नमामि गंगे मिशन द्वारा यमुना नदी को साफ करने के नए प्रयासों पर टिकी दिल्ली की उम्मीद

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यमुना नदी को साफ करने के प्रयासों को और अधिक गति देते हुए पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 1,573.28 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उक्त परियोजनाएं बिहार, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के जरिये प्रदूषित जल को गंगा नदी में मिलने से रोकने का काम भी करेंगी।

इन परियोजनाओं से यमुना नदी में आगरा शहर द्वारा होने वाले प्रदूषण के भार में बेहद कमी आएगी जिसके चलते ताजमहल को बचाने के अलावा नदी के जल की गुणवत्ता, भूजल की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में सुधार देखने को मिलेगा।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) ने चार राज्यों में यमुना नदी के अपशिष्ट जल के शोधन के लिये 10 परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है, जिसके अंतर्गत गंगा नदी के गंदे जल को साफ किया जा सकेगा। यमुना नदी को साफ करने के प्रयासों को और अधिक गति देते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे) ने बुधवार को 1,573.28 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं को मंजूरी दी। उक्त परियोजनाएं बिहार, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश राज्यों के जरिये प्रदूषित जल को गंगा नदी में मिलने से रोकने का काम भी करेंगी।

इन परियोजनाओं को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुई एक बैठक के दौरान मंजूरी प्रदान की गई। फाईनेंशियल एक्स्प्रेस की खबर के मुताबिक, इस पहल के तहत 61 नालों/नालियों का उपयोग सुनिश्चित करना, कुल 166 एमएलडी की क्षमता वाले तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण, 9.38 एमएलडी के 10 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी का निर्माण और दो मौजूदा एसटीपी का नवीनीकरण, 17.61 किमी राईजिंग मेन को बिछाने का काम, सीवेज पंपिंग स्टेशनों (एसपीएस) और एसटीपी का नवीनीकरण, अवरोधन के काम का नवीनीकरण, क्लोरीनेशन के लिये एसटीपी का उन्नयन के अलावा 15 वर्षों के लिये संचालन और रखरखाव के काम शामिल हैं।

ताजमहल पर प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव के चलते 857.26 करोड़ रुपये की आगरा सीवेज योजना (इंटरसेप्शन और डिवीज़न वक्र्स) के पुनरूद्धार/नवीनीकरण से संबंधित एक परियोजना भी इन 10 अनुमोदित परियोजनाओं में से एक थी। एक सरकारी बयान के अनुसार,

‘इस बात की पूरी उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से यमुना नदी में आगरा शहर द्वारा होने वाले प्रदूषण के भार में बेहद कमी आएगी जिसके चलते ताजमहल को बचाने के अलावा नदी के जल की गुणवत्ता, भूजल की गुणवत्ता में सुधार होने के अलावा पूरे क्षेत्र में सुधार देखने को मिलेगा।’

लाईवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा नमामि गंगे ने उत्तर प्रदेश के कासगंज और सुल्तानपुर में 76.93 करोड़ रुपये की लागत से इंटरसेप्शन और डिवीजन के कार्यों और एसटीपी के निर्माण को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत, विशेषकर कासगंज में दो आई और डी संरचनाएं शामिल होंगी और 2.8 किमी का नेटवर्क बिछाना और 15 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण शामिल है। इसके अलावा इसमें 15 वर्षों के लिये रखरखाव और संचालन की लागत भी शामिल है।

कासगंज में सीवरेज प्रणाली मौजूद ही नहीं है और नालियों का गंदा पानी सीधे यमुना की सहायक और गंगा की उप-सहायक काली नदी में बहा दिया जाता है। इस कदम के जरिये इन नालियों को इस तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा कि इनका पानी शोधन के लिये प्रस्तावित एसटीपी से होकर गुजरे।

बयान के अनुसार, ‘यह सारी नालियां गोमती नदी में जाकर मिलती हैं जिसके परिणामस्वरूप नदी का पानी प्रदूषित होता है। इसलिये यह बेहद जरूरी हो जाता है कि इन नालियों को रोका/हटाया जाए और सीवेज/कचरे का शोधन करने के पश्चात अनुमत सीमाओं वाले पानी को गोमती नदी में छोड़ा जाए।’ नमामि गंगे समिति ने बिहार के छपरा, फतुहा, बख्तियारपुर और खगरिया के लिये कुल 328.52 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी।

समिति ने हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से पोंटा शहर पर अपना ध्यान केंद्रित किया और कुल 11.57 करोड़ रुपये की लागत से 1.72 एमएलडी के एक नए एसटीपी के निर्माण, मौजूदा 0.44 एमएलडी और 1 एमएलडी (विस्तारित वायु संचारण) के एसटीपी (विस्तारित वायु संचारण) की मामूली मरम्मत और फिल्टर का काम करवाने को मंजूरी प्रदान की है।

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