'स्काई' से बदलेगी जमीन की तस्वीर: लाखों महिलाओं के जीवन में आएगी खुशी और समृद्धि

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है... 

साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ राज्य में जो क्रांति शूरू हुई है उसे नाम दिया गया है 'संचार क्रांति योजना', जोकि 'स्काई' के नाम से अब मशहूर होने लगी है। 'संचार क्रांति योजना' छत्तीसगढ़ सरकार की नयी, बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना है और इसके तहत जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क स्मार्ट फोन दिये जा रहे हैं और नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है।

'संचार क्रांति योजना' का विचार यूं ही नहीं आया, बल्कि इस विचार के पीछे एक गंभीर मंथन था। मंथन की वजह कुछ ऐसे तथ्य थे, जो राज्य का रूप लेने के बाद तेज़ी से आगे बढ़ रहे छत्तीसगढ़ को रोकने की कोशिश कर रहे थे।

क्रांति की शुरूआत एक विचार से होती है, एक ऐसा विचार जो ज़िंदगी में बदलाव लाये। बदलाव कुछ लोगों की ज़िंदगी में नहीं, बल्कि कइयों की ज़िंदगी में। बदलाव भी कोई मामूली बदलाव नहीं, बल्कि बड़ा बदलाव और सकारात्मक बदलाव। एक ऐसा बदलाव जिससे परेशानियाँ दूर हों, ज़िंदगी में खुशी आये, समृद्धि आये।

एक ऐसी ही बड़ी क्रांति का सूत्रपात हुआ है छत्तीसगढ़ में। मध्य भारत में बसे इस राज्य में इस नयी क्रांति से लाखों लोगों के जीवन में नयी खुशी आयी है, सकारात्मक परिवर्तन आना शूरू हुआ। राज्य सरकार को भरोसा है कि इस क्रांति से कई सारी जन-समस्याएँ दूर होंगी और दूरस्त इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन में भी खुशहाली आएगी और वे भी देश के बहुमुखी विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा पायेंगे। साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ राज्य में जो क्रांति शूरू हुई है उसे नाम दिया गया है 'संचार क्रांति योजना', जोकि 'स्काई' के नाम से अब मशहूर होने लगी है। 'संचार क्रांति योजना' छत्तीसगढ़ सरकार की नयी, बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना है और इसके तहत जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क स्मार्ट फोन दिये जा रहे हैं और नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। स्मार्ट फोन देने के पीछे एक विचार है। विचार है क्रांति का, ऐसी क्रांति जो जीवन को और भी तरक्कीशुदा और सुखी बनाये।

ये विचार सहज ही नहीं आया। इस विचार के पीछे मंथन था। मंथन की वजह कुछ तथ्य थे, ऐसे तथ्य थे जो राज्य का रूप लेने के बाद तेज़ी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे छत्तीसगढ़ को परेशान कर रहे थे। छत्तीसगढ़ के कुछ अधियारियों को जब लगा कि ये तथ्य और उनसे जुड़े आंकड़े राज्य की छवि को अटपटा बना रहे हैं, तब इन अधिकारियों ने स्थिति और परिस्थिति दोनों बदलने की ठानी।

ऐसे कौन से वे आंकड़ें हैं, जिनकी वजह से इन अधिकारियों को यह लगा कि इन्हें बदलने पर ही छत्तीसगढ़ में विकास की रफ्तार बेहद तेज होगी। सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 के अनुसार, भारत के अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में मोबाइल फोन का इस्तेमाल सबसे कम होता है। ग्रामीण भारत में जहाँ 72 फीसदी लोगों के पास मोबाइल फोन है तो वहीं छत्तीसगढ़ में सिर्फ 29 फीसदी लोग ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने की सबसे बड़ी वजह कई क्षेत्रों, गाँवों और जिलों में मोबाइल कनेक्टिविटी का न होना है। कवरेज न होने की वजह से यहाँ मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं किया जा सकता है।

