बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 18वीं मंज़िल पर उद्यम का नया इतिहास लिख रही हैं 15 महिलाएँ

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत अपने आप में एक शानदार विरासत है, 28 मंजिला ये सफेद इमारत बड़े बड़े उतार चढ़ाव की गवाह रह चुकी है। इस इमारत की 18वीं मंज़िल पर मौजूद जोन स्टार्टअप इंडिया के कार्यालय में कारोबार जगत की महिलाओं का एक नया अध्याय लिखा गया। यहाँ पर ऐक्सेलरेटर कार्यक्रम के तहत केवल महिला उद्यमियों ने ‘इंपॉवर’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम को विज्ञान और तकनीकि मंत्रालय के अलावा जीआईजेड, वोडॉफोन इंडिया, गूगल, निशीथ देसाई एसोसिएट्स की सीईओ ने भागीदारी निभाई। जोन स्टार्टअप इंडिया ने 6 हफ्तों तक चलने वाले इस कार्यक्रम के लिए 15 महिला उद्यमियों को चुना। 

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इन उद्यमियों का चुनाव 181 प्रतिभागियों में से किया गया। महिला उद्यमियों के चयन के लिए इनोवेशन, उनका व्यापार मॉडल और संस्थापक टीम की विशेषज्ञता जैसे विषयों को ध्यान में रखा गया था। आइये आपको बताते हैं ऐसी ही उन चुनिंदा महिलाओं बारे में जो आने वाले वक्त की पहचान साबित हो सकती हैं।

1. संस्कृति दावले: प्रोजेक्ट मुद्रा की स्थापना साल 2014 में हुई थी। ये एक ब्रेल से जुड़ा स्टार्टअप है। इसकी शुरूआत गोवा के बिट्स पिलानी से ग्रेजुएट ने की थी। इसका मकसद है दुनिया भर के उऩ 3 करोड़ 90 लाख लोगों के बीच साक्षरता दर को बढ़ाना,जो देखने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ये नेत्रहीनों के लिए ऐसे हार्डवेयर उत्पाद तैयार करता है, जिनको सॉफ्टवेयर और ब्रेल से जोड़कर नेत्रहीनों को शिक्षित किया जा सके। खास बात ये है कि ब्रेल शिक्षा की दर इस वक्त सबसे कम है। अमेरिका जैसे विकसित देशों में तो ये 10 प्रतिशत से भी नीचे हैं और जहाँ तक भारत की बात है तो ये केवल 0.2 प्रतिशत है। कंपनी के बनाये उत्पाद नेत्रहीनों को ब्रेल में लिखने, पढ़ने और टाइप करने की सुविधा देते हैं। कंपनी को अब तक देश के 5 नेत्रहीन विद्यालयों से ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं और कई विदेशी ग्राहक उनके साथ सम्पर्क में हैं। उम्मीद है कि इस साल सितंबर तक ये अपना उत्पाद बाजार में लांच कर देंगे।

2. ऋचा सिंह: आईआईटी गुवाहाटी से ग्रैजुएट ऋचा के पास लोगों के इस्तेमाल लायक डिजाइन का अच्छा अनुभव है। साथ ही उनके पास प्रोडक्ट डेवलपमेंट से जुड़ा पांच सालों का अनुभव है। देश में ज्यादातर लोग मानसिक स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा गंभीर नहीं होते। वो ये नहीं जानते कि अगर मानसिक स्वास्थ्य पर थोड़ा सा ध्यान दिया जाये तो लंबा रास्ता तय किया जा सकता है। सही समय पर सही विशेषज्ञों की खोज बड़ी समस्या है। कई बार लोग ये बताने से कतराते हैं कि वो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की तलाश में हैं। ऋचा का ‘योर दोस्त’ लोगों को वॉयस, वीडियो और चैट आधारित परामर्श की सुविधाएँ देता है। दिसंबर 2014 से शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म से अब तक करीब ढ़ाई लाख लोग जुड़ चुके हैं। फिलहाल ये हर रोज 7सौ से ज्यादा सत्र का आयोजन करता है और ये संख्या महीने दर महीने बढ़ रही है।

