एनआरआई दूल्हों की धोखाधड़ी से बचाने के लिए सरकार का बड़ा कदम

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एनआरआई लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी न होने की वजह से ऐसी शादियां हो जाती हैं और फिर लड़कियों को कई तरह का उत्पीड़न झेलना पड़ता है। इस तरह के उत्पीड़न और धोखेबाजी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
 सभी शादियों के अनिवार्य जिस्ट्रेशन को लेकर कानून जल्द ही बनने की उम्मीद है। जिसके बाद एनआरआई के लिए भी एक अलग कानून बनाया जा सकता है।

विदेश में बेहतर जिंदगी की आस में लोग अपनी बेटियों की शादी एनआरआई से करवा देते हैं लेकिन पिछले कई सालों से एनआरआई लड़के से शादी में लड़कियों के उत्पीड़न और उनके साथ धोखे की शिकायत लगातार बढ़ रही है।

भारत में एनआरआई (अनिवासी भारतीयों) से शादी करके फंसने का मुद्दा काफी बड़ा है। न जानें लड़कियों की जिंदगी एनआरआई जालसाजों से शादी करके बर्बाद हो गई। दरअसल एनआरआई लोगों के बारे में ज्यादा जानकारी न होने की वजह से ऐसी शादियां हो जाती हैं और फिर लड़कियों को कई तरह का उत्पीड़न सहना होता है। इस तरह के उत्पीड़न और धोखेबाजी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब ऐसी शादियों को रजिस्टर करवाया जाएगा और इन्हें बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर देखा जा सकेगा। इसके साथ ही दूसरे कदम उठाने पर विदेश मंत्रालय, कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय और महिला और बाल विकास मंत्रालय के बीच सहमति बनी है। ये कदम लागू होने के बाद कोई एनआरआई शादी के नाम पर लड़कियों का उत्पीड़न नहीं कर पाएगा।

विदेश में बेहतर जिंदगी की आस में लोग अपनी बेटियों की शादी एनआरआई से करवा देते हैं, लेकिन पिछले कई सालों से एनआरआई लड़के से शादी में लड़कियों के उत्पीड़न और उनके साथ धोखे की शिकायत लगातार बढ़ रही है। इस बात पर महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि हमने विदेश मंत्रालय से मांग की थी कि इसे गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठाए जाएं। जस्टिस अरविंद गोयल की अगुवाई में एक जॉइंट कमिटी बनी थी जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी है। मेनका ने बताया कि लंबी चर्चा के बाद सभी मंत्रालय इस बात पर सहमत हैं कि शादी के रजिस्ट्रेशन का लिंक महिला और बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर भी दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी राज्यों के रजिस्ट्रार ऑफिस से कहा जाएगा कि वह सभी शादी के रजिस्ट्रेशन को मंत्रालय की वेबसाइट से इंटीग्रेट करें। इससे मैरिज रजिस्ट्रेशन को सभी लोग देख सकेंगे और धोखाधड़ी के चांस कम होंगे। मेनका ने कहा कि हम इसे इसी महीने के अंत से शुरू कर देंगे। साथ ही विदेश मंत्रालय, कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय और महिला और बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों की एक इंटीग्रेटेड नोडल एजेंसी (आईएनए) बनाई जाएगी। यह एनआरआई शादी में उत्पीड़न या धोखे का शिकार महिला के लिए सिंगल विंडो सिस्टम का काम करेगी।

अभी एक महीने पहले ही एक अंतर-मंत्रालयीन समिति ने विदेश मंत्रालय को दी अपनी सिफारिश में यह बात कही थी कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों (एनआरआई) की शादी का रजिस्ट्रेशन भारत में कराने के लिए आधार को अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि बाद में पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह का विवाद होने पर मामले को सही तरीके से निपटाया जा सके। पिछले कुछ सालों में भारतीय महिलाओं को विदेश में एनआरआई पतियों द्वारा धोखे दिए जाने, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष समिति की ओर से यह प्रस्ताव भेजा गया था। कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सोमवार को हुई मीटिंग में इस पर भी चर्चा की गई कि नियमों का उल्लंघन करने वाले एनआरआई का पासपोर्ट जब्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी शादियों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को लेकर कानून जल्द ही बनने की उम्मीद है। जिसके बाद एनआरआई के लिए भी एक अलग कानून बनाया जा सकता है। जिसमें किसी भी एनआरआई शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए एक तय लिमिट तय की जा सकती है। उस पीरियड में अगर शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया, तो जानकारी मिलने पर एनआरआई का पासपोर्ट जब्त किया जा सकता है।

बैठक में यह सवाल भी उठा कि अगर बिना रजिस्ट्रेशन के ही कोई एनआरआई विदेश चला गया तो कैसे उसे कानून के शिकंजे में लाया जा सकता है। इस पर यह चर्चा की गई कि अगर कोई महिला जिसे उसके एनआरआई पति ने धोखा दिया है और वह कोर्ट में जाकर न्याय मांग रही है तो उस एनआरआई को नोटिस भेजा जाएगा। अगर वह नहीं आया तो उसकी भारत में जो भी प्रॉपर्टी है उसे तब तक अटैच किया जा सकता है जब तक कि वह भारत आकर कानून के समक्ष पेश नहीं होता। कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में सभी इन उपायों पर सहमत थे। अब राज्यों से भी इस मसले पर बात की जाएगी।

जस्टिस अरविंद गोयल कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि किस-किस तरह से एनआरआई के साथ शादी में महिलाएं धोखे का शिकार बनती हैं। कई मामलों में एनआरआई शादी के बाद महिला को यहीं छोड़ जाते हैं और दहेज का सारा सामान लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं। कई मामलों में महिला को एनआरआई के प्रोफेशन, अड्रेस, इनकम और यहां तक की उसके मैरिटल स्टेटस की भी सही जानकारी नहीं होती है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें एनआरआई पति पहले महिला को अपने साथ ले जाने के लिए स्पॉनसरशिप देता है लेकिन आखिरी वक्त में उसे कैंसल कर महिला पक्ष से और ज्यादा पैसे ऐंठता है।

मंत्रालय के पास ऐसे मामलों की भी शिकायत आई है जिसमें महिला को एनआरआई पति अपने साथ ले तो जाते हैं लेकिन फिर उसका उत्पीड़न होता है। ऐसे केस भी सामने आए हैं जहां महिला को एनआरआई पति दूसरे देश के एयरपोर्ट पर लेने ही नहीं आते और महिला के पास उनका सही पता तक नहीं होता। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि किस तरह महिला को अपने साथ न रखकर कुछ वक्त बाद एनआरआई पति ही यह कहकर तलाक का केस डाल देता है कि महिला तो उसके साथ रही ही नहीं।

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