सौ तरह की चाय की चुस्कियों के दीवाने हुए लोग 

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हाल के वर्षों में अब तक जितने तरह के टी-स्टॉर्टअप सामने आए हैं, किसी ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा है। कोई ऑनलाइन चाय के ऑर्डर से मालामाल हो रहा है तो कोई तरह-तरह के जायके वाली चाय परोसकर करोड़पति बन चुका है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के पांच युवाओं ने प्रदेश की राजधानी में सौ से ज्यादा किस्म के जायकों वाली चाय के चार टी-स्टॉल शुरू किए हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
रायपुर के चार युवाओं इरफान अहमद, प्रियांश, काजल वर्मा और उमेश ने राजधानी में चार अलग-अलग स्थानों पर टी स्टॉल लॉन्च किए हैं। यहां छात्रों, बुजुर्गों के अलावा शाम को परिवार के साथ आने वालों की खासी भीड़ जुटती है।

बिजनेस आइडिया में दम हो, सूझबूझ हो तो मिट्टी में पड़ा सामान भी चुटकियों के भाव अनमोल हो जाता है। इन दिनों चाय बेचने का धंधा तरह-तरह के प्रयोगों से गुजर रहा है। इसके तरह तरह के स्टार्टअप ने बड़े कारोबारियों को भी अचंभे में डाल रखा है। चाय एक ऐसा पेय पदार्थ है, जिसे गरीब से लेकर अमीर आदमी तक पीता है। यानी यह हर तबके के बीच इसकी खपत है। ये वही चाय है, जिसने एक मामूली से चाय वाले को इंटरनेट पर मशहूर कर दिया। वह हीरो बन गया। हमारे देश में कॉफी हाउसों की तरह चाय स्टोर भी बड़े जोरों-शोरों से चल रहे हैं और लोग इसे बेहद पसंद कर रहे हैं। रायपुर (छत्तीसगढ़) के कुछ युवाओं इरफान अहमद, प्रियांश, काजल वर्मा और उमेश ने टी-स्टॉल के स्टार्टअप से इन दिनो प्रदेश की राजधानी में धूम मचा रखी है। इन्होंने एक साथ प्रदेश की राजधानी में चार अलग-अलग स्थानों पर टी स्टॉल लॉन्च किए हैं।

देश के कई बड़े शहरों में अब तक ऑनलाइन चाय की दुकानें शुरू हो चुकी हैं और वे अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं। मुंबई के बांद्रा इलाके में ‘छोटू चायवाला’ नाम से ऑनलाइन चाय की दुकान धूम मचा रही है। लोग कहने लगे हैं कि घर की चाय छोड़ो, ‘छोटू चायवाले को ऑर्डर करो, जी हां एक क्लिक पर चाय आपके घर पर हाजिर। किसी भी शहर में चाय की दुकान पर अच्छी खासी भीड़ देख सकते हैं। चाय का लुफ्त उठाने के लिए घर से या ऑफिस से चलकर दुकान तक जाना पड़ता है। कहीं कहीं तो अच्छी चाय का आनंद लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुंबई के रहने वाले नितिन पुर्यवानी ने लोगों की यह समस्या को दूर करने के लिए ऑनलाइन चाय की दुकान शुरू की है। उनका आइडिया काम कर गया है। सुबह सूर्य उदय से लेकर देर रात तक उनके यहां चाय के ऑर्डर आते रहते हैं। चाय बेचने के आज नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। कौशल डूगर की 'टी-बॉक्स' कंपनी की चाय की चेन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि यूएस में भी है। इसमें रतन टाटा ने भी इन्वेस्ट किया था। यह कंपनी हर साल लगभग 4।7 मिलियन का मुनाफा कमा रही है। 'चायोस' कंपनी को नितिन सलूजा और राघव वर्मा ने मिलकर बनाया। ये दोनों 2010 में मिले। राघव एक आईआईटी ग्रेजुएट हैं। यह कंपनी 2012 में शुरू हुई। अब तो इसे रोजाना लगभग एक हजार ऑर्डर मिल रहे हैं। यहां से चाय ऑनलाइन भी मंगाई जा रही है।

