स्टार्टअप शुरू करने से पहले

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जिस तरह से हर ओर स्टार्टअप की धूम मची है उस तरह से ये यकीन हो चला है, कि देश की तरक्की का रास्ता स्टार्टअप से होकर जाता है और यकीन हो भी क्यों नहीं, देश के युवाओं और स्टार्टअप्स के प्रति उनका झुकाव सचमुच देश को एक नये और अनोखे प्रगति के मार्ग पर ले कर चल दिया है। ऐसे में बेंगलुरू देश का ऐसा शहर है जहां टैलेंट की सही पहचान होती है। 

बेंगलुरू ने स्टार्टअप की दुनिया में तरक्की के कई नये मौके दिये हैं।  कई नई प्रतिभाएं स्टार्टअप के रूप में यहीं उभर कर सामने आई हैं।

दिग्गजों के मुताबिक ज्यादातर देसी स्टार्टअप्स घरेलू दिक्कतों को हल कर रहे हैं और साथ ही घरेलू जरूरतों को पूरा करने वाले स्टार्टअप्स पर 70 फीसदी निवेश कर रहे हैं। स्टार्टअप्स ने अबतक 240 करोड़ डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है। फंडिंग के मामले में बेंगलुरू दुनिया के पहले 4 शहरों में से एक है। सबसे ज्यादा फंडिंग ई-कॉमर्स में हुई है। दूसरे नंबर पर इंरनेट और मोबाईल एप आते हैं। फंडिंग का पहला फंडा ये है कि फंड को फायदा होना जरूरी है। तभी भविष्य की फंडिंग के रास्ते खुलते हैं।

देश के 28 फीसदी स्टार्टअप्स बेंगलुरू में हैं जिनके 13 फीसदी प्रोमोटर्स 36 साल से कम उम्र के हैं। देश में हर महीने 500-800 स्टार्टअप शुरू होते हैं। भारत में स्टार्टअप 270 फीसदी की दर से बढ़ रहे हैं और आने वाले 5 सालों में सिर्फ स्टार्टअप ही 3 लाख से अधिक रोज़गार देने में सक्षम हो जायेंगे। हर कोई मालिक की तरह जीना चाहता है।

किसी को अपनी ज़िंदगी में नौकर बनना पसंद नहीं, लेकिन फिर भी लोग मजबूरन नौकरी करते हैं, क्योंकि हर किसी की किस्मत में मालिक/संस्थापक/सीईओ बनना नहीं होता, लेकिन स्टार्टअप ने उस हर किसी की किस्मत को बदल दिया है, जिन जिन ने ये सपना देखा। जिन्होंने ये सपना देखा वे कूद पड़े स्टार्टअप की दुनिया में कुछ अलग और बेहतर करने। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इस स्टार्टअप के सपने को पूरा करने के लिए कई तरह की प्लानिंग्स की ज़रूरत होती है। यदि प्लानिंग्स नहीं होंगी तो मामला ठप। बहुत मुश्किल नहीं है ये सबकुछ। यहां जानें स्टार्टअप शुरू करने से पहले कुछ आसान और ज़रूरी बातें, ताकि आप भी बन सकें एक सफल आंत्रेप्रेन्योर:

स्टार्टअप शुरू करने से पहले समझें अपना रास्ता

आप जो भी व्यापार शुरू करने की सोच रहें हैं, तो पहले आप उसे अच्छे से समझ जाएं। पहले आप ‘आंत्रेप्रेन्योरशिप’ और ‘स्टार्टअप’ जैसे दो शब्दों के बिच का फर्क समझें। बता दें कि दोनों में ज्यादा कुछ फर्क नहीं है, मगर नए वक्त के हिसाब से बदलते बिजनेस के रंगढंग ने स्टार्टअप शब्द को जन्म दिया है। मूलरूप से स्टार्टअप अक्सर उन उद्योंगो को कहते हैं जो किसी ऐसे आइडिया पर होते हैं जिन पर पहले काम नहीं हुआ है।

फेसबुक और गूगल कभी ऐसे ही स्टार्टअप थे। बहुत कम पूंजी से शुरू हुए ये स्टार्टअप करोड़ो की कंपनी बनने का दम रखते हैं। परिभाषाओं को छोड़ कर अगर खालिस काम की बात की जाए तो यह जानना बहुत जरूरी है कि अपना कुछ भी शुरू करने के लिए बिजनेस से जुड़ी बेसिक बातों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