संस्कृति, स्मिता और ऋचा
संस्कृति, स्मिता और ऋचा

3. स्मिता मिश्रा: सीएस इंजीनियर हैं और 15 साल का आईटी की दुनिया का अनुभव रखती हैं। इन्होंने कुछ बदलाव के साथ ‘पूलवॉलेट’ की शुरूआत की है। ये एक मोबाइल पीयर टू पीयर है। ये सोशल नेटवर्क पर समूह भुगतान की सुविधा देता है। इसकी मदद से लोग साझा सेवाओं, उपहार, यात्रा या किसी कार्यक्रम की ना सिर्फ योजना बना सकते हैं, बल्कि पैसा भी इकट्ठा कर सकते हैं। फिलहाल इनके पास छह सौ उपयोगकर्ता है इनमें से करीब 130 ऐसे उपयोगकर्ता हैं, जो हर महीने इसका इस्तेमाल करते हैं।

4. अदिति चड्ढा: अदिति के पास सिलिकॉन वैली में काम करने का सात साल का लंबा अनुभव है। इसके साथ-साथ ये एमएंडए में प्रौद्योगिकी सलाहकार, सेमीकन्डक्टर और सार्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट का लाइसेंस भी रखती हैं। ये टेलिकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (टीसीओई) की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। इनका डीएजेडएल एक स्मार्ट आईओटी डिवाइस है, जो स्टाइलिश फैशन के सामान में इस्तेमाल होता है। इसके ज़रिए स्थान आधारित सुरक्षा अलर्ट देता है।

5. विद्या जयरामन: विद्या एनआईटी-के से केमिकल इंजीनियर हैं और वो गणितज्ञ परिवार से आती हैं। उन्होने मैथ एडवेंचर्स की स्थापना तब की, जब उनको लगा कि शुरूआती सालों में जिस तरह ये पढ़ाया जाता था, उसमें और अब में काफी अंतर है। इनके बनाये उत्पाद ‘मैथ्स मॉस्टर’ ना सिर्फ गणित की पढ़ाई को आसान और मजेदार बनाते हैं, बल्कि इनके ऐप्लिकेशन में इसके सिद्धांत भी आसानी से समझ में आते हैं। मैथ्स मॉस्टर को बेंगलुरू और मुंबई के 7 हज़ार छात्र सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। मैथ एडवेंचर ने पिछले साल 1.4 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया।

आदिति, विद्या और श्वेता
आदिति, विद्या और श्वेता

6. श्वेता जोशी: श्वेता के पास डिजिटल मार्केटिंग में काफी लंबा अनुभव है, अलगारी(Algaari) की शुरूआत से पहले वो मीडिया के साथ साथ कई सामाजिक स्टार्टअप के लिए लंबे वक्त तक काम कर चुकी हैं। जुमुर पंड्या उनके सह-संस्थापक हैं। जो विज्ञान के छात्र रह चुके हैं और मुंबई के आईएचएम से होटल मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उनके पास देश के चुनिंदा होटलों में काम करने का अनुभव है। अलगारी की अवधारणा के तहत हेल्थ केयर और हास्पिटैलिटी उद्योग को आपस में जोड़ना है ये ना सिर्फ कार्यकुशल है बल्कि सस्ता भी है। इसका व्यावसायिक इस्तेमाल के साथ-साथ घरेलू इस्तेमाल भी हो सकता है।

