डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर क्राइम एक बड़ी समस्या, डट कर करें सामना

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध को रेखांकित करता हुआ यूपी एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक और साइबर अपराध विशेषज्ञ त्रिवेणी सिंह से योरस्टोरी की बातचीत...

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उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी रियासत होने के साथ-साथ जरायम की दुनिया में भी ऊंचे पायदान पर काबिज है। फिर चाहे वो असल (रियल) दुनिया में हो या आभासी (वर्चुअल) दुनिया में। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। 

वर्ष 2015 में यूपी में साइबर क्राइम के 11592 मामले दर्ज किये गये थे, जबकि 2014 में ये आंकड़ा 9622 था। मतलब एक साल में 1970 साइबर क्राइम के मामलों में बढ़ोत्तरी हो गयी, जो कि ये दर्शाती है कि यूपी किस तरह अपराध का केंद्र बनता जा रहा है।

डिजिटल इंडिया के नारों के बीच साइबर क्राइम रोकथाम की कोशिशों के दावे तो बहुत हो रहे हैं, लेकिन हालात ये हैं कि अपराधी सूबे के मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव और डीजीपी के नंबरों से कॉल स्पूफिंग कर करोड़े रूपये ठगने में कामयाब हो जाता है। आज साइबर जगत अपराधियों के लिये सफारी जोन बन गया है। क्या साइबर क्राइम पर नियंत्रण कर पाना यूपी पुलिस के बस की बात नहीं है? क्या कभी साइबर स्पेस अपराध मुक्त हो सकेगा। ऐसे सवालों के जवाब की तलाश में तेज, परिणामदायक कार्यशैली के लिये चर्चित एसटीएफ और उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. त्रिवेणी सिंह से योरस्टोरी ने की खास बातचीत।

त्रिवेणी सिंह, उत्तर प्रदेश अपर पुलिस अधीक्षक व साइबर अपराध विशेषज्ञ
त्रिवेणी सिंह, उत्तर प्रदेश अपर पुलिस अधीक्षक व साइबर अपराध विशेषज्ञ

क्या है साइबर क्राइम (अपराध)? 

साइबर अपराध को परिभाषित करते हुए त्रिवेणी सिंह हैं, कि साइबर क्राइम को कम्प्यूटर क्राइम के नाम से भी जाना जाता है। कम्प्यूटर्स और इंटरनेट के द्वारा की गई किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियां साइबर क्राइम की श्रेणी में आती है। कॉल स्पूफिंग यानि इंटरनेट के जरिए दूसरों के मोबाइल और लैंडलाइन नंबर की फेक कॉल के माध्यम से किसी को परेशान करना भी साइबर अपराध के दायरे में आता है। आपके सरकारी या महत्वपूर्ण कारोबारी दस्तावेजों या आपकी निजी महत्वपूर्ण जानकारी को इंटरनेट और कम्प्यूटर के माध्यम से चुराया जाना साइबर अपराध है।

साइबर क्राइम में गैर धन अपराध भी शामिल है जैसे की ई-मेल के माध्यम से स्पैम करना, किसी वस्तु विशेष की प्रचार के लिए मेल करना, किसी कंपनी के गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करना, वायरस को मेल के माध्यम से फैलाना, पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देना, आई. आर. सी (इंटरनेट रीले चैट)के माध्य म से गलत कार्यों को अंजाम देने के लिए ग्रुप चैट करना और सामान्य नागरिकों को परेशान करने के लिए कम्प्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से कोई भी गलत कदम उठाना उसके अन्तर्गत आता है।

उत्तर प्रदेश में पहला साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र खोला गया है। ये प्रदेश का सबसे पहला हाईटेक साइबर सेल है, जिसमें साइबर अपराध करने वालों पर 24 घंटे एक टीम अपनी नज़र रख सकती है।

क्यों बढ़ता है साइबर क्राइम?

उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही साइबर अपराध की रफ्तार और पुलिस इस अपराध पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है पर त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि सबसे बड़ी समस्या तो विभाग के पास संसाधनों का अभाव और पुलिस कर्मियों में दक्षता के अभाव का होना है। यद्यपि प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चल रहे हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ शेष है। वैसे उत्तर प्रदेश में पहला साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र खोला गया है। ये साइबर सेल नोएडा के सेक्टर-6 एसपी सिटी कार्यालय में स्थापित किया गया है। ये प्रदेश का सबसे पहला हाईटेक साइबर सेल है जिसमें साइबर अपराध करने वालों पर 24 घंटे टीम नजर रख सकती है। डाटा डीलीट होने के बाद भी अपराधी की डिक्स और इस्तेमाल करने का ब्योरा भी दोबारा लिया जा सकता है। 

साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र में अपराधियों के मोबाइल और कंप्यूटर का डाटा लेकर उसे इन्वेस्टीगेट किया जा सकता है। इसके साथ ही ईमेल, सोशल साइट के जरिए होने वाले अपराध पर भी लगाम लगाई जा सकती है। साइबर लैब में 06 सेक्शन बनाये गये हैं जिसमें हर सेल का एक इंचार्ज होगा, जो सीधे पब्लिक की समस्याओं को सुनकर कार्रवाई करेगी। साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र में प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग व कोर्ट में साइबर इविडेंस दिखाने के लिए भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साइबर लैब में देश के चुनिंदा साइबर उपकरणों को इस्तेमाल किया गया है। प्रदेश में साइबर क्राइम को रोकने के लिए साइबर लैब और साइबर थाने भी खोले जायेंगे। जिसकी शुरूआत राजधानी लखनऊ और नोएडा से हो चुकी है।

साइबर जगत को अपराध मुक्त बनाना ही एसटीएफ की साइबर सेल का उद्देश्य है।

एसटीएफ साइबर सेल की भूमिका

एसटीएफ के साइबर सेल की भूमिका के बारे में त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि एसटीएफ की साइबर सेल जिलों में थानों को तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। यदि किसी मुकदमे की विवेचना हमारे पास ट्रांसफर की जाती है तो एसटीएफ उसकी विवेचना करता है। एसटीएफ की साइबर सेल ने अपनी विवेचना के दौरान विगत वित्तीय वर्ष में 32 केसों में 597 लोगों को जेल भेजा है। साथ ही 190 करोड़ की धनराशि सीज की है। साइबर जगत को अपराध मुक्त बनाना ही एसटीएफ की साइबर सेल का उद्देश्य है।

उधर बढ़ रहे अपराधों की रफ्तार को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो साइबर थानों पर त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि दो थानों की संख्या पर्याप्त नहीं है, लेकिन सूबे के किसी भी थाने पर साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज करायी जा सकती है और प्रत्येक थाने में महिला पुलिस कर्मी होती है अत: पीडिताओं को तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिये अपनी शिकायत दर्ज कराने में। ऐसा करके वे कानून की मदद करेंगी।

कैसे बचें साइबर क्राइम से?

साइबर क्राइम से बचाव पर बात करते हुए त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि किसी भी प्रकार के बैंकिंग लेन-देन के लिए आप अपने पर्सनल कम्प्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल करें। जब कभी भी आप अपने इंटरनेट बैंकिंग या किसी भी जरूरी अकाउंट में लॉगिन करें, तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूलें। कभी भी आप अपने बैंकिंग यूजर नेम, लॉगिन पासवर्ड, ट्रांजिक्शन पासवर्ड, ओ.टी.पी, गोपनीय प्रश्नों या गोपनीय उत्तर को अपने मोबाइल, नोटबुक, डायरी, लैपटॉप या किसी कागज पर न लिखें। ई-मेल के द्वारा गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारी को किसी भी स्पैम ई-मेल में उत्तर न दें, अंजान ई-मेल में आये अटैचमेंट्स को कभी खोल कर न देखें या उस पर मौजूद लिंक पर क्लिक न करें। इसमें वायरस या ऐसा प्रोग्राम हो सकता है, जिसको क्लिक करते ही आपका कम्प्यूटर उनके कंट्रोल में जा सकता है। जिससे कंप्यूटर में वायरस के प्रभाव से कोई जरूरी फाइल डिलीट या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम के करप्ट हो जाने की संभावना बढ़ जाती है।

