कढ़ाई के काम से जुड़ा सामान खरीदना है तो 'EmbroideryMaterial.com' पर आएं

संस्थापक वरुण कुमार के पास इससे पहले एक एक्सपोर्ट हाउस के साथ प्रोडक्शन डायरेक्टर के रूप में काम करने का है अनुभवकढ़ाई के काम में प्रयुक्त होने वानी विभिन्न प्रकार की सुईयों से लेकर लकड़ी के फ्रेम और मोती और सिताने सहित हर सामग्री है उपलब्ध2013 में स्थापित हुआ यह स्टार्टअप बहुत कम समय में अपने प्रतिस्पर्धियों से निकल गया है आगेकंपनी को अपने ई-काॅमर्स मंच को अपडेट करने के लिये आवश्यकता है एक मिलियन डाॅलर के निवेश की

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वर्ष 2013 में ई-काॅमर्स के क्षेत्र में दस्तक देने वाली EmbroideryMaterial.com (ईएमसी) बहुत ही कम समय में लोकप्रियता के नए मुकाम को छूने में सफल रही है। और उसके बाद से उन्हें कभी पीछे मुड़कर देखने की नौबत नहीं आई है।

एक बी2बी स्टार्टअप के रूप में संचालित होने वाली ईएमसी जीवनशैली से संबंधित उद्योगों के अलावा वस्त्रों और एसेसरी से संबंधित उद्योगों में काम अपने वाले मोती, चमकीले सितारों और रंगबिरंगे पत्थरों के अलावा कढ़ाई के काम में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न किस्मों की सुइयों से लेकर लकड़ी के फ्रेमों तक सभी उपकरण उपलब्ध करवा रही है। रोजाना के होने वाले सैंपलिंग के आॅर्डरों और थोक के आॅर्डरों से निबटने के लिये इनके पास हर समय अच्छा-खास स्टाॅक जमा रहता है।

यह कंपनी अपने निर्माण करने वाले भागीदारों से अपना कच्चा माल खरीदती है। इसके अलावा इनके उपभोक्ताओं की सूची भी अपने आप में बिल्कुल अनूठी है जिसमें छोटे स्तर के स्थानीय बुटीक से लेकर अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात डिजाइनरों के अलावा बड़े स्तर पर काम करने वाले एक्सपोर्ट हाउस शामिल हैं।

ईएमसी की स्थापना करने से पहले इसके प्रबंध निदेशक का पद संभाल रहे वरुण कुमार महिलाओं के उच्च फैशन वाले परिधानों को तैयार करने वाले एक एक्सपोर्ट हाउस के साथ उत्पादन सलाहकार (प्रोडक्शन डायरेक्टर) के रूप में काम कर रहे थे। वरुण बताते हैं, ‘‘ वहां पर मेरा काम सैंपलिंग और उत्पादन के काम को सुचारू और तेज बनाए रखने का था। ऐसी ही एक प्रोडक्शन मीटिंग के दौरान मुझे लगा कि कितना अच्छा हो अगर ऐसा कुछ हो सके कि हम किसी नए उत्पाद को दुनिया के सामने लाने से पहले उसके उत्पादन से संबंधित उत्पादों को बिना फैशन डिजानरों के झंझट में फंसे आसानी से हासिल कर सकें। अमूमन मौजूदा कार्यप्रणाली के अनुसार काम करते समय हम एक सैंपल तैयार करने में एक सप्ताह से भी अधिक का समय लेते हैं। और बस यहीं मेरे दिमाग में विचार आया कि क्यों न कढ़ाई के काम में आने वाली सामग्री से संबंधित एक ई-काॅमर्स मंच की स्थापना की जाए क्योंकि इस सामान की मांग बहुत अधिक है और इसे खरीदने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।’’

वरुण ने अपने सबक खुद ही चुनौतियों के से पार पाते हुए सीखे और ईएमसी की स्थापना से पहले वे परिधानों को तैयार करने का एक असफल व्यवसाय कर चुके थे। यह वह समय था जब वे होटलों के लिसे वर्दी सिलने के अलावा डिजाइनर स्टोर्स के लिये उच्च स्तर के वस्त्र तैयार कर रहे थे और इसके अलावा एक घरेलू रेडी-टू-वियर बाजार के लिये ब्रांड तैयार करने के साथ ही विभिन्न देशों को निर्यात में भी अपने हाथ आजमा रहे थे। एक समय ऐसा था जब उनके पास 100 कर्मचारी थे। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें इसे संभालने में परेशानी होने लगी तो उन्होंने उसे एक कंपनी को बेच दिया और स्वयं एक वर्ष के लिये उत्पादन सलाहकार के रूप में उनके साथ जुड़ गए। इस सभी अनुभवों ने उन्हें जीवन और काम में ध्यान और समर्पण के महत्व को महसूस करने में सहायता की।

आखिरकार वरुण ने अप्रैल 2013 में अपने जन्मदिन पर इस कंपनी को अलविदा कहते हुए उत्पादन सलाकार के पद से इस्तीफा दे दिया।

उसी वर्ष 19 जून को वरुण ने अकेले अपने दम पर ईएमसी की स्थापना की। इसके कुछ समय बाद उनकी पत्नी सिम्मी बिस्वास और उनके एक मित्र भूपेंद्र सिंह उनके साथ इस व्यवसाय में शामिल हो गए।

फिलहाल इस कंपनी को अपने ई-काॅमर्स के मंच को अपडेट करने के लिये एक मिलियन अमरीकी डाॅलर के निवेश की आवश्यकता है। इनके सामने काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा हैं और विशेषकर ऐसे में जब सिर्फ कढ़ाई के सामान उपलब्ध करवाने वाले दो मंच etsy.com, Dawanda.com जैसे प्रतियोगी सामने हैं।

यह कंपनी लगातार अनुसंधान करते हुए अपने कैटलाॅग को लगातार अंतर्राष्ट्रीय चलनों के आधार पर अपग्रेड करती रहती है और इनका मानना है कि यही इनकी सबसे बड़ी खासियत है। इसके बदले में ये पूरी दुनिया में सजावट के सामानों के रूझान से खुद को रूबरू रख पाते हैं और इसके अलावा बाजार की जरूरतों को भी पूरा करने में समर्थ होते हैं। और इन्हीं कारणों के चलते ये अपने उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धा से बहुत आगे जाकर प्रासंगिक और उच्च श्रेणी के उत्पाद उपलब्ध करवाने में सफल होते हैं। इसके अलावा ये खुद को एक ऐसे वैश्विक सोर्सिंग नेटवर्क के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं जहां से भारतीय कारीगर जापान, चीन और कजाकिस्तान के कारखानों को उत्पाद भेज रहे हैं।

इस स्टार्टअप के पास अपनी एक टीम है जिसके माध्यम से ये फैशन फोरकास्ट अनुसंधान करते हैं और इसके अलावा इनके पास अपनी संपूर्ण आपूर्ति का फोटोशूट भी उपलब्ध है। एक तरफ जहां इन्होंनेे अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्राप्त करने के लिये पेपाॅल के साथ हाथ मिला रखा है वहीं दूसरी तरफ इन्होंने डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने के लिये पेयू के साथ करार किया है और स्थानीय आपूर्ति के बदले कैश आॅन डिलीवरी (सीओडी) के लिये फेड एक्स के साथ इनका करार है।

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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