7. सुहानी मोहन: सरल डिजाइन की संस्थापक सुहानी का ये स्टार्टअप देश में मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्वच्छता उत्पादों को मुहैया कराता है। सुहानी इससे पहले आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ इंवेस्टमेंट बैंकर भी रह चुकी हैं। सुहानी ने एक ऐसी ऑटोमेटिक मशीन विकसित की है जो उच्च गुणवत्ता वाली अल्ट्रा थिन सैनिटरी नैपकिन को वितरित करने का काम करती हैं। इसके अलावा इन लोगों ने आयशा अल्ट्रा एक्स्ट्रा लार्ज, अल्ट्रा थिन सैनिटरी नैपकिन को भी तैयार किया है, जो विभिन्न स्टोर के अलावा स्कूलों में लगी वेंडिंग मशीन में भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। पिछले चार महीनों के दौरान ये अब तक 65 हज़ार पैड्स बेच चुके हैं। इस दौरान इन्होंने शहरी स्लम के साथ साथ मेडिकल दुकानों की मदद से मुबंई के आसपास के 40 गांव में, 60 डोर-टू-डोर सेल्स वुमेन और 10 वेंडिंग मशीन के ज़रिए इसे बेचने में कामयाबी हासिल की है।

सुहानी, नीलिमा और मौसमी
सुहानी, नीलिमा और मौसमी

8. मौसमी आचार्या : एडविनियो टैक्नोसिस की सीटीओ और संस्थापक हैं। वो एक ऐसी जुनूनी उद्यमी हैं, जो हेल्थकेयर के क्षेत्र में तकनीक की अच्छी जानकार हैं। उन्होंने कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी और मेडिकल इमेज प्रोसेसिंग में पोस्ट-डॉक्टरेट किया हुआ है। यह आईचैक एडविनियों की मशीन के ज़रिए रेटिना में गड़बड़ी का पता लगाने वाली ऐप्लिकेशन है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ताकि इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन में भी हो सके। इसके इस्तेमाल से बीमारी का समय रहते पता चल जाता है। साथ ही ये मधुमेह और हृदय की स्थिति के बारे में भी बता सकता है। ये भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी सेवाओं के लिए काफी किफायती है।

9. नीलिमा अचवाल: नीलिमा अक्सर सामाजिक उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और इनोवेशन से जुड़े सामाजिक उद्यमों के बारे में ना सिर्फ बात करती हैं, बल्कि वो इनके बारे में लिखती भी रहती हैं। भारत लिंग भेद पर संकट का सामना कर रहा है। देश में लैंगिक हिंसा महामारी की तरह फैल रही है, इससे लड़कियों के ना सिर्फ आत्मविश्वास में कमी आ रही है, बल्कि युवाओं की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उनका प्रॉजेक्ट आई-ईशा नीजि तौर पर सैक्सुएलिटी और लैंगिक शिक्षा देता है। अब तक इनके साथ कम आय वाले 20 स्कूलों के एक हजार छात्र जुड़ चुके हैं।

10. कनिका जैन: बड़े बीपीओ मध्यम आकार की कंपनियों की पहुंच से बाहर हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम आनर्स और एलएलबी ग्रैजुएट कनिका जैन स्कॉड रन नाम से एक पोर्टल चलाती हैं। ये पोर्टल कंपनियों को तकनीक के साथ कार्यबल मुहैया कराता है। 15 बड़े ग्राहकों के साथ इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल 45 हज़ार से ज्यादा लोग कर रहे हैं। प्रतिदिन तीन सौ से ज्यादा कॉल और 3 लाख डाटा प्वाइंट का लेन देन होता है। ये हफ्ते दर हफ्ते 40-50 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

कनिका, सागरिका एवं भारगवी
कनिका, सागरिका एवं भारगवी

11. सागारिका जगदीश: तकनीक की दुनिया में फैशनेबल महिला जिन्होनें साल 2013 में प्रिमिटस प्रौद्योगिकी की स्थापना की थी और इस साल अन-कफ्ड क्लॉथिंग की शुरूआत की है। एमबीए होने के साथ आईटी इंजीनियर सागारिका का लक्ष्य है कि वो प्रिमिटस के ज़रिए कम्बाइनिंग तकनीक की मदद से संरचना और ग्राहक आउटरीच कार्यक्रमों का केंद्रीयकरण करें। खास तौर से चौपहिया वाहन और दुपहिया वाहनों के क्षेत्र में वह पूरे देश में आज 15 से अधिक डीलरशिप के साथ काम कर रही हैं।

