावजूद बुवाई में कमी नहीं आयी। पिछले साल से बुवाई बढी है। वो :विरोधी: भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का वातावरण पैदा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि देश सशक्त है और देश का नौजवान सशक्त है। जिस देश के पास 65 प्रतिशत लोग 35 साल से कम उम्र के होंे वो नौजवान देश को कहीं से कहीं पहुंचा सकता है। मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे लोगों को सिखायें कि हाथ में नोट नहीं होने के बावजूद पैसे चुकता किये जा सकते हैं। इससे ईमानदारी के सारे रास्ते खुल जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘बेईमानों को संदेश दीजिए। तालियां बजाकर संदेश दीजिए कि देश बेईमानी को स्वीकार नहीं करेगा ईमानदारी की ओर चलेगा। सबको मिलकर सत्तर साल की बीमारी बंद करनी है। ऐसी आवाज होनी चाहिए कि हर बेईमान के रोंगटे खडे हो जाएं।’’ मोदी ने जनता से अपील की कि वह मोबाइल पर कारोबार सीखे। ये कोई मुश्किल कार्य नहीं है। बहुत आसानी से पैसे देकर माल खरीदा जा सकता है। वक्त बदल चुका है। ‘‘बेईमानी के सारे दरवाजे बंद करने के लिए मुझे मदद चाहिए। नोट छाप छाप कर हम बेईमान की मदद नहीं करना चाहते। मैं रात दिन लगा हूं। आपकी तकलीफ मेरी तकलीफ है। 

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