जनगणना के दौरान यह भी पता चला कि छत्तीसगढ़ के कुल 19 जिलों में से 10 जिले ऐसे हैं जिनके 50 फीसदी भूभाग में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं पहुँच पाया है। और तो और, चार जिले ऐसे भी हैं जहाँ मोबाइल नेटवर्क 15 फीसदी से भी कम है। एक मायने में यह बात साफ हो गयी थी कि राज्य में आधे से भी ज्यादा लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं और इसकी बड़ी वजह मोबाइल नेटवर्क का न होना है।

इस बात में दो राय नहीं है कि आधुनिक युग में मोबाइल फोन की वजह से जीवन, जीवन-शैली, व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया है। मोबाइल की वजह से बड़े बदलाव हुए हैं, मोबाइल ने लगभग हर इंसान के जीवन में जगह बनाई है। हालत यह है कि मोबाइल के बिना कुछ पल भी गुजारना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। मोबाइल फोन ख़ासतौर पर स्मार्ट फोन के आने के बाद कई चीजें इंसान के पास से हट गयी हैं। एक समय पॉकेट कैमरा, फोटो एल्बम, टेप और वॉक मैन, वीडियो कैसेट प्लेयर, सामान्य टॉर्च, कलाई की घड़ी, अलार्म घड़ी,कैलकुलेटर, नोट बुक/पैड, कैलेंडर कंपास जैसे उपकरण अलग-अलग रखने पड़ते थे, लेकिन स्मार्ट फोन के आने के बाद इन्हें अलग से रखने की जरुरत ही नहीं पद रही है क्योंकि ये सभी एक स्मार्ट फोन में मौजूद हैं।

मोबाइल फोन का सबसे बड़ा इस्तेमाल शूरू से संपर्क और बातचीत के लिए ही होता रहा है और हो रहा है। मोबाइल फोन की वजह से कहीं से भी किसी से भी बातचीत की जा सकती है, बशर्ते बातचीत करने वाले दोनों पक्षों के पास मोबाइल फोन हो और दोनों मोबाइल नेटवर्क कवरेज एरिया में हों। स्मार्ट फोन और अच्छी कनेक्टिविटी की वजह से अब दुनिया के कोने-कोने में वीडियो काल की भी सुविधा है, यही लोग एक दूसरे को देखते हुए बातचीत कर सकते हैं।

बड़ी बात यह भी है स्मार्ट फोन के एक नहीं बल्कि कई फायदे हैं। एक मायने में स्मार्ट फोन की वजह से सारी दुनिया सिमट कर इंसान के हाथ में आ गयी है। कारोबार, बैंकिंग ही नहीं बल्कि कई सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएं भी स्मार्ट फोन के जरिये हो रही हैं। तरह-तरह के एप्लीकेशन यानी एप्प की वजह से स्मार्ट फोन एक मायने में बटुआ भी बन गया है। जिस तरह के फीचर स्मार्ट फोन में हैं वह पर्सनल कंप्यूटर की तरह भी काम में आ रहा है।

तरक्की की जरिया बन गया है मोबाइल स्मार्ट फोन।

ऐसे में सहज ही कोई भी यह कल्पना कर सकता है कि जिस राज्य की आबादी का आधा हिस्सा मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं कर रहा है तब वहाँ हालत कैसी होगी। भारत में मोबाइल को आये हुए 20 साल हो गये लेकिन छत्तीसगढ़ में आधे से ज्यादा लोगों के पास मोबाइल फोन के न होने की बात कुछ अधिकारियों को बहुत ही खटकी।

हालत ऐसी थी कि कई गाँवों में आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस को बुलाने के लिए भी लोगों को कई तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ता था। कई गाँव अब भी ऐसे हैं जहाँ किसी भी भी संपर्क करने के लिए वहाँ जाना जरूरी होता है। हालत ऐसी है कि कई गाँवों में लोग न बाहरी दुनिया से संपर्क कर सकते हैं और न ही दूसरे लोग इन लोगों को संपर्क कर सकते हैं।

मोबाइल कनेक्टिविटी के न होने की एक बड़ी वजह राज्य की भौगोलिक स्थिति भी है। छत्तीसगढ़ ऊँची नीची पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ घने जंगलों वाला राज्य है। कई इलाकों में सड़क, बिजली और पीने के लिए सुरक्षित पानी भी मुहय्या करवाना बड़ी चुनौती रही है। नक्सली/ माओवादी हिंसा की वजह से भी कई क्षेत्रों में वांछित विकास नहीं हो पाया है।

