लिव इन रिलेशन से हिमालय तक प्रोतिमा बेदी

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वह दिल्ली में हरियाणा के व्यापारी लक्ष्मीचंद गुप्ता घर पैदा हुईं। मां बंगाली मूल की थीं। शादी के बाद पिता को घर छोड़कर दिल्ली में बसना पड़ा। प्रोतिमा एक जमाने में मॉडल थीं।

प्रोतिमा बेदी (फाइल फोटो)
प्रोतिमा बेदी (फाइल फोटो)
वर्ष 1974 में मुंबई में जुहू बीच पर बॉलीवुड पत्रिका सिनेब्लिट्ज़ के लिए दिन में निर्वस्त्र दौड़ लगाकर वह देश भर के अखबारों की सुर्खियों में छा गईं। 

अगस्त 1975 में, जब वह 26 वर्ष की थीं, एक ओडिसी नृत्य कार्यक्रम ने उनके पूरे जीवन की दिशा ही बदल कर रख दी। इसके बाद वह गुरु केलुचरण महापात्रा की शिष्य बन गईं।

प्रोतिमा बेदी के 68वें जन्मदिन पर उनकी दुनियादारी के उन पन्नों को पलटते हैं, जो आज मीडिया की सुर्खियों में है। वही प्रोतिमा, जिन्होंने एक तरफ तो लिव इन रिलेशन में रहकर कबीर बेदी के साथ बाद में शादी रचाई, दो बच्चे हुए पूजा बेदी-सिद्धार्थ, और एक दिन हिमालय यात्रा के दौरान दुनिया से महाप्रस्थान कर गईं। अब तो अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी में सुबह-सवेरे से शाम, देर रात गए तक कोई एक विस्फोटक सूचना आती है और पूरी दुनिया के कान खड़े हो जाते हैं। वह खबर कोरिया और अमेरिका की दादागीरी की हो अथवा गुजरात-हिमाचल में विधानसभा चुनाव अधिसूचना जारी होने की, आरुषि मर्डर केस पर हाईकोर्ट के फैसले की हो या प्रोतिमा बेदी के लिव इन रिलेशंस की। हमारे सामाजिक ताने-बाने की दृष्टि से इनमें आज की सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बातें प्रोतिमा गौरी बेदी की हैं। पहले आइए, बेदी महोदया के अतीत के कुछ पन्ने पलट लेते हैं।

वह दिल्ली में हरियाणा के व्यापारी लक्ष्मीचंद गुप्ता घर पैदा हुईं। मां बंगाली मूल की थीं। शादी के बाद पिता को घर छोड़कर दिल्ली में बसना पड़ा। प्रोतिमा एक जमाने में मॉडल थीं। बाद में भारतीय शास्त्रीय नृत्य, ओडिसी की व्याख्याता बन गईं। बैंगलुरु के पास 'नृत्यग्राम' की स्थापना की। इससे पहले वर्ष 1974 में मुंबई में जुहू बीच पर बॉलीवुड पत्रिका सिनेब्लिट्ज़ के लिए दिन में निर्वस्त्र दौड़ लगाकर वह देश भर के अखबारों की सुर्खियों में छा गईं। इसके बाद अगस्त 1975 में, जब वह 26 वर्ष की थीं, एक ओडिसी नृत्य कार्यक्रम ने उनके पूरे जीवन की दिशा ही बदल कर रख दी। इसके बाद वह गुरु केलुचरण महापात्रा की शिष्य बन गईं।

इसके बाद उन्होंने खुद को तंग पतलून, बिना बांहों के खुले गले वाले कपड़ों के साथ सुनहरे रंगे बालों वाली लड़की की बजाए खुद को प्रोतिमा गौरी में तब्दील कर लिया। छात्र उनको गौरी अम्मा कहने लगे। इसी बीच प्रोतिमा ने जुहू के पृथ्वी थियेटर में नृत्य स्कूल खोल लिया। प्रोतिमा के जीवन के साथ जो और भी सुखद-दुखद घटनाओं का झुंड रहा है, उनमें सिजोफ्रेनिया से पीड़ित उनके पुत्र सिद्धार्थ का उत्तरी कैरोलीना में अध्ययन के दौरान जुलाई 1997 में आत्महत्या कर लेना भी रहा है। उसके बाद उनके जीवन की राह ने एक और नया मोड़ लिया। वह घोषित तौर पर संन्यासिन बन गईं। कैलाश मानसरोवर से हिमालय की यात्रा करने लगीं और पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) के पास मालपा भूस्खलन में जीवन से महाप्रस्थान कर गईं। उनके जीवन के इतिवृत्तांत को उनकी अभिनेत्री बेटी पूजा बेदी ने उनकी आत्मकथा टाइमपास में पूरी जीदारी से उजागर किया।

अब आइए, प्रोतिमा के 68वें जन्मदिन पर उनकी दुनियादारी के उन पन्नों को पलटते हैं, जो आज मीडिया की सुर्खियों में है। मॉडलिंग के जोशीले दिनों में ही प्रोतिमा की अभिनेता कबीर बेदी से मुलाक़ात हुई। जब एक पार्टी में उनकी दोस्त नीना ने उनका परिचय कराया। इस मुलाक़ात के कुछ महीनों के भीतर ही उन्होंने कबीर के साथ रहने के लिए अपने अभिभावकों का घर छोड़ दिया। शादी से पहले तक वह दोनो लिव इन रिलेशनशिप में रहे। दोनो 1969 में शादी के बंधन में बंध गए। दो बच्चे हुए - पूजा बेदी, और सिद्धार्थ।

इस दौरान उनके पंडित जसराज, वसंत साठे, विजयपत सिंघानिया, मारियो क्रोप्फ़, जैक्स लेबेल, रोम व्हिटकर और रजनी पटेल से भी उनके सम्बन्ध रहे। यह भी उल्लेखनीय होगा कि वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा था कि शादी से पहले संबंध कायम करना अपराध नहीं है। देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो शादी से पहले संबंध की मनाही करता हो। अदालत का यह अभिमत लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने की व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के मूलभूत अधिकार को एक नया आयाम देता है। इस दृष्टि से प्रोतिमा गौरी बेदी के कदम दुस्साहसिक तो थे लेकिन असमाजिक नहीं। बाकी उनके जीवन पर चाहे जो कुछ भी कहा जाए, सोचा जाए। 

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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