UPSC टॉपर्स इसलिए हैं टॉपर

टॉपर्स ने बिना हार माने हासिल की सफलता...

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देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा मानी जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा के रिजल्ट्स आ गए हैं। सिविल सर्विस में जाना देश के लाखों नौजवानों का सपना होता है, लेकिन इस परीक्षा को सबसे कठिन भी माना जाता है। तमाम नौजवान अपनी सालों की मेहनत की बदौलत कई अटेम्ट्स में ये सफलता हासिल करते हैं, वहीं कई छात्र ऐसे भी होते हैं जिन्हें पहले ही प्रयास में सफलता हासिल हो जाती है। आये जानें टॉपर्स के टॉपर होने की कहानी...

UPSC की सिविल सर्विस- 2017 परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में कुल 1099 कैंडिडेंट्स (846 मेल और 253 फीमेल) को सलेक्ट किया गया है, जिनमें 500 कैंडिडेंट्स जनरल कैटेगरी से हैं, जबकि ओबीसी कैटेगरी के 347, एससी कैटेगरी के 163 और एसटी कैटेगरी के 89 कैंडिडेट्स ने एग्ज़ाम पास किया है।

इस बार 2017 की UPSC सिविल सर्विस परीक्षा में कर्नाटक की नंदिनी केआर ने पहला स्थान हासिल किया है। उनके अलावा कई सारे होनहारों ने सफलता हासिल की है। यहां हम आपको मिलवाते हैं कुछ ऐसे ही टॉपर्स से जिन्होंने UPSC 2017 की परीक्षा पास कर अपना मुकाम हासिल किया है।

नंदिनी के आर (पहली रैंक)

कर्नाटक के कोलार जिले की रहने वाली नंदिनी 2015 बैच की आइआरएस हैं। 15 सितंबर 1990 को जन्मीं नंदिनी के पिता टीचर हैं और मां गृहणी। नंदिनी से जब पूछा गया, कि देश में तीन सबसे बड़ी समस्याएं क्या हैं? तो उन्होंने कहा, 

"महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव, भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण और लोगों के नैतिक मूल्यों में गिरावट।"

नंदिनी महिलाओं को सशक्त करने के लिए काम करना चाहती हैं। नंदिनी का कहना है कि समाज के मौजूदा दौर में एक अच्छा नागरिक बनाना ज्यादा जरूरी है। उन्हें चौथे प्रयास में ये सफलता हासिल हुई। नंदिनी का मानना है कि लड़की और लड़कों में कोई फर्क नहीं करना चाहिए। अगर आप दोनों को बराबर मौका देंगे हैं तो लड़कियां भी आगे बढ़ेंगी और ये देश के लिए भी अच्छा है। नंदिनी ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय समाज के साथ-साथ अपने परिवार को दिया। नंदिनी ने कहा, उन्होंने एग्जाम में तो अच्छा किया, लेकिन उम्मीद नहीं कर रही थीं कि वह टॉप कर जाएंगी। अभी फिलहाल वे फरीदाबाद स्थित नेशनल अकैडमी ऑफ कस्टम एक्साइज एंड नारकोटिक्स में पिछले पांच माह से ट्रेनिंग ले रही हैं। नंदिनी का एक छोटा भाई भी है।

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अनमोल शेर सिंह बेदी (दूसरा रैंक)

टॉपर्स की लिस्ट में दूसरी जगह बनाने वाले अमृतसर के अनमोल शेर सिंह बेदी हैं। उन्होंने लड़कों में टॉप किया है। राजस्थान के BITS, पिलानी से कंप्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग करने वाले अनमोल ने अपनी सफलता पर कहा, 

"ये सब भगवान की दया से हुआ है। मुझे तो इस पर विश्वास ही नहीं हो रहा है।" 

अनमोल का शुरू से ज्यादा ध्यान किताबों की तरफ रहा है, खाली वक्त में उन्हें किताबें पढ़ना बेहद पसंद है। अनमोल का सिविल सर्विस में जो रोल मॉडल रहे हैं, वे हैं भारत की पहली महिला IPS किरण बेदी का। अनमोल के पिता डॉ. सरबजीत सिंह बेदी जालंधर NIT में ह्यूमैनिटीज एंड मैनेजमैंट विभाग के अध्यक्ष हैं और उनकी मां जस्सी बेदी एक NGO से जुड़ी हुई हैं। अनमोल को तो यकीन भी नहीं था कि वह इस बार सलेक्ट किए जाएंगे, इसीलिए वे अगले एग्जाम की तैयारी में जुटे हुए थे। लेकिन किस्मत और मेहनत से वे इस बार सेकंड टॉपर बन गए।

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गोपालकृष्ण रोनांकी (थर्ड रैंक)

आंध्र प्रदेश के गोपालकृष्ण रोनांकी की कहानी दूसरों को प्रेरणा देने वाली है। उन्होंने अपनी परीक्षा तेलुगू में दी थी। उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई सरकारी स्कूल में की। बाद में डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए बाकी की पढ़ाई की। उनके पैरंट्स पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनके पिता किसान हैं। गोपाल का सेलेक्शन 2011 में आंध्र प्रदेश की पब्लिक सर्विस के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने हैदराबाद में रहकर सिविल सर्विस की तैयारी करना बेहतर समझा। दिलचस्प बात ये है कि जिस कोचिंग में वे पढ़ते थे, वहां उनकी टीचर बाल लता ने भी 167वीं रैंक हासिल की है। वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं और कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाती हैं।

