खेलने-कूदने की उम्र में बने सीईओ, भारतीय उद्योग जगत में लहराया अपनी सफलता का परचम

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कहते हैं सफलता को उम्र के तराजू से तोलना संभव नही है, अगर इंसान की मेहनत और लगन सच्ची हो तब वो छोटी उम्र में भी सफलता की इबारत लिख सकता है। आज हम आपको ऐसे ही दो भाईयों कि सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने खेलने-कूदने की उम्र में ही करोड़ों का टर्नओवर देने वाली कंपनी के सीईओ बनकर अच्छे-अच्छों को दाँतों तले उँगलियाँ दबाने को मजबूर कर दिया है।

श्रवन कुमारन व संजय कुमारन ( साभार: सोशल मीडिया)
श्रवन कुमारन व संजय कुमारन ( साभार: सोशल मीडिया)
अन्य बच्चों के तरह कुमारन भाईयों को भी कंप्यूटर गेम्स खेलना बेहद पसंद था, लेकिन इन्होंने बाकी के बच्चों की तरह खुद को सिर्फ गेम खेलने तक सिमित नहीं रखा बल्कि थोड़ा आगे बढ़ कर खुद का गेम विकसित कर लिया।

चेन्नई के दो होनहार भाई श्रवण कुमारन और संजय कुमारन को बचपन से ही कंप्यूटर से अत्यधिक लगाव रहा है और इसी लगाव की बदौलत दोनों भाई महज़ 12 और 10 साल की उम्र में ही करोड़ों का टर्नओवर देने वाली कंपनी के सीईओ बन बैठे हैं। कुमारन भाईयों को हमेशा से कंप्यूटर चलाने में इतना मज़ा आता था कि वे स्कूल और घर में ज्यादा से ज्यादा समय कंप्यूटर पर ही व्यतीत करते थे।

श्रवण कुमारन जब आठवीं क्लास में थे, तभी अपने भाई संजय कुमारन (जो उस वक्त छठवीं क्लास में थे) के साथ मिल कर कई मोबाइल ऐप्स बना डाले थे। अन्य बच्चों की तरह कुमारन भाईयों को भी कंप्यूटर गेम्स खेलना बेहद लुभाता था परन्तु इन्होंने और बच्चों की तर खुद को सिर्फ गेम खेलने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इससे आगे बढ़ कर खुद का गेम एप्प विकसित करने का फैसला कर लिया। 

कुमारन ब्रदर्स ने जब अपनी खुद की कंपनी बनाने की सोची, तो उनकी उम्र काफी कम थी एक 12 साल का तो दूसरा 10 साल का, ऐसे में उनके नाम से कंपनी रजिस्ट्रेशन तो मुमकिन नहीं था, क्योंकि उम्र सबसे बड़ी बाधा थी। फिर इन्होंने अपने माता-पिता के नाम पर गो डायमेंशन नामक कंपनी की नीव रखी और इसके बैनर तले कई शानदार मोबाइल ऐप्स का निर्माण किया।

एक पुरानी फोटो में कुमारन ब्रदर्स अपने माता-पिता के साथ, फोटो साभार: सोशल मीडिया
एक पुरानी फोटो में कुमारन ब्रदर्स अपने माता-पिता के साथ, फोटो साभार: सोशल मीडिया

कुमारन भाई कहते हैं “हम गेम खेलने से ज्यादा दिलचस्पी गेम बनाने में रखते हैं। गेम कैसे विकसित किये जाते हैं हम इसे लेकर अत्यधिक जिज्ञासु थे और हमलोग स्वयं ही कुछ ऐसा बनाना चाहते थे।

अपनी गेमिंग में दिलचस्पी को बरकरार रखते हुए इन्होंने सबसे पहले ‘कैच मी कॉप’ नामक पहला गेमिंग ऐप बनाया, जिसमे एक चोर जेल से भाग जाता है और उसे पकड़ने का पूरा वाक्या गेम को और भी दिलचस्प बनाता है। इस गेम को लोगों द्वारा बड़ी सफलता हासिल हुई। वर्ष 2012 में गूगल प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर शुरुआत कर पहले हफ्ते में ही लोगों ने 2000 से अधिक डाउनलोड्स किये। शुरूआती सफलता को देखते हुए कुमारन ब्रदर्स ने दिन दोगुनी रात चौगुनी मेहनत कर सफलता की सीढियों पर कदम बढ़ाये।

