एक हादसा जिसने किशोर को सुरीला बना दिया

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किशोर कुमार वो नाम है, जिसने अपनी आवाज़ और गीतों से लोगों की जिंदगी में सात रंग के सपने सजा दिये। दुनिया में न होने के बावजूद वे अपने खिलंदड़ अंदाज से आज भी लोगों को हंसी का डोज देने की कूवत रखते हैं। किशोर एक बेहतरीन सिंगर और दिलखुश एक्टर तो थे ही, साथ ही उनका जीवन दर्शन और गंवई अंदाज किसी जीवंत सिनेमा जैसा था।

फोटो साभार: thequint
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जोशीली आवाज़ के किशोर दा एकांतवासी थे। वे अपने में ही मगन रहना पसंद करते थे। उनकी अपनी ही कहानियां थीं, अपने ही गढ़े कुछ दोस्त थे, जिनका साथ उन्हें हमेशा भाता था। हम उन्हें जिन दो रूपों के लिए याद करते हैं, उनमें पहला है गायक और दूजा एक्टर। लेकिन क्या आपको मालूम है कि उनकी ज़िंदगी में ये दोनों घटनाएं इत्तेफाकन हुई थीं, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गईं।

'खंडवा के किशोर कुमार!' वो किसी जनसभा या महफिलों में जाते थे तो खुद का परिचय इसी नाम से कराते। उन्हें अपने घर मध्यप्रदेश के खंडवा से वैसा ही लगाव था जैसा किसी बच्चे को अपनी मां से होता है। उनका असल नाम आभास कुमार गांगुली था। फिल्मी दुनिया ने उनका नाम बदल कर किशोर कुमार कर दिया। किशोर कुमार एकांतवासी थे। वे अपने में ही मगन रहना पसंद करते थे। उनकी अपनी ही कहानियां थीं, अपने ही गढ़े कुछ दोस्त थे, जिनके साथ खेलना उन्हें खुश कर देता था। हम उन्हें जिन दो रूपों के लिए याद करते हैं, उनमें पहला है गायक और दूजा एक्टर। लेकिन क्या आपको मालूम है कि उनकी ज़िंदगी में ये दोनों घटनाएं ही इत्तेफाकन हुई थीं, जो आगे चलकर उनकी पहचान बन गईं।

वो हादसा, जिसने किशोर को सुरीला बना दिया

किशोर कुमार का बचपन में गला बड़ा खराब था। उनके गले से सही ढंग से आवाज नहीं निकलती थी। किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार ने एक इंटरव्‍यू में बताया था, कि किशोर का पैर एक बार हंसिए पर पड़ गया। इससे पैर में जख्‍म हो गया। दर्द इतना ज्‍यादा था कि किशोर कई दिन तक रोते रहे। इतना रोए कि गला खुल गया और उनकी आवाज में एक जादुई असर आ गया।

अपनी आवाज से खुश किशोर कुमार मस्तमगन होकर गाते रहते थे। ऐसे ही एक दिन अशोक कुमार से मिलने केएल सहगल आये, उन्होंने अशोक से पूछा कि ये कौन गा रहा है। अशोक ने बताया कि मेरा छोटा भाई है और उसे गाने का बहुत शौक है। इसके बाद धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया में लोग किशोर कुमार की आवाज के पीछे पागल होने लगे।

एक्टर किशोर कुमार की कहानी

असल किशोर कुमार को जानना है, उनकी बेचैनी को समझना है, उनके खंडवा प्रेम की गहराई में उतरना है तो उनका ये दिलचस्प इंटरव्यू पढ़ें। इसमें वो ये भी बता रहे हैं, कि कैसे लोगों ने उन्हें एक एक्टर बना दिया जबकि वो अभिनय करना ही नहीं चाहते थे। किशोर कुमार का ये इंटरव्यू प्रीतिश नंदी ने लिया था, जो पहली बार इलेस्ट्रेटेड वीकली के अप्रैल 1985 के अंक में छपा था। इसका हिन्दी अनुवाद रंगनाथ सिंह ने किया है...

मैंने सुना है कि आप बंबई छोड़ कर खंडवा जा रहे हैं?
किशोर: इस अहमक, मित्रविहीन शहर में कौन रह सकता है, जहां हर आदमी हर वक्त आपका शोषण करना चाहता है? क्या तुम यहां किसी का भरोसा कर सकते हो? क्या कोई भरोसेमंद है यहां? क्या ऐसा कोई दोस्त है यहां जिस पर तुम भरोसा कर सकते हो? मैंने तय कर लिया है कि मैं इस तुच्छ चूहा-दौड़ से बाहर निकलूंगा और वैसे ही जीऊंगा जैसे मैं जीना चाहता था, अपने पैतृक निवास खंडवा में। अपने पुरखों की जमीन पर। इस बदसूरत शहर में कौन मरना चाहता है!!

आप यहां आये ही क्यों?
किशोर: मैं अपने भाई अशोक कुमार से मिलने आया था। उन दिनों वो बहुत बड़े स्टार थे। मुझे लगा कि वो मुझे केएल सहगल से मिलवा सकते हैं, जो मेरे सबसे बड़े आदर्श थे। लोग कहते हैं कि वो नाक से गाते थे, लेकिन क्या हुआ? वो एक महान गायक थे। सबसे महान।

ऐसी खबर है कि आप सहगल के प्रसिद्ध गानों का एक एलबम तैयार करने की योजना बना रहे हैं?
किशोर: मुझसे कहा गया था, मैंने मना कर दिया। उन्हें अप्रचलित करने की कोशिश मुझे क्यों करनी चाहिए? उन्हें हमारी स्मृति में बसे रहने दीजिए। उनके गीतों को उनके गीत ही रहने दीजिए। एक भी व्यक्ति को ये कहने का मौका मत दीजिए कि किशोर कुमार उनसे अच्छा गाता है।

