दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए लगाई गई 'वायु' मशीन

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दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए चिंता प्रकट की गई। अब इस दिशा में एक छोटी सी पहल की गई है। सीएसआईआर ने दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए वायु (विंड एम्यूगेशन प्यूरिफाइंग यूनिट) नाम की एक मशीन तैयार की है। 

'वायु' को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- नैशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (CSIR-नीरी) ने तैयार किया है। प्रॉजक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलजी की तरफ से फंड प्रदान किया गया है। 

दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है और जनसंख्या के मामले में शहर का पांचवा स्थान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पर्टिक्युलेट मैटर 10 (PM10) की मात्रा काफी अधिक है। बीते साल WHO ने वायु प्रदूषण को लेकर 91 देशों के 1600 शहरों पर डाटा आधारित अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें दिल्ली की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 सबसे अधिक पाया गया है। दिल्ली में पीएम 2.5 की सघनता 153 माइक्रोग्राम तथा पीएम 10 की सघनता 286 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई है जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए चिंता प्रकट की गई। अब इस दिशा में एक छोटी सी पहल की गई है। सीएसआईआर ने दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए वायु (विंड एम्यूगेशन प्यूरिफाइंग यूनिट) नाम की एक मशीन तैयार की है। यह मशीन इस बार सर्दियों में दिल्ली के ट्रैफिक जंक्शन की खराब हवा को साफ करने का काम वायू करेगा। इसे अभी दिल्ली के आईटीओ और मुकरबा चौक पर लगाया गया है। केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने बीते सप्ताह इसका उद्घाटन किया।

'वायु' को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- नैशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (CSIR-नीरी) ने तैयार किया है। प्रॉजक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलजी की तरफ से फंड प्रदान किया गया है। मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि यह छोटा सा डिवाइस अपने आसपास 500 मीटर स्क्वायर मीटर की हवा को साफ करने की क्षमता रखता है, जबकि 10 घंटे काम करने के दौरान यह सिर्फ आधा यूनिट बिजली की खपत करता है। इसकी मेंटिनेंस कॉस्ट भी सिर्फ 1500 रुपये प्रति माह है।

उन्होंने बताया कि हम ‘वायू’ का बड़ा वर्जन लाने की तैयारी भी कर रहे हैं। इसका बड़ा वर्जन 10,000 मीटर स्क्वायर मीटर की हवा को साफ कर सकेगा। इसके डिजाइन को इस तरह से तैयार करने की कोशिश भी की जा रही है ताकि इसे बस शेल्टरों पर भी लगाया जा सके। एक अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण भारत में मौत का पांचवां बड़ा कारण है। वायु में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण मनुष्य के फेफड़े में पहुंच जाते हैं, जिससे श्वास व हृदय संबंधित रोग होने का खतरा बढ़ जाता है और इससे फेफड़ों के कैंसर की भी आशंका हो सकती है।

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण वाहनों की बढ़ती संख्या है। इसके साथ ही तापीय विद्युत् संयंत्, पड़ोसी राज्यों में स्थित ईंट भट्ठा आदि से भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह डिवाइस विंड हवा से प्रदूषक तत्वों को खींचता है और साफ हवा बाहर छोड़ता है। पीएम को हवा से हटाने फिल्टर लगे हैं। इसके अलावा एक्टिव कार्बन (चारकोल) और जहरीली गैसों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड और वीओसी को कम करने के लिए यूवी लैंप भी लगाए गए हैं। इस डिवाइस में एक पंखा, फिल्टर के साथ दो यूवी लैंब, आधा केजी एक्टिवेटेड कार्बन जिस पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड की कोटिंग है भी लगाया गया है। 15 अक्टूबर तक दिल्ली के विभिन्न व्यस्त चौराहों पर इस तरह के 54 डिवाइस लगाने का दावा किया गया है।

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