दोनों भाई अभी ऐसे दिखते हैं। फोटो साभार Forbes
दोनों भाई अभी ऐसे दिखते हैं। फोटो साभार Forbes

कुमारन ब्रदर्स को अपना पहला ऐप्प जारी करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। अपने ऐप्प को लॉन्च करने से पहले उन्हें करीब 125 ऐप्स का परिक्षण करना पड़ा। संसाधनों की कमी होने के कारण ऐप्प को विकसित करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में अपना पहला प्रोडक्ट लॉन्च करने में उन्हें काफी वक्त लग गया।

आखिरकार कुमार ब्रदर्स की कड़ी मेहनत और लगनशीलता रंग लाई और उनके हाथ कामयाबी लगी।

TeDX के एक वीडियो में कुमारन ब्रदर्स, वीडियो साभार: youtube
TeDX के एक वीडियो में कुमारन ब्रदर्स, वीडियो साभार: youtube

चेन्नई के ये कुमारन ब्रदर्स अब तक गो डायमेंशन के बैनर तले 10 से ज्यादा ऐप लॉन्च कर चुके हैं, जिन्हें लगभग 10 लाख से ज्यादा डाउनलोड किया गया है। माता-पिता के सहयोग से दोनों भाईयों ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान देते हुए ‘अल्फाबेट्स बोर्ड’ और ‘कलर पैलेट’ नामक दो शैक्षणिक ऐप भी विकसित किये हैं।

इतना ही नहीं बल्कि दोनों शैक्षणिक ऐप को इन्होंने विज्ञापनों से मुक्त रखते हुए इनकी मार्केटिंग खुद ही की और अब इनकी कोशिश है, कि भविष्य में इस ऐप्प को डाउनलोड करने के लिए लोग भुगतान भी करें।

दोनों भाई एक साथ। आज से कुछ साल पहले की तस्वीर, फोटो साभार: सोशल मीडिया।
दोनों भाई एक साथ। आज से कुछ साल पहले की तस्वीर, फोटो साभार: सोशल मीडिया।

कुमारन ब्रदर्स किसी कंपनी को चलाने वाले सबसे कम उम्र के डायरेक्टर्स की सूचि में शामिल हैं। वर्तमान में श्रवन और संजय टीन एज बॉय हो चुके हैं। दोनों भाईयों को फिक्की फ्रेम्स 2016 के सम्मलेन में सबसे कम उम्र के पैनल सदस्य बनने का गौरव भी प्राप्त हो चुका है।

इन दोनों भाईयों की कंपनी के आमद का मुख्य जरिया इनके ऐप के अन्दर मौजूद विज्ञापन से होता है। प्रत्येक क्लिक पर उन्हें 0.07 डॉलर का मुनाफा होता है। अगर इनके सारे ऐप का रेवेन्यू जोड़ दिया जाए तो इनकी कंपनी को हर महीने करोड़ों की कमाई होती है। इनकी कंपनी को भारत समेत यूएस और चीन की कई कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट भी मिल चुके हैं।

कुमारन फैमिली की ताज़ा फोटो, जिसमें दोनों भाई अपने माता-पिता के साथ बैठे हैं। फोटो साभा: Forbes
कुमारन फैमिली की ताज़ा फोटो, जिसमें दोनों भाई अपने माता-पिता के साथ बैठे हैं। फोटो साभा: Forbes

कम उम्र और संसाधनों की कमी के बावजूद भी कुमारन ब्रदर्स ने खुद की काबिलियत और मेहनत के बदौलत एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित करते हुए यह साबित कर दिया है कि सफलता किसी उम्र के दायरे से बंधी नहीं होती। बशर्ते हमें पूरी लगन, ईमानदारी और समझ के साथ अपने सपनों को साकार करने की कोशिश करनी होती है। 

DPS आरके पुरम में कुमारन ब्रदर्स, वीडियो साभार: youtube
DPS आरके पुरम में कुमारन ब्रदर्स, वीडियो साभार: youtube

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