भारतीय कंपनियों को निवेश के लिए अफ्रीका में नए गंतव्यों की तलाश

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय कंपनियों को निवेश के लिए अफ्रीका में नए गंतव्यों की तलाश है। उन्होंने कहा कि भारत में सृजित उल्लेखनीय मात्रा में पूंजी के निवेश के लिए देश के बाहर भी अवसरों की तलाश है जिनमें प्राकृतिक संसाधनों के धनी अफ्रीकी देश भी शामिल हैं। भारत और अफ्रीका के बीच प्राचीन व्यापारिक और आर्थिक संपर्कों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के अफ्रीका के साथ नजदीकी और दोस्ताना रिश्तों में कारोबार और आर्थिक गतिविधियों की हमेशा प्रमुख भूमिका रही है।

आइवरी कोस्ट के उद्योगपतियों के व्यापारिक मंच को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि आइवरी कोस्ट के 9.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है। इससे यह अफ्रीका में निवेश के लिए प्रमुख गंतव्य बन गया है और यह इथियोपिया के बाद दूसरी सबसे तेजी से वृद्धि दर्ज करने वाली अर्थव्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि यहां के लोगों के लिए भारत द्वारा पेश अवसर नए नहीं हैं। भारत ने अब करीब एक दशक से अधिक से 7.6 प्रतिशत की स्थिर आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था में जो व्यापक सुधार पेश किए गए हैं उनसे देश मंव कारोबार सुगमता की स्थिति बढ़ी है।’’ राष्ट्रपति ने कहा कि देश की विदेशी निवेश व्यवस्था को सरलीकृत प्रक्रियाओं के जरिये उदार किया गया है और इसके लिए कई अंकुश वाले प्रावधान हटाए गए हैं।

मुखर्जी ने कहा कि भारत की निगाह कोत देआइवरी पर है विशेषरूप से कृषि प्रसंस्करण तथा खनिजों की खोज और उत्खनन के लिए। उन्होंने आइवरी कोस्ट के उद्यमियों से कहा कि वे भारत सरकार की मेक इन इंडिया जैसी पहल का लाभ उठाएं। मुखर्जी ने कहा, ‘‘भारत, आइवरी कोस्ट का पांच सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। हमारे दोनों देशों में सकारात्मक वृद्धि के माहौल के बावजूद हमारा द्विपक्षीय व्यापार निचले स्तर पर है। यह 84 करोड़ डालर से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह हमारी वास्तविक क्षमता से काफी कम है।’’ (पीटीआई)