12. भार्गवी श्रीधरन: एसपी जैन कॉलेज से एमबीए और वित्तिय क्षेत्र का दशक भर का अनुभव लिये भार्गवी ने फिन मिंत्रा की स्थापना की थी। ये देश के मध्यम् वर्ग के लोगों को सिर्फ एक क्लिक पर अनुमान के अनुसार वित्तिय सलाह देता है। ये प्लेटफॉर्म कई प्रतिष्ठित और अच्छे एम्प्लायलर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

13. तरुषा मित्तल: क्लाउडरिनो, ये तरुषा के पहले उद्यम कूंक का मुख्य उत्पाद है। क्लाउडरिनो के उपभोक्ता क्लाउड से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। भले ही उनको तकनीक की कितनी भी जानकारी क्यों ना हो। 10 महीनों के अंदर ही इस उत्पाद का इस्तेमाल करने वालों की संख्या एक लाख से ज्यादा हो गई है। हालांकि इसकी मार्केटिंग के लिए तरुषा ने एक भी पैसा खर्च नहीं किया है। तरुषा कई चीजों की जानकारी रखती हैं और उनको स्टार्टअप की दुनिया में आठ साल का अनुभव हासिल है। वो साल 2011 में स्थापित कूंक की सह-संस्थापक रही हैं और क्लाउड के क्षेत्र में आने से पहले वो तीन सालों से डाटा सेंटर के क्षेत्र में काम कर रही थीं।

तरुषा, रेणु और सौम्या
तरुषा, रेणु और सौम्या

14. रेणु बिष्ट: इंजीनियर और कम्प्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट रेणु एमबीए भी कर चुकी हैं। रेणु एबीजी, विप्रो और केपीएमजी जैसी कंपनियों में विभिन्न तरह के रोल अदा कर चुकी हैं। वैनिटीक्यूब को शुरू करने वाली रेणु के इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए लोग सुंदरता से जुड़ी सेवाओं को हासिल करने के लिए सुविधा अनुसार बुकिंग करा सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता अपनी पसंद के मुताबिक समय और जगह तय कर सकता है। कंपनी दिल्ली एनसीआर के अलावा मुंबई में काम कर रही है। इसके साथ 125 ब्यूटीशियन जुड़ी हैं, जो साल भर के दौरान 20 हज़ार से ज्यादा ग्राहकों को अपनी सेवाओं से संतुष्ट कर चुकी हैं।

15. सौम्या वर्धन: एमबीए करने वाली सौम्या करीब 10 सालों तक लंदन स्थित केपीएमजी और ईवॉय लंदन के साथ एक रणनीतिक सलाहकार के तौर पर काम कर चुकी हैं। इसके बाद इन्होंने शुभपूजा डॉट कॉम की शुरूआत की। ये आज की युवा पीढ़ी के लिए विभिन्न तरह की वैदिक रस्मों का इंतजाम कराता है। इस काम को योग्य पेशवर लोग ही अंजाम देते हैं। जो विभिन्न तरह के अनुष्ठान आदी करते हैं। एक साल पहले शुरू हुई ये सेवा अब तक 6 हज़ार से ज्यादा पूजा पाठ करा चुकी है।

ऐक्सेलरेटर कार्यक्रम के तहत कई तरह की चीजें होंगी। जोन स्टार्टअप इंडिया के निदेशक अजय रामा सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, “हम इस ज़रूरत को महसूस कर रहे हैं कि महिला उद्यमियों के लिए अलग से ऐक्सेलरेटर कार्यक्रम का आयोजन किया जाय। जहां पर उनको उचित सलाह, वर्कशॉप के साथ ऐसी केस स्टडी के बारे में बताया जाय, जो स्टार्टअप की दुनिया में सफल हैं, साथ ही महिलाओं का विभिन्न उद्योगों और निवेशकों के साथ जोड़ा जाय।” इस कार्यक्रम के तीन विजेताओं को सामूहिक रूप से 60 लाख रुपये दिये जाएंगे।

मूल- बिंजल शाह

अऩुवाद- गीता बिष्ट


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