ज्योति बंसलः राजस्थान के एक छोटे से शहर से सिलिकन वैली में सिक्का जमाने तक का सफ़र

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ज्योति भारत के एक बेहद छोटे शहर से ताल्लुक रखते हैं। ज्योति बंसल 'ऐप डायनमिक्स' के फ़ाउंडर और पूर्व सीईओ हैं। ऐप डायनमिक्स एक ऐसी सॉफ़्टवेयर कंपनी है, जो ऐप्लिकेशन्स और बिज़नेस की परफ़ॉर्मेंस की निगरानी करती है।

ज्योति बंसल
ज्योति बंसल
ज्योति ने औसत नंबरों के साथ ग्रैजुएशन पास किया। कैंपस सेलेक्शन के लिए जीपीए अच्छा होना चाहिए था, इसलिए ज्योति को कैंपस प्लेटमेंट में अच्छी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने तय किया कि वह अपने दम पर नौकरी ढूंढ लेंगे और कुछ समय बाद उन्होंने ऐप्लियॉन नेटवर्क्स नाम का स्टार्टअप जॉइन कर लिया।

आज हम ज्योति बंसल के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ़ एक डील के माध्यम से 400 मिलियन डॉलर बनाए। ज्योति बंसल की सफलता की कहानी कुछ ऐसी है, जिससे दुनियाभर के ऑन्त्रप्रन्योर्स प्रेरणा ले सकते हैं। ज्योति भारत के एक बेहद छोटे शहर से ताल्लुक रखते हैं। ज्योति बंसल 'ऐप डायनमिक्स' के फ़ाउंडर और पूर्व सीईओ हैं। ऐप डायनमिक्स एक ऐसी सॉफ़्टवेयर कंपनी है, जो ऐप्लिकेशन्स और बिज़नेस की परफ़ॉर्मेंस की निगरानी करती है। 2017 में सिस्को (Cisco) ने 3.7 बिलियन डॉलर में इसका अधिग्रहण कर लिया था। हाल में, ज्योति बंसल बिग लैब्स (स्टार्टअप स्टूडियो) के सीईओ और फ़ाउंडर हैं; हार्नेस नाम की कंपनी के सीईओ और को-फ़ाउंडर हैं; और एक वेंचर कैपिटल फ़र्म 'अनयूज़ुअल वेंचर्स' के को-फ़ाउंडर हैं।

किताबों से ज़्यादा प्रयोग करने में दिलचस्पी

ज्योति का जन्म और परवरिश राजस्थान के एक छोटे से शहर में हुई। उनके पिता सिंचाई मशीनें बेचने काम करते थे। 9वीं कक्षा तक ज्योति को कंप्यूटर के बारे में कोई ख़ास जानकारी नहीं थी। ज्योति के परिवार ने हमेशा ही अच्छी शिक्षा पर ज़ोर दिया। ज्योति बताते हैं, "वह हमेशा से चीज़ों को गहराई तक जानने में दिलचस्पी रखते थे और इसलिए ही उनकी आदत थी सवाल करने की। आमतौर पर लोग सवाल करने वाले बच्चों को शैतान समझते हैं। मुझे चीज़ों के साथ प्रयोग करना हमेशा ही पसंद था। मुझे पढ़ना भी पसंद था। मेरे दादा जी की एक छोटी सी लाइब्रेरी थी, जिसमें हज़ारों किताबें थीं। मेरे पिता जी हमेशा ही बेहतर शिक्षा के पक्ष में रहे।"

स्कूल के बाद ज्योति अपने पिता जी के बिज़नेस में उनकी मदद करते थे और इस दौरान ही उन्हें बिज़नेस करने से जुड़ीं बारीक़ चीज़ें सीखने को मिलीं। ज्योति बताते हैं कि उनके पास एमबीए की डिग्री नहीं और बिज़नेस के बारे में उन्होंने जो कुछ भी सीखा अपने पिता के साथ काम करते हुए ही सीखा। ज्योति ने जेईई परीक्षा में शीर्ष 100 में जगह बनाई थी और वह किसी भी आईआईटी का चुनाव कर सकते थे, लेकिन वह एक बड़े शहर में रहना चाहते थे और इसलिए उन्होंने दिल्ली आईआईटी चुना। आईआईटी में पढ़ाई का माहौल ज्योति को कुछ ख़ास रास नहीं आया। वह ख़ुद से पढ़ाई करने में ज़्यादा भरोसा रखते थे और इसलिए वह अक्सर क्लास नहीं जाते थे। ज्योति बताते हैं, "उस समय से ही स्टार्टअप्स और बिज़नेस में मेरी ख़ास रुचि थी। आगे पढ़ाई करने के बजाय मैं बिज़नेस करना चाहता था। मैं जल्दी से चीज़ें पढ़कर, उसे असल ज़िंदगी में अप्लाई करने में भरोसा रखता था। अगर मैं कोई चीज़ लंबे समय तक पढ़ता था तो मैं उस चीज़ से ऊब जाता था।" आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सी और जावा प्रोग्रामिंग सीखीं। जावा उन्हें काफ़ी पसंद थी।