राज्य की स्थिति-परिस्थिति की समीक्षा के दौरान जब कुछ अधिकारियों को समस्या और उसकी वजह का पता चल गया तब उन्होंने समस्या के निदान के लिए मंथन शूरू किया। मंथन के दौरान एक विचार आया, विचार क्रांतिकारी था और इसी से संचार क्रांति योजना का जन्म हुआ। फैसला लिया गया कि छत्तीसगढ़ में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या को दूर किया जाएगा, साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा लोग मोबाइल फोन, ख़ास तौर पर स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हुई विकास की मुख्यधारा में शामिल हो जाएँ।

इसी फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए एक योजना तैयार की गयी और उसे नाम दिया गया, 'संचार क्रांति योजना' यानी स्काई। 'संचार क्रांति योजना' के तहत 50 लाख लोगों को निःशुल्क यानी मुफ्त में स्मार्ट फोन देने का फैसला लिया गया। सरकार यह बात अच्छे से जानती है कि बिना मोबाइल कनेक्टिविटी के स्मार्ट फोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, इसी वजह से उसने 'संचार क्रांति योजना' के तहत राज्य के सभी हिस्सों में मोबाइल फोन नेटवर्क उपलब्ध करवाने की भी ठानी। सरकार ने छत्तीसगढ़ में 1500 से ज़्यादा टावर लगाने का फैसला लिया।

राज्य सरकार ने लोगों को स्मार्ट फोन उपलब्ध करवाने और मोबाइल फोन कनेक्टिविटी/ नेटवर्क बढ़ाने की योजना को लागू करवाने के लिए निविदाएं आमंत्रिक कीं। चूँकि काम स्मार्ट फोन और कनेक्टिविटी दोनों का है, सरकार ने स्मार्ट फोन बनाने वाली कम्पनी और टेलकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियों के समूह से निविदाएं मंगवाईं। मेरिट और न्यूनतम दर के आधार पर फोन बनाकर बांटने का काम माइक्रोमैक्स और कनेक्टिविटी बढ़ाने का जिम्मा जिओ को मिला।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में बस्तर ज़िले में हुई एक सभा के दौरान 'सचांर क्रांति योजना' की विधिवद शुरुआत की। योजना के तहत राज्य के 50 लाख लोगों को बिना किसी शुल्क के यानी मुफ्त में स्मार्ट फोन देने का काम शूरू गया है। 45 लाख स्मार्ट फोन महिलाओं को बांटे जाएंगे, जबकि पांच लाख स्मार्ट फोन प्रदेश के उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों को बांटे जाएंगे।

सरकार को भरोसा है कि स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ के लोग विकास की मुख्यधारा से सीधे जुड़ेंगे और इससे राज्य की सकल घरुलू आय बढ़ेगी और विकास की गति तेज होगी। बड़ी बात ये भी है कि भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया-भर में इतने बड़े स्तर पर स्मार्ट फोन लोगों में बांटने और नेटवर्क टावर लगवाकर कनेक्टिविटी बढ़वाने का काम कहीं नहीं हुआ है। ये योजना विश्व-भर में अपने किस्म की पहली और कम समय में ज्यादा से ज्यादा कनेक्टिविटी बढ़ाने के मामले में विश्व की सबसे बड़ी योजना है।

गौर देने वाली बात यह भी है कि केंद्र सरकार ने पहले ही ‘डिजिटल इंडिया’ की परिकल्पना की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि भारत में ज्यादा से ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करें। डिजिटल इंडिया एक ऐसी पहल/कोशिश है जिसके तहत सभी सरकारी विभागों को देश की जनता के साथ सीधे जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है। इंटरनेट का इस्तेमाल तभी हो पाएगा जब लोगों के हाथ में स्मार्ट फोन होंगे। यानी डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में भी संचार क्रांति योजना बड़ी भूमिका निभाएगी।

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