किसानों में बढ़ा फूलों की खेती का क्रेज, इन फूलों से की जा सकती है लाखों की कमाई

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एक हेक्टेयर में जंगली गेंदा लगाने और उसकी देखरेख में करीब 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। इससे लगभग 1,50000 रुपये की पैदावार होती है। वहीं रोजमेरी की एक हेक्टेयर खेती में 60 हजार रुपये खर्च होते हैं।

फोटो साभार: सोशल मीडिया
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रोजमेरी की खेती अक्टूबर से फरवरी के बीच हो सकती है। यह सदाबहार पौधा होता है। इसके तेल का उपयोग स्वाद और सुगंध के लिए होता है। 

सबसे ज्यादा कमाई ग्लैडोलस से होती है। यह पांच माह में तैयार हो जाता है और एक बार की फसल में दो से तीन लाख तक की कमाई हो जाती है। 

देश के किसान अब परंपरागत खेती के साथ ही आधुनिक खेती की तरफ अपने कदम बढ़ा रहे हैं। इनमें से कई किसानों ने जंगली गेंदे और रोजमेरी की खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मुबारकपुर में गेंदे की खेती करने वाले वीरेन्द्र यादव बताते हैं कि धान और गेहूं की तुलना में इसमें आमदनी दो गुने तक होती है। पिछले कुछ साल में इसकी डिमांड काफी बढ़ चुकी है।

लखनऊ में रिसर्च संस्था सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. राम सुरेश के मुताबिक एक हेक्टेयर में जंगली गेंदा लगाने और उसकी देखरेख में करीब 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। इससे लगभग 1,50000 रुपये की पैदावार होती है। वहीं रोजमेरी की एक हेक्टेयर खेती में 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। इतनी खेती से 2,40000 रुपये की पैदावार होती है। जंगली गेंदे और रोजमेरी की खेती की ट्रेनिंग संस्थान समय-समय पर देता है। काफी संख्या में किसानों में इन दोनों की खेती का क्रेज बढ़ रहा है। वे बताते हैं कि उत्तर भारत में जंगली गेंदे की बुआई अक्टूबर में होती है। एक हेक्टेयर के लिए दो किलोग्राम बीज की जरूरत होती है।

बलुअा दोमट मिट्टी अच्छी: डॉ. राम के मुताबिक जंगली गेंदे के लिए बलुअा या दोमट मिट्टी बेहतर होती है। मैदानी इलाके में फसल मार्च के अंत तक तैयार हो जाती है। जमीन से लगभग 30 सेंटीमीटर ऊपर से पौधे को काट लेना चाहिए। एक हेक्टेयर में 300 से 500 कुंतल शाकीय भाग (हर्ब) मिलता है। इससे 50 किलोग्राम तेल निकलता है। रोजमेरी की खेती अक्टूबर से फरवरी के बीच हो सकती है। यह सदाबहार पौधा होता है। इसके तेल का उपयोग स्वाद और सुगंध के लिए होता है। इसका तेल एरोगाथेरेपी, त्वचा व अन्य चीजों के प्रयोग में भी आता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक रोजमेरी की खेती के लिए जल निकासी की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए। रोजमेरी की कटाई साल में दो से तीन बार की जाती है। पहली कटाई रोपाई के करीब 160 दिन बाद करनी चाहिए। पहली कटाई के करीब 60 दिन बाद दूसरी कटाई की जा सकती है। एक हेक्टेयर में 100 से 150 कुंतल शाक मिलती हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इसकी सप्लाई होती है।

वहीं ग्लैडोलस, गुलाब, गेंदा जैसे कई फूलों की खेती की जा सकती है। सबसे ज्यादा कमाई ग्लैडोलस से होती है। यह पांच माह में तैयार हो जाता है और एक बार की फसल में दो से तीन लाख तक की कमाई हो जाती है। ग्लैडोलस की बुआई मार्च माह से अप्रैल के मध्य तक व दिसम्बर में की जाती है। शादी व अन्य मांगलिक कार्यों में ग्लैडोलस की बिक्री अधिक होती है। ग्लैडोलस, गेंदा व जाफरी जैसे फूलों के बीज आसानी से उद्यान विभाग व प्राइवेट दुकानों पर मिल जाते हैं।

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