बेहद सामान्य थी प्रोफ़ेशनल शुरुआत

ज्योति ने औसत नंबरों के साथ ग्रैजुएशन पास किया। कैंपस सेलेक्शन के लिए जीपीए अच्छा होना चाहिए था, इसलिए ज्योति को कैंपस प्लेटमेंट में अच्छी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने तय किया कि वह अपने दम पर नौकरी ढूंढ लेंगे और कुछ समय बाद उन्होंने ऐप्लियॉन नेटवर्क्स नाम का स्टार्टअप जॉइन कर लिया। इस कंपनी में ज्योति ने रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करना सीखा। ज्योति बताते हैं कि 6 महीने की नौकरी के दौरान उन्होंने प्रोग्रामिंग के संबंध में कॉलेज के चार सालों की अपेक्षा कहीं अधिक जानकारी हासिल की। उनकी कंपनी का मुख्यालय न्यू जर्सी में था और इसलिए कुछ दिनों बाद वह भी न्यू जर्सी चले गए। ज्योति सिलिकॉन वैली का हिस्सा बनना चाहते थे और इसलिए उन्होंने वहां की कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन देना शुरू कर दिए।

सिलिकन वैली के जिस स्टार्टअप में ज्योति को नौकरी मिली, वह कंपनी कुछ दिनों बाद ही बंद हो गई। इस कंपनी में काम करते हुए ज्योति को सीख मिली कि जिस तकनीक को उपभोक्ता स्वीकार न करें, उसपर काम करने से कोई फ़ायदा नहीं। ज्योति आगे बढ़े और उन्होंने दूसरा स्टार्टअप जॉइन किया। इस कंपनी का प्रोडक्ट मूलरूप से माइक्रोसॉफ़्ट में विकसित हुआ था और कंपनी अच्छा काम कर रही थी। लेकिन वक़्त के साथ प्रोडक्ट में उचित बदलाव नहीं किए जा सके और कुछ समय बाद रॉकवेल ऑटोमेशन ने यह कंपनी ख़रीद ली।

सिलसिला जारी रहा। सिलिकन वैली के स्टार्टअप्स में नौकरी से मिले अनुभव को साझा करते हुए ज्योति बताते हैं कि किसी भी प्रोडक्ट को विकसित करने के दो चीज़ों की ज़रूरत होती हैः

•  इंजीनियरिंग और तकनीक का विकास ख़ुद ही करें।

•  यह पता लगाएं कि उत्पाद कैसा होना चाहिए।

ज्योति मानते हैं कि किसी भी प्रोडक्ट को सफल बनाने के लिए यूज़र एक्सपीरिएंस के ऊपर काम करना बेहद ज़रूरी है। सिलिकन वैली में काम करते हुए ज्योति को समझ में आया कि ऐप्लिकेशन्स का बैकएंड सिस्टम बेहद जटिल होता है और उसे समझना बहुत ही कठिन होता है और इसलिए इसका कोई उपाय निकाला जाना चाहिए। इस प्रयास के क्रम में ही ज्योति ने ऐप डायनमिक्स की शुरुआत की। ज्योति ने अपने आइडिया को स्पष्ट करते हुए बताया कि जब एक यूज़र एक क्लिक करता है तो उसकी जानकारी 20 अलग-अलग सिस्टमों में जाती है और उस क्लिक को हर सिस्टम में पहचानने के लिए एक ख़ास तकनीक विकसित करने के उद्देश्य के साथ ऐप डायनमिक्स की शुरुआत हुई थी।

अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए ज्योति को वेंचर कैपिटल की ज़रूरत थी। उन्होंने पिचिंग शुरू की और लोगों को यह समझाना शुरू किया कि सॉफ़्टवेयर वर्ल्ड क्लाउड और डिस्ट्रीब्यूटेड सॉफ़्टवेयर की ओर बढ़ रहा है और लोगों को हर चीज़ की ट्रैकिंग के लिए एक ख़ास तरीके की ज़रूरत होगी। पिचिंग करते-करते ज्योति को निवेशकों को मनाने का सही तरीक़ा समझ में आया।

ज्योति का कहना है कि सिलिकन वैली के निवेशकों की सोच यही रहती है कि जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं, उसमें बिलियन डॉलर कंपनी बनने की क्षमता है या नहीं। ज्योति को पता था कि ऐप डायनमिक्स के लिए उन्हें इन कारकों पर काम करना होगा। ज्योति की मेहनत रंग लाई और निवेशकों ने उनके आइडिया में रुचि दिखाना शुरू किया। ज्योति बताते हैं कि सिलिकन वैली में जैसी ही कोई निवेशक आपको ऊपर भरोसा जताता है, वैसे ही आपके स्टार्टअप के लिए इनवेस्टमेंट के कई ऑफ़र्स आने लगते हैं।

एक वीसी ने ज्योति से पूछा कि अभी तक उन्होंने विली कंपनी में अपनी नौकरी क्यों नहीं छोड़ी? इसके घटना के अगले ही दिन ज्योति ने अपनी नौकरी छोड़ दी। दो महीनों बाद, सीरीज़ ए फ़ंडिंग के लिए उन्होंने पहली टर्म शीट पर साइन किया। ज्योति बताते हैं कि उनके लिए यह सबकुछ बिल्कुल नया था और वह अंदर से डर भी रहे थे क्योंकि पिछले काफ़ी वक़्त से उन्होंने अपना पूरा समय मीटिंग्स, पिचिंग और कोडिंग में बिताया था। अब अचानक से उनका पास एक ऑफ़िस था और उनके बैंक में 5.5 मिलियन डॉलर्स थे और सबकुछ संभालने की जिम्मेदारी अकेले उनके कंधों पर थी।

इसके बाद उन्होंने विली कंपनी में अपने साथ काम कर चुके भास्कर सुनकारा को भी अपनी टीम में शामिल किया और उन्हें अपनी कंपनी का सीटीओ बनाया। ज्योति बताते हैं कि जब उन्होंने अपनी कंपनी की शुरुआत की तब बाज़ार मंदी से जूझ रहा था, लेकिन उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे जितना भी समय खर्च हो, वह सेल्स टीम हायर करने से पहले प्रोडक्ट को पूरी तरह से तैयार करेंगे। ज्योति ने अपने प्रोडक्ट का फ़्री वर्ज़न लॉन्च किया और उसे उपभोक्ताओं के लिए सहज बनाया। ज्योति मानते हैं कि पेड प्रोडक्ट को तैयार करने से कहीं ज़्यादा मुश्किल होता है फ़्री प्रोडक्ट बनाना।

ऐप डायनमिक्स का पहला कस्टमर एक वॉइस रिकगनिशन स्टार्टअप यैप था, जिसे बाद में ऐमज़ॉन ने ख़रीद लिया। इसके बाद कंपनी के पोर्टफ़ोलियो के साथ नेटफ़्लिक्स, प्राइसलाइन और इलेक्ट्रॉनिक आर्ट्स जैसे नाम जुड़े। लॉन्च के 18 महीनों के भीतर ऐप डायनमिक्स का रेवेन्यू 5-6 मिलियन डॉलर की करीब पहुंच गया। ज्योति को समझ में आने लगा कि कंपनी को और आगे ले जाने के लिए अब प्रोडक्ट के साथ-साथ सेल्स पर भी ख़ास ध्यान देना होगा। 2014 तक कंपनी का रेवेन्यू 70-80 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

ज्योति बताते हैं कि उन्होंने अपनी स्टार्टअप कंपनी के अंदर हर प्रोडक्ट को एक स्टार्टअप इकाई के रूप में स्थापित करना शुरू किया। इस कार्यप्रणाली की मदद से ऐप डायनमिक्स तेज़ी के साथ आगे बढ़ता रहा। ज्योति मानते हैं, "एक कंपनी का सीईओ होने के नाते आपको कंपनी की यात्रा के दौरान लगातार बेहतर होने की कोशिश करनी पड़ती है। मैंने बतौर इंजीनियर शुरुआत की थी और मेरे अंदर का इंजीनियर हमेशा ही जीवित रहेगा। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए कोई तय फ़ॉर्म्युला नहीं होता, बल्कि आपको लगातार सीखते हुए अपनी रणनीति तय करनी होती है।"