सौम्या पांडे (फोर्थ रैंक)

इलाहाबाद की रहने वाली सौम्या पांडे ने अपनी पहली ही कोशिश में सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर फोर्थ रैंक हासिल किया। सौम्या ने 2015 में इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट आफ टेक्नालाजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। वह इंस्टीट्यूट की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं। इससे पहले 10वीं और 12वीं में भी सौम्या जिले की टापर रही हैं। उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई इलाहाबाद से ही की है। सौम्या के पिता डॉ. आर के पांडेय कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट चलाते हैं जबकि मां डॉ. साधना पांडेय महिला रोग विशेषज्ञ हैं। मां-बाप की इकलौती संतान सौम्या बताती हैं कि,

"बीटेक करने के बाद इंजीनियर बनना मैंने इसलिए स्वीकार नहीं किया, क्योंकि मैं ऐसा करना चाहती थी, बल्कि ऐसा मैंने इसलिए किया ताकि मैं महिलाओं और लड़कियों के लिए कुछ बड़ा कर सकूं और ये करने का मौका मैं प्रशासनिक सेवा में आकर ही कर सकती हूं।"

सौम्या ने सफलता हासिल करने के लिए रोजाना 6 से 8 घंटे की पढ़ाई की। वह कहती हैं कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए स्मार्टवर्क की जरूरत होती है। सौम्या महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए काम करना चाहती हैं। वह कहती हैं कि आजादी के सत्तर साल बीतने के बाद भी महिलाओं की स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं आया है। यह चिंता का विषय है और इसके लिए वह काम करेंगी।

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बिलाल मोहिउद्दीन भट (टेंथ रैंक)

लंबे समय से अशांत चल रहे कश्मीर के लिए यूपीएससी ने इस बार भी खुशी वाली खबर दी है। पिछले साल दूसरे स्थान पर कश्मीर के ही आमिर ने कश्मीर का गौरव बढ़ाया था। इस बार कश्मीर के रहने वाले बिलाल मोहिउद्दीन भट को सिविल सेवा में 10वां रैंक मिला है। आमिर की तरह ही बिलाल भी पहले UPSC में सलेक्ट हो चुके हैं, लेकिन उनका सेलेक्शन भारतीय वन सेवा के लिए हुआ था। अभी वह लखनऊ में पोस्टेड हैं। बिलाल ने कहा,

"मैं शब्दों में अपनी भावनाओं को बयां नहीं कर सकता हूं। मैं आज खुद को दुनिया के शीर्ष पर रखकर महसूस कर रहा हूं। मैं इस कहावत में यकीन करता हूं- बार-बार, बार-बार कोशिश करो। मैं 2010 से ही कोशिश कर रहा' था।

सरकारी कॉलेज से पढ़ाई कर चुके बिलाल ने कश्मीर प्रशासनिक सेवा और बाद में भारतीय वन सेवा में भी सफलता हासिल की थी। उन्होंने कहा, 'मेरा लक्ष्य IAS बनना था।' बिलाल चाहते हैं कि उन्हें कश्मीर कैडर मिले, जिससे वे वहां के विकास में अपना योगदान दे सकें।

विश्वांजलि गायकवाड़ (11वीं रैंक, महाराष्ट्र में टॉप)

विश्वांजलि की मां प्रोफेसर हैं और उन्हीं से विश्वाजलि को सिविल सर्विस में अपना करियर बनाने की प्रेरणा मिली। 25 साल की विश्वांजलि ने UPSC 2017 में 11वां स्थान हासिल किया और महाराष्ट्र में प्रथम स्थान पर रहीं। उनके पिता मुरलीधर गायकवाड़ प्रोफेसर हैं और वह अकैडमिक माहौल वाले परिवार में पली-बढ़ी हैं। इसलिए उन्हें पढ़ाई की अहमियत पता है। विश्वांजलि का कहना है,

"किसी की मदद करने के बाद जो खुशी होती है, वो किसी दूसरे काम से नहीं हो सकती इसलिए मैंने IAS बनने का सपना देखा।"

उनकी मां ने लगातार पिछले 15 साल से बच्चों को एडमिशन दिलाने में मदद करती आ रही हैं। विश्वांजलि ने कहा कि उन्हें लगा कि उनकी शख्शियत मां की तरह ही है। इसके बाद उन्होंने प्रण कर लिया और IAS बनके ही दम लिया।

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UPSC की सिविल सर्विस -2017 परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में कुल 1099 कैंडिडेंट्स (846 मेल और 253 फीमेल) को सेलेक्ट किया गया है। इनमें 500 कैंडिडेंट्स जनरल कैटेगरी से हैं, जबकि ओबीसी कैटेगरी के 347, एससी कैटेगरी के 163 और एसटी कैटेगरी के 89 कैंडिडेट्स ने एग्जाम पास किया है। जिनमें से इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) के लिए 180, इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) के लिए 45 और इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के लिए 150 कैंडिडेट्स का सेलेक्शन हुआ है। 220 कैंडिडेट्स का नाम वेटिंग लिस्ट में है।

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