यदि आपको बॉम्बे पसंद नहीं था, तो आप यहां रुके क्यों? प्रसिद्धि के लिए? पैसे के लिए?
किशोर: मैं यहां फंस गया था। मैं सिर्फ गाना चाहता था। कभी भी अभिनय करना नहीं चाहता था। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों की कृपा से मुझे अभिनय करने को कहा गया। मुझे हर क्षण इससे नफरत थी और मैंने इससे बचने का हर संभव तरीका आजमाया। मैं सिरफिरा दिखने के लिए अपनी लाइनें गड़बड़ कर देता था, अपना सिर मुंड़वा दिया, मुसीबत पैदा की, दुखद दृश्यों के बीच में बलबलाने लगता था, जो मुझे किसी फिल्म में बीना राय को कहना था वो मैंने एक दूसरी फिल्म में मीना कुमारी को कह दिया– लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे जाने नहीं दिया। मैं चीखा, चिल्लाया, बौड़म बन गया। लेकिन किसे परवाह थी? उन्होंने तो बस तय कर लिया था कि मुझे स्टार बनाना है।

क्यों?
किशोर: क्योंकि मैं दादामुनि का भाई था और वह महान हीरो थे।

लेकिन आप सफल हुए…
किशोर: बेशक मैं हुआ। दिलीप कुमार के बाद मैं सबसे ज्यादा कमाई कराने वाला हीरो था। उन दिनों मैं इतनी फिल्में कर रहा था, कि मुझे एक सेट से दूसरे सेट पर जाने के बच ही कपड़ने बदलने होते थे। जरा कल्पना कीजिए, एक सेट से दूसरे सेट तक जाते हुए मेरी शर्ट उड़ रही है, मेरी पैंट गिर रही है, मेरा विग बाहर निकल रहा है। बहुत बार मैं अपनी लाइनें मिला देता था और रुमानियत वाले दृश्य में गुस्सा दिखता था या तेज लड़ाई के बीच रुमानियत। ये बहुत बुरा था और मुझे इससे नफरत थी। इसने स्कूल के दिनों के दुस्वप्न जगा दिये। निर्देशक स्कूल टीचर जैसे ही थे। ये करो, वो करो, ये मत करो, वो मत करो। मुझे इससे डर लगता था। इसीलिए मैं अक्सर भाग जाता था।

खैर, आप अपने निर्देशकों और निर्माताओं को परेशान करने के लिए बदनाम थे। ऐसा क्यों?
किशोर: बकवास। वे मुझे परेशान करते थे। आप सोचते हैं कि वो मेरी परवाह करते थे? वो मेरी परवाह इसलिए करते थे, क्योंकि मैं बिकता था। मेरे बुरे दिनों में किसने मेरी परवाह की? इस धंधे में कौन किसी की परवाह करता है?

इसीलिए आप एकांतजीवी हो गये?
किशोर: देखिए, मैं सिगरेट नहीं पीता, शराब नहीं पीता, घूमता-फिरता नहीं, पार्टियों में नहीं जाता, अगर ये सब मुझे एकांतजीवी बनाता है, तो ठीक है। मैं इसी तरह खुश हूं। मैं काम पर जाता हूं और सीधे घर आता हूं। अपनी भुतहा फिल्में देखने, अपने भूतों के संग खेलने, अपने पेड़ों से बातें करने, गाना गाने। इस लालची संसार में कोई भी रचनात्मक व्यक्ति एकांतजीवी होने के लिए बाध्य है। आप मुझसे ये हक कैसे छीन सकते हैं।

आपके ज्यादा दोस्त नहीं हैं?
किशोर: एक भी नहीं।

यह तो काफी चालू बात हो गयी...
किशोर: लोगों से मुझे ऊब होती है। फिल्म के लोग मुझे खासतौर पर बोर करते हैं। मैं पेड़ों से बातें करना पसंद करता हूं।

इसका मतलब आपको प्रकृति पसंद है?
किशोर: इसीलिए तो मैं खंडवा जाना चाहता हूं। यहां मेरा प्रकृति से संबंध खत्म हो गया है। मैंने अपने बंगले के चारों तरफ नहर खोदने की कोशिश की थी, जिससे मैं उसमें गंडोला चला सकूं। जब मेरे आदमी खुदाई कर रहे थे, तो नगर महापालिका वाले बंदे बैठे रहते थे, देखते थे और ना-ना में अपनी गर्दन हिलाते रहते थे। लेकिन ये काम नहीं आया। एक दिन किसी को एक हाथ का कंकाल मिला, एड़ियां मिलीं। उसके बाद कोई खुदाई करने को तैयार नहीं था। मेरा दूसरा भाई अनूप गंगाजल छिड़कने लगा, मंत्र पढ़ने लगा। उसने सोचा कि ये घर कब्रिस्तान पर बना है। हो सकता ये बना हो, लेकिन मैंने अपने घर को वेनिस जैसा बनाने का मौका खो दिया।

लोगों ने सोचा होगा कि आप पागल हैं! दरअसल, लोग ऐसा ही सोचते हैं।
किशोर: कौन कहता है, मैं पागल हूं? दुनिया पागल है, मैं नहीं।

यहां सुने किशोर का वो फंटास्टिक गीत, जिसे गाना किसी भी सिंगर के लिए बहुत मुश्किल होगा, लेकिन लोगों ने इस गाने को हल्के में ले लिया... लोगों ने सोचा, कि किशोर ने खेल-खेल में कोई गीत गा दिया...

-प्रज्ञा श्रीवास्तव

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