नींद का दुश्मन 'ख़र्राटा'

कुछ एहतियात रखें, तो ख़र्राटों से बचने के साथ-साथ ख़र्राटाग्रस्त व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहेगा और दीगर लोग भी चैन से सो सकेंगे।

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यदि आपको यह लगता है, कि नींद में ख़र्राटा लेना आम प्रक्रिया है, तो आप इस बड़ी तकलीफ को छोटी तकलीफ मान कर चलता करने की भूल न करें, क्योंकि नींद में ख़र्राटा लेना एक असामान्य बात है। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे दूसरों की नींद तो खराब होती ही है, साथ ही ख़र्राटाग्रस्त व्यक्ति का स्वास्थ्य भी खतरे में रहता है।

फोटो साभार: eco-supplements
फोटो साभार: eco-supplements
"खर्राटे आने की वजह यह है, कि ख़र्राटाग्रस्त व्यक्ति के मुंह के अदंर का ऊपरी हिस्सा सोते समय कुछ लटक जाता है, जिससे सांस लेने में आने-जाने वाली हवा का रास्ता रुकने लगता है। यह हवा मुंह में में लटक आई चमड़ी से टकरा कर आवाज़ पैदा करते हुए अंदर-बाहर होती है।"

खर्राटाग्रस्ट व्यक्ति यदि एलकोहलिक है और नींद की गोलियां खाता है, तो उसमें खर्राटे की समस्या और अधिक बदतर होती जाती है। गर्दन या गले के आसपास मौजूद अतिरिक्त चर्बी भी इस पर असर डालती है। समस्या गंभीर तब होती है, जब ख़र्राटे लेने वाला व्यक्ति सांस रोकने लगता है। कभी-कभी ऐसा वह एक रात में सौ बार करता है।

वैसे खर्राटे रोकने के लिए कई उपाय किये जाते हैं, जैसे सोने का स्टाइ बदल देना, तकिया ऊंचा या नीचा करके सोना, खानपान में एहतियात करना इत्यादि । लेकिन, ये तरीके काम न करें, तो ख़र्राटों का बकायदा इलाज भी होता है। डॉक्टरों के इस पर मतभेद हैं, कि खर्राटे रोकने के लिए मुंह के अंदर वाले ऊपरी हिस्से का अॉपरेशन किया जाना चाहिए या नहीं। यह एक कष्टदायक सर्जरी है, जिसे केवल आख़िरी विकल्प के रूप में रखना चाहिए, लेकिन यह कारगर होता है। इसके अलावा स्प्रे, गोलियां और विशेष प्रकार के तकिये आदि भी ख़र्राटों के इलाज में इस्तेमाल होते हैं।

कई आसान, प्राथमिक और घरेलू उपाय कारगर न होने पर चिकित्सक एक उपकरण इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। यह उपकरण निचले जबड़े और ज़बान को आगे कर देता है। इससे मुंह में जगह बन जाती है और हवा का रास्ता मिल जाता है। ख़र्राटों का एक और इलाज मास्क पहनना है, ख़र्राटाग्रस्त व्यक्ति की ज़रूरत के मुताबिक वायु नाक तक पहुंचाता है। इसे पहनना शुरू में बहुत अजीब लगता है, लेकिन यह ख़र्राटों से होने वाले शारीरिक नुक़सान से बचाता है। 

ख़र्राटों में कुछ बातों को प्रथमिक उपचार के तौर पर अपनाया जा सकता है,

-सोने से तीन घंटे पहले भारी खाना न खायें और न ही शराब का सेवन करें।

-अपनी उम्र, लंबाई और वजन के अनुपात से खाना खायें, जो आपको स्वस्थ रखने में मददगार हो।

-ज़्यादा वज़न वाले कसरत करें।

-यदि आपको एलर्जी है, तो बेडरूम में धूल-मिट्टी-गंध न होने दें।

-खिड़कियां खुली रखकर न सोयें।

-सोने का एक ढंग तय कर लें और इतना काम न करें कि थकान बहुत ज्यादा हो जाये।

-हवा में नमी कम होने पर ह्युमिडिफायर का उपयोग करें।

-डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, मक्खन, पनीर आदि म्यूकस बढ़ाते हैं, जिससे खर्राटे भी काफी बढ़ जाते हैं इसलिए सोने से दो घंटे पहले इन चीज़ों का बिल्कुल इस्तेमाल न करें।

और जो बात सबसे ज़रूरी है, वो ये है कि कोई भी तरीका अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर बात कर लें।