ऐप डायनमिक्स को सिस्को को बेचना ज्योति के लिए आसान नहीं था, क्योंकि कंपनी जल्द ही पब्लिक होने वाली थी। ज्योति कहते हैं कि एक कंपनी का सीईओ होने के नाते आपको कंपनी से जुड़े हर एक आदमी के बारे में सोचना होता है क्योंकि उसने भी कंपनी के लिए उतनी ही मेहनत की है, जितनी आपने। ज्योति को इस बात की बेहद ख़ुशी है कि सिस्को द्वारा अधिग्रहण के बाद ऐप डायनमिक्स के 400 से भी ज़्यादा कर्मचारियों ने एक मिलियन डॉलर से भी अधिक की कमाई की।

एक अच्छे सीईओ के अंदर होनी चाहिए ये आदतें:

एक इंजीनियर होने के साथ-साथ ज्योति एक मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी के सीईओ भी थे। उनके मुताबिक़, एक अच्छा सीईओ वह होता है, जो...

एक नज़रिया बनाएं- सीईओ ही कंपनी का नज़रिया तय करता है। जिन कंपनियों का अपने लक्ष्य के प्रति नज़रिया स्पष्ट नहीं होता, उनकी राह बेहद मुश्किल होती है।

करने पर भरोसा- सीईओ को हर चीज़े के परिणाम पर सबसे अधिक सोचना चाहिए। आपको तय करना होता है कि जो परिणाम आप चाहते हैं, उसे हासिल करने के लिए आपको चीज़ों को किस तरह से क्रियान्वित करना होगा।

निर्णय लेने की क्षमता- ज्योति एक बहुत ही प्रैक्टिकल इंसान हैं, लेकिन फिर भी कई बार फ़ैसले लेने के लिए वह अपने दिल की सुनते हैं। वह अपनी टीम से सलाह ज़रूर लेते हैं। ज्योति मानते हैं कि अगर आपके फ़ैसले से 10 समझदार लोग सहमत नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि आपके फ़ैसले में ज़रूर कोई दिक्कत है। इतना ही नहीं, एक सीईओ के अंदर ग़लत फ़ैसले के बाद उसके प्रबंधन की भी अच्छी क्षमता होनी चाहिए।

ऐप डायनमिक्स के पास एक अच्छी टीम थी और इस वजह से ज्योति को सिस्को के साथ जाने की ज़रूरत नहीं थी। इसकी बदौलत ज्योति को नई चीज़ें खोजने का वक़्त मिल गया। उन्होंने 'बिग लैब्स' नाम से एक स्टार्टअप स्टूडियो की शुरुआत की। इस स्टार्टअप के पीछे आइडिया था, नई चुनौतियों के साथ प्रयोग करने और एक बेहतर उत्पाद विकसित करने का।

ज्योति कहते हैं कि बिग लैब्स का कॉन्सेप्ट पूरी तरह से नया है और यह परंपरागत रूप से वीसी फ़ंड, इनक्यूबेटर/ऐक्सीलरेटर मॉडल पर काम नहीं करता। इस साल की शुरुआत में ज्योति एक और नई कंपनी की शुरुआत की है। उन्होंने लाइटस्पीड में अपने पूर्व वेंचर पार्टनर जॉन व्रियोनिस के साथ मिलकर 'अनयूज़ुअल वेंचर्स' की शुरुआत की। यह एक 160 मिलियन डॉलर का सीड फ़ंड है। व्रियोनिस बोर्ड में जगह लेंगे और फ़ंड से संबंधित गतिविधियां संभालेंगे और ज्योति स्टार्टअप्स की मॉनीटरिंग करेंगे।

ज्योति का कहना है कि वह जो कर रहे हैं, उसमें वह बेहद ख़ुश है। अच्छे उत्पाद विकसित करने में दूसरी कंपनियों की मदद करना ज्योति के लिए गर्व का विषय है। ज्योति आर्थिक लक्ष्यों पर ज़्यादा ध्यान देने को प्राथमिकता नहीं देते बल्कि उनका लक्ष्य रहता है कि अच्छा उत्पाद विकसित करने में स्टार्टअप्स की मदद की जाए।

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