स्टार्टअप से पहले प्लानिंग और फंडिंग

अपने बिसनेस को शुरू करने से पहले हमेशा अच्छी तैयारी करें। क्योंकि स्टार्टअप को शुरू करने से पहले केवल आईडिया ही नहीं बल्कि उसके साथ ही फंडिंग की भी जरुरत रहती है। आइडिया लेवल पर ही फोकस न होना स्टार्टअप के फेल होने की सबसे बड़ी वजह साबित होगी, तो ऐसी गलती कभी न करें जो आपको ले डूबे।

सबसे ज्यादा ज़रूरी हैं खुद से कुछ सवाल; जैसे- क्या मेरा आइडिया या प्रॉडक्ट वाकई किसी के काम का है? क्या किसी जरूरत को पूरा करने के लिए शुरू किए किसी खास बिजनेस से मुझे फायदा होगा? क्या मेरे आइडिया पर पहले से कंपनियां काम कर रही हैं? अगर हां तो मेरा प्लान उनसे कितना बेहतर या अलग है? क्या आइडिया को जमीन पर लाना प्रैक्टिकल तरीके से मुमकिन है? मेरा आइडिया अच्छा तो है, लेकिन क्या इसे लोगों तक पहुंचाना मुमकिन है? मेरा आइडिया कितना लीगल है? उसमें किसी कानूनी पचड़े तो नहीं हैं? क्या यह ऑपरेट करने के लिहाज से सेफ है? बिजनेस शुरू करने और इसकी मार्केटिंग में आने वाले खर्च को जुटाना क्या मुमकिन है? क्या बिजनेस से मुनाफा मिलने की दर इतनी होगी कि मैं सफलता से अपने आइडिया को जमीन पर जमाए रख सकूं? स्टार्टअप शुरू करने करने से पहले यदि आपके पास अपने इन सभी सवालों के जवाब हैं, तो आप समझें कि आप पूरी तरह से तैयार हैं एक नई शुरूआत के लिए।

मार्केट  के कॉम्पिटिशन की करें अच्छे से पड़ताल

बिजनेस डिटेल्स जैसे नाम, लोकेशन, मार्केट और इस फील्ड में पहले से मौजूद कंपनियों से कॉम्पिटिशन जैसी चीजें प्लान करें। बिजनेस से आप क्या पाना चाहते हैं और कैसे पाना चाहते हैं इसके बारे में डॉक्युमेंट तैयार करें मिसाल के तौर पर आप १ या २ साल बाद खुद को और अपने बिजनेस को किस मुकाम पर देखते हैं? कितने फंड की जरूरत है फंड को इस्तेमाल कैसे करेंगे?

इन सब सवालों को ध्यान में रख कर अपने प्रॉडक्ट की सर्विस से जुड़ी मार्केट का ब्योरा तैयार करें। इससे जुड़ी इंडस्ट्री के ट्रेंड की जानकारी लें। किस मार्केट को टारगेट करना है इसके बारे में भी डॉक्युमेंट तैयार करें। इसमें एक्सपर्ट की मदद भी ली जा सकती है।

फंडिंग है सबसे चैलेंजिंग और ज़रूरी चीज़

स्टार्टअप शुरू करने की सबसे चैलेंजिंग स्टेज है फंड जुटाना। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि प्लानिंग के लेवल पर जहां आप काफी कुछ कंट्रोल करने की हालत में होते हैं, वहीं फंडिंग के लेवल पर कुछ भी आपके हाथ में नहीं होता। हो सकता है कि जो प्लानिंग बड़े बिजनेस के सपने दिखा रही हो वह फंड करने वालों को किसी काम की ही न लगे। ऐसे में ज़रूरी है कि अपनी फंडिंग सुनिश्चित कर लें और फंडिंग जहां से हो रही है वहां पूरी ट्रांसपेरेेंसी बरतें, क्योंकि मामला जहां पैसों का होता वहां घपले, झूठ और चीटींग को दूर रखना चाहिए।

स्टार्टअप शुरू करने से पहले यदि आप ध्यान रखेंगे इन सभी बातों का तो यकीनन आप एक सफल आंत्रेप्रेन्योर साबित हो सकेंगे।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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