जानिए कैसे 10 रुपए के फिल्टर से प्रदूषण के खिलाफ जंग जीत रहे उद्यमी प्रतीक शर्मा

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दिल्ली में सांसें लेने के कई नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं और अभी तक किसी से कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ा, लेकिन आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र और उद्यमी प्रतीक शर्मा ने वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में काफी हद तक सफलता हासिल की है।

नैनौक्लीन की टीम आईआईटी दिल्ली में
नैनौक्लीन की टीम आईआईटी दिल्ली में
नैनोक्लीन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों, प्रोफसरों और वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों ने एक नैनो-रेस्पिरेटरी फिल्टर बनाया है।

भारत में अभी हाल ही में सबसे बड़ा त्यौहार दीवाली बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। लेकिन पिछले कुछ सालों से देश की राजधानी दिल्ली वालों के लिए इस त्यौहार के साथ एक बेहद ही डराने वाला सच जुड़ गया है। वो है प्रदूषण का बढ़ना। वैसे तो पूरे साल ही दिल्ली में प्रदूषण काफी ज्यादा रहता है लेकिन दीवाली के बाद ये और अधिक बढ़ जाता है। इन दिनों दिल्ली का हाल गैस चैंबर जैसा हो चुका है जहां सांस तक लेना दूभर हो चुका है।

हालांकि दिल्ली में सांसें लेने के कई नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक किसी से कुछ खास प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र और उद्यमी प्रतीक शर्मा ने वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में काफी हद तक सफलता हासिल की है। प्रतीक शर्मा ने वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई के लिए एक इनोवेटिव और कम लागत वाला एयर फिल्टर डिवाइस तैयार किया है। दिवाली के इस अवसर पर काफी लोगों ने इस फिल्टर का इस्तेमाल किया। इस फिल्टर को खास बनाती है इसकी कीमत। दरअसल ये वन टाइम यूज फिल्टर महज 10 रुपए में उपलब्ध है। 

नैनोक्लीन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों, प्रोफसरों और वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों ने एक नैनो-रेस्पिरेटरी फिल्टर बनाया है। यह नेनोक्लीन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड का पहला कॉमर्शियल प्रोडक्ट है जिसे प्रतीक ने तुषार व्यास और जतिन केवलानी के साथ मिलकर स्थापित किया था।

इस किफायती नोज फिल्टर का एक और बड़ा फायदा है: यह बाजार में आमतौर पर पाए जाने वाले बड़े पारंपरिक फेस मास्क के विपरीत लगाने पर दिखाई नहीं देता है और नाक के साथ कम्फर्टेबल रहता है। किसी भी उपयोगकर्ताओं को केवल अपनी नाक को इस पारदर्शी फिल्टर के साथ कवर करना होता है और इसे आठ घंटे तक पहना जा सकता है। ये फिल्टर आपको दिल्ली में पीएम 2.5 और सांस संबंधित बीमारियों से लड़ने में भी मदद करेगा। कंपनी का दावा है कि पीएम 2.5 को ब्लॉक करने में इस फिल्टर की 95 प्रतिशत दक्षता दर है।

नासोफिल्टर की यूएसपी क्या है?

प्रतीक कहते हैं, "इन फिल्टरों की सबसे खास बात यह है कि ये फिल्टर बहुत आरामदायक हैं। वे आपके सौंदर्य पर काफी अच्छे लगते हैं और काफी सस्ते भी हैं।" नैनोक्लीन को हाल ही में फेसबुक 'बिल्डिंग फॉर द वर्ल्ड' पुरस्कार के विजेता के रूप में घोषित किया गया था, जो वैश्विक स्तर पर उपयोग किए जा रहे समाधानों पर काम करने वाले स्टार्टअप को मान्यता देता है।

ये प्रोडक्ट बनाने का आइडिया प्रतीक को अपने घर से ही आया जब उनके घर में इसकी जरूरत थी। दरअसल प्रतीक की मां अस्थमा से पीड़ित थीं और वह प्रदूषण से लड़ने के लिए बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम उत्पादों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे। उस समय उपलब्ध अन्य डिवाइस या तो बहुत बड़ी थीं या फिर चेहरे को ढकने वाली थीं या फिर नाक में डालने वाली डिवाइस थीं जो काफी असहज भी थीं। प्रतीक कहते हैं, "मेरे सामने बड़ी समस्या थी। एक समस्या यह थी कि या तो चेहरे को ढंके या दूसरी ये कि डिवाइस को नाक के अंदर डालें। लेकिन अब दोनों समस्याओं का समाधान नासोफिल्टर है, जो मैं अपनी नाक पर पहन रहा हूं।"

ऐसे बचें वायु प्रदूषण से

राजस्थान के पश्चिमी हिस्से से आने वाले वाले प्रतीक इस क्षेत्र में आने वाले धूल के तूफान से काफी अच्छे से परिचित हैं। इसलिए भी उनको इस प्रोडक्ट की जरूरत महसूस हुई थी जो प्रदूषण से लड़ने में प्रभावी और सस्ती साबित हो क्योंकि बाजार में उपलब्ध ज्यादातर प्रोडक्ट या तो महंगे हैं या फिर असहज।

नासोफिल्टर को नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग करके विकसित किया गया है। जिससे सांस लेने में ये बहुत कम प्रेशर देता है और सुनिश्चित करता है कि सांस लेने के दौरान आसानी हो। प्रतीक और उनकी टीम ने प्रदूषकों को फिल्टर करने के लिए 100 बार एक सामान्य कपड़े के थ्रेड डायमीटर को कम करके नैनो फाइबर बनाया है। भारत के कई शहर आज खराब हवा की गुणवत्ता से जूझ रहे हैं। उदाहरण के लिए, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में खुलासा किया कि दक्षिण, उत्तर भारत के कई शहरों समेत दिल्ली, लखनऊ और कानपुर हवा की गुणवत्ता में गिरावट का सामना कर रहे हैं।

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