बेजुबान की मदद: कुत्ते की 'व्हीलचेयर' खरीदने के लिए तोड़ा गया गुल्लक

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बेंगलुरु में लगभग एक साल पहले एक कुतिया के ऊपर से कार गुजर गई थी, जिसकी वजह से उसके शरीर का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसा इतना बुरा था कि वह चलने लायक नहीं रही।

रेखा और अनुभव
रेखा और अनुभव
इंसानियत के नाते हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इस संसार में रहने वाले जीवों पर दया का भाव रखें और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करें। लेकिन अपने स्वार्थों के लिए जीने वाले इस दौर में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। 

अगर किसी इंसान को कोई तकलीफ होती है तो उसकी मदद करने के लिए इंसान आगे आते हैं, लेकिन आपने कभी सोचा है कि बेजुबानों को तकलीफ के दौरान कौन मदद करने आता है? दरअसल इंसानियत के नाते हमारी जिम्मेदारी बनती है कि इस संसार में रहने वाले जीवों पर दया का भाव रखें और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करें। लेकिन अपने स्वार्थों के लिए जीने वाले इस दौर में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। हालांकि ऐसे लोग भी हैं जो बेजुबान जानवरों की मदद करने के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं। आज हम आपको ऐसे ही लोगों से मिलवाने जा रहे हैं।

बेंगलुरु में लगभग एक साल पहले एक कुतिया के ऊपर से कार गुजर गई थी, जिसकी वजह से उसके शरीर का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसा इतना बुरा था कि वह चलने लायक नहीं रही। बेंगलुरु में ही रहने वाले थ्री डी एनिमेटर अंकुर भटनागर ने व्हाइटफील्ड इलाके के पास उस कुतिया को देखा और उसे लेकर जानवरों के डॉक्टर के पास गए। उन्होंने उसकी देखभाल की। लेकिन चूंकि उसके शरीर को लकवा मार गया था इसलिए वह चलने लायक नहीं रही। वेटरनिरी डॉक्टर ने कहा कि वह कभी चल तो नहीं पाएगी लेकिन अगर किसी व्हील कार्ट की मदद ली जाए तो वह चल भी सकती है।

अंकुर एनिमेशन की दुनिया के आदमी हैं इसलिए उन्होंने एक एनिमेशन कैरेक्टर 'मोना' के नाम पर उसका नाम रख दिया। अंकुर की रोज की दिनचर्या और ऑफिस का काम इतना ज्यादा होता है कि वह मोना की पूरी देखभाल में असमर्थ थे। उन्होंने फेसबुक पर किसी ऐसे शख्स को खोजना शुरू किया जो मोना की पूरी देखभाल कर सके। उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिखा जिसमें किसी ने रेखा को टैग किया था। सौभाग्य से मोना को उसकी देखरेख करने वाला मिल गया। बेंगलुरु की ही रहने वाली रेखा ने यह जिम्मेदारी ले ली।

रेखा ने मोना को लेने के बाद उसकी तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट कीं जिसे उनके भाई महेश और उसके मंगलौर में सातवीं में पढ़ने वाले दोस्त अभिनव ने देखा। अभिनव और महेश दरअसल मोना की मदद करना चाहते थे। दोनों ने अपने गुल्लक से पैसे निकाले और 4,000 रुपयों से उन्होंने एक व्हील कार्ट का इंतजाम किया। महेश नायक ने कहा, 'मैंने और अभिनव ने मिलकर व्हील कार्ट खरीदा जिसकी बदौलत अब मोना कहीं भी घूम सकती है। हालांकि सिर्फ घूमने के वक्त ही उसे कार्ट की जरूरत पड़ती है।'

रेखा कहती हैं कि एक नि:शक्त कुत्ते की देखभाल करना काफी मुश्किल काम है, लेकिन फिर भी उन्हें इससे खुशी मिलती है। उन्होंने कहा, 'भले ही मोना खुद से चलने-फिरने में असमर्थ है, लेकिन उससे हमें पूरा प्यार मिलता है। इसके साथ ही बच्चों को भी इससे अच्छी शिक्षा मिलती है कि जानवरों के प्रति हमें दया का भाव रखना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में और लोग भी इससे प्रेरणा लेंगे और बेसहारा बेजुबानों की मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाएंगे।'

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