यूनाइटेड स्टेट्स ब्रॉडबैंड कमीशन की कॉम्बेटिंग ऑनलाइन वायलैंस अगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स ए वर्ल्ड वाइड वेकअप कॉल की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली लगभग एक तिहाई महिलाएं किसी-न-किसी तरह के साइबर अपराध का शिकार होती हैं।

त्रिवेणी कहते हैं, कि सोशल साइट्स का इस्तेमाल करते समय बहुत जरूरी है, कि आप उसके सिक्योरिटी सिस्टम को एक्टिवेट करें। किसी भी अनजान शख्स की फ्रेंड रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट न करें। किसी के बेहुदा मैसेज का जवाब न दें। अपनी फोटो व पर्सनल डिटेल को रिस्ट्रिक्ट कर दें ताकि आपके गिने-चुने दोस्तों को छोड़ कर कोई अन्य व्यक्ति उस तक न पहुंच सके। ऑनलाइन निजी जानकारी (फोन नंबर, बैंक डिटेल आदि) किसी से शेयर न करें। किसी अनजान शख्स से ऑनलाइन फ्लर्ट या बहसबाजी न करें। अपना पासवर्ड किसी से शेयर न करें।

यूनाइटेड स्टेट्स ब्रॉडबैंड कमीशन की कॉम्बेटिंग ऑनलाइन वायलैंस अगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स ए वर्ल्ड वाइड वेकअप कॉल की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली लगभग एक तिहाई महिलाएं किसी-न-किसी तरह के साइबर अपराध का शिकार होती हैं। इस तरह के महिला अपराधों की रोकथाम पर त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि जानकारी ही बचाव है। सबसे ज्यादा आवश्यक है कि सतर्क रहें। किसी भी प्रकार के अपराध को पंजीकृत कराने में न संकोच करें। महिलाओं को निशाना बनाकर सबसे ज्यादा जिस अपराध को अंजाम दिया जाता है, वह है- साइबर स्टाकिंग, साइबर बुलिंग, साइबर पॉर्नोग्राफी, साइबर स्पाइंग। असल दुनिया में जिसे आप जानती हैं और विश्वास करती हैं, उन्हें ही वर्चुअल वर्ल्ड मेंं फ्रेंड बनायें। अवांछित और बार-बार के एसएमएस, ईमेल, कॉल्स, फ्रेंड रिक्वेस्ट्स को लेकर खुद सर्तक रहें और जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी जानकार व्यक्ति या सुरक्षा एजेंसी को इसकी जानकारी देनी चाहिए। पुलिस और सुरक्षा एजेसियां आपकी सेवा के लिए हैं। यह उनका दायित्व है कि वे सुरक्षा संबंधी आपकी समस्याओं का हल करें और वे करेंगी भी।

योरस्टोरी के माध्यम से देश की आधी आबादी को संदेश देते हुए त्रिवेणी सिंह कहते हैं, कि

"जिस तकनीकी दुनिया से जुड़कर स्त्री आज खुद को ज्यादा अभिव्यक्तिपूर्ण और प्रगतिशील महसूस कर रही है, वहां उसकी अभिव्यक्ति, आजादी और प्रगतिशीलता की एक बड़ी कसौटी ये भी है कि वो किसी भी अवांछित गतिविधि से न डरे, न ही उसे नजरंदाज करे, बल्कि हिम्मत के साथ प्रतिरोध करे, कानून की मदद ले और आत्मविश्वास के साथ ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी शोषणमुक्त जीवन के अधिकार को बनाए रखे।"


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लेखक / पत्रकार

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