जिसे डीयू ने कर दिया था रिजेक्ट, उसने नासा के लिए किया काम, अब फोर्ब्स ने दिया सम्मान

जिसे दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एडमिशन देने से किया मना, उसने नासा में किया काम...

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15,000 नॉमिनेशन के बीच तीर्थक साहा का चुना जाना काफी बड़ी उपलब्धि है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नासा के लिए काम कर चुके इस युवा को कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन तक नहीं मिला था।

तीर्थक साहा (फाइल फोटो)
तीर्थक साहा (फाइल फोटो)
दिल्ली के द्वारका में रहने वाले तीर्थक साहा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट कोलंबिया स्कूल से की उसके बाद उन्होंने मणिपाल कॉलेज, कर्नाटक से ग्रैजुएशन किया और उसके बाद 2013 में वे अमेरिका चले गए। 

उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष रिसर्च एजेंसी नासा के साथ काम किया। वे नासा के लिए मिनि सैटेलाइट के लिए सोलर पैनल मॉड्युलर बनाने पर काम भी किया।

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग, नोबल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई और दुनिया के सबसे तेज तैराक माइकल फेल्पस के बीच क्या समानताएं हैं? इन सभी को फोर्ब्स मैग्जीन ने सालाना 30 अंडर-30 की लिस्ट में शामिल किया है। इस लिस्ट में दुनिया भर के युवा उद्यमियों, खोजकर्ताओं और बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले युवाओं को शामिल किया जाता है। इसी लिस्ट में दिल्ली के एक युवा तीर्थक साहा का भी नाम शामिल है। 15,000 नॉमिनेशन के बीच उनका चुना जाना काफी बड़ी उपलब्धि है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नासा के लिए काम कर चुके इस युवा को कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन तक नहीं मिला था।

25 वर्षीय साहा के पिता सरोजिनी नगर में बंगाली के शिक्षक हैं वहीं उनकी मां डाक विभाग में काम करती हैं। दिल्ली के द्वारका में रहने वाले तीर्थक साहा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट कोलंबिया स्कूल से की उसके बाद उन्होंने मणिपाल कॉलेज, कर्नाटक से ग्रैजुएशन किया और उसके बाद 2013 में वे अमेरिका चले गए। अभी वह अमेरिका के इंडियाना प्रांत में रह रहकर अमेरिकन इलेक्ट्रिक पॉवर (AEP) के लिए काम कर रहे हैं। यह कंपनी अमेरिका के 11 स्टेट में 55 लाख लोगों को बिजली की सप्लाई करती है। लेकिन तीर्थक की जिंदगी कुछ साल पहले काफी संघर्षों से भरी थी।

साहा को यकीन भी नहीं था कि वह कभी इस मुकाम तक पहुंचेंगे। दरअसल वे एस्ट्रोफिजिक्स यानी कि खगोल भौतिकी के बारे में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन डीयू की कट ऑफ काफी ऊंची होने की वजह से उन्हें किसी भी कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल सका। इसके पीछे वजह ये थी कि स्कूल में उनके नंबर इतने नहीं आ पाए थे कि दिल्ली विश्वविद्यालय उन्हें दाखिला देता। वे बताते हैं कि दसवीं से ही उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिला और यही वजह थी कि 12वीं की परीक्षा देने के बाद भी वे संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने आईआईटी की तैयारी करने के बारे में भी सोचा, लेकिन फिर लगा कि अगर यहां भी सेलेक्शन नहीं हुआ तो एक साल और उन्हें बैठना पड़ेगा।

इसलिए उन्होंने मणिपाल यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सेंटर में एप्लाइड साइंस में दाखिला ले लिया। इसके बाद उन्हें फिलाडेल्फिया की ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला जहां से उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष रिसर्च एजेंसी नासा के साथ काम किया। वे नासा के लिए मिनि सैटेलाइट के लिए सोलर पैनल मॉड्युलर बनाने पर काम किया। उन्हें कैंपस से ही AEP में नौकरी मिल गई। कंपनी को पॉवर ग्रिड सिस्टम पर काम करने के लिए किसी की जरूरत थी, तीर्थक उनके लिए एकदम सही उम्मीदवार साबित हुए। उन्हें वहां ग्रिड मॉडर्नाइजेशन इंजिनियर की नौकरी मिली। दरअसल कंपनी में ऐसा कोई पद ही नहीं था लेकिन उनकी काबिलियत को देखते हुए यह नया पद बनाया गया।

AEP ने हाल ही में एक इनोवेशन चैलेंज आय़ोजित किया था जिसमें 600 आवेदनों के बीच साहा का प्रॉजेक्ट दूसरे स्थान पर रहा। इस प्रॉजेक्ट को कंपनी के पूरे नेटवर्क में लागू किया जाएगा। उन्हें इसी प्रॉजेक्ट के लिए फोर्ब्स की लिस्ट में शामिल किया गया है। उन्होंने इस सफलता पर कहा, 'मेरे लिए यह काफी गौरव की बात है। इससे मेरे करियर की गति निर्धारित होगी। मेरे लिए यह एक लाइफटाइम अचीवमेंट जैसा है।' इसके अलावा तीर्थक और कई सारे प्रॉजेक्ट्स के लिए काम कर रहे हैं। जिसमें आने वाले समय में ऊर्जा के लिए जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को भी कम किया जा सकेगा।

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