इसी तरह नोएडा में पंकज और नितिन ने मिलकर चाय ठेला शुरू किया है। इसको किसी आम चाय के ठेले के एक्सपीरियंस को ध्यान में रखकर शुरू किया गया लेकिन यहां लोगों को ताजी चाय ही परोसी जाती है। यह ज्यादातर आईटी पार्क और कॉलेज के आस-पास अपना स्टाल लगाते हैं। आप इसे चाय के ठेले के एक अपग्रेडेड वर्जन के रूप में देख सकते हैं। इसी तरह 'टी पॉट' को रॉबिन झा ने 2013 में शुरू किया था। इसमें भी किसी बड़े बिजनेसमैन ने इन्वेस्ट किया था। यहां चाय के साथ-साथ गर्म नाश्ता भी परोसा जाता है। यहां पर गुड़हल की चाय से लेकर एक आम मसाला चाय भी मिलती है। 'चाय गरम' भारत की सबसे पुरानी चाय कंपनी में से एक है और इसे शुरू किया मेघना नरसाना ने। यह ऐसे कैफे हैं जो वोर्किंग क्लास को कम पैसों में अच्छी चाय परोसते हैं। यहां पर भी चाय हाथ से ही बनाई जाती है। इसे 2009 में शुरू किया गया। यहां पर करीब 20 तरह की चाय मिलती है। ये तो रहे चाय बेचने के पुराने ठिकाने। हाल ही में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चाय का शौक लोगों के नए अंदाज में परवान चढ़ रहा है। यहां एक सौ दस तरह की चाय की चुस्कियों ने लोगों को दीवाना बना रखा है।

रायपुर के चार युवाओं इरफान अहमद, प्रियांश, काजल वर्मा और उमेश ने राजधानी में चार अलग-अलग स्थानों पर टी स्टॉल लॉन्च किए हैं। यहां छात्रों, बुजुर्गों के अलावा शाम को परिवार के साथ आने वालों की खासी भीड़ जुटती है। इन स्टॉलों पर चाय की कीमत भी कुछ खास नहीं। बस, जेब में अधिकतम 70 रुपये हों तो 110 में से किसी भी फ्लेवर की चाय का आनंद उठाया जा सकता है। रायपुर के ही एक पांच सितारा होटल में छह प्रकार की चाय मिलती है। इनकी कीमत 50 रुपये से साढ़े तीन सौ रुपये तक है लेकिन इरफान की दुकानों पर चाय की कीमत मात्र 15 से 70 रुपये तक है। चाय में अलग-अलग फ्लेवर के लिए फलों का छिलका डाला जाता है।

प्रियांश बताते हैं कि वे फूल और फल आसपास खेती करने वाले उन किसानों से खरीदते हैं, जो आर्गेनिक पद्धति का इस्तेमाल करते हैं। फलों को खरीदने के बाद उनके छिलके को अलग किया जाता है, सुखाया जाता है। इसके बाद ग्राहक जिस फ्लेवर की मांग करता है, उसे वही उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए बाकायदा मेन्यू कार्ड भी बनवाया गया है। उनके यहां ताजे गुलाब की पत्तियों को खौलाकर चाय बनाई जाती है। सुंगध ऐसी मानों चाय नहीं, गुलाब की पत्तियों का रस पी रहे हों। इसके अलावा मिंट चाय, तंदूर चाय, कश्मीरा खाबा की भी खूब मांग है, सभी की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। यहां दहकती भट्ठी के भीतर कुल्हड़ को डाल दिया जाता है। कुल्हड़ जब लाल हो जाता है, तब उसमें डाली जाती है ठंडी चाय। कुल्हड़ में पड़ते ही चाय में सोंधी मिट्टी का पूरा फ्लेवर उतर जाता है।

चाय स्टार्टअप हाज़री की तो एक अलग ही दास्तान है। इसने निवेश फर्म अर्थ वेंचर फंड से 1.25 करोड़ रुपये की धनराशि जुटाई है। हाज़री एक त्वरित सेवा रेस्तरां स्टार्टअप है, जो उच्च कॉर्पोरेट यातायात वाले क्षेत्रों में चाय, फ़िल्टर कॉफी और स्नैक्स परोसता है। वर्तमान में केवल मुंबई में परिचालन करते हुए, फर्म राज्य भर में 20 नए स्थानों में आउटलेट शुरू करने जा रही है। दो साल पहले इस कंपनी की स्थापना करण शिंगहल, ध्रुव अग्रवाल और अर्जुन मिंडा ने की थी। वर्तमान में, शहर में चाय स्टार्टअप के चार आउटलेट हैं, जो 50 कार्यालयों को सेवाएं दे रहे हैं। हाज़री के सह-संस्थापक ध्रुव अग्रवाल का कहना है कि हाज़री के साथ हमारा दृष्टिकोण भारत में सड़क खाद्य संस्कृति का मानक उपर उठाना है। पिछले छह महीनों में, अर्थ ने हमें अपने ब्रांड को, कार्यालय के 10 मिनट के ब्रेक के लिए एक-स्टॉप समाधान में बदलने के लिए प्रेरित किया है। वे चाहते हैं कि प्रत्येक उत्पाद इन गुणों के साथ, एक किफायती मूल्य पर पेश करें।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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