सामान है भेजना... 'लेट्स ट्रांसपोर्ट'

कर्नाटक के लॉजिस्टिक्स स्पेस में शानदार एंट्री

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भारत में लॉजिस्टिक्स उद्योग क़रीब 130 बिलियन डॉलर का आकार ले चुका है, जिसमें शहरों का अंदरूनी लॉजिस्टिक्स सेगमेंट 10 बिलियन डॉलर का है। इस तेज़ी से बढ़ते सेगमेंट में व्यवसायियों और न्यूकमर्स की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद कैसे सिर्फ कुछ महीनों पुराना एक शुरुआती उद्यम खुद के दम पर खड़ा हो चुका है?

24 साल के आईआईटी खडगपुर ग्रैजुएट पुष्कर सिंह कहते हैं, "अगर कोई बेहतर उत्पाद, बेहतर क्रियान्वयन और मीलों तक जाने के इरादे के साथ खुद को भीड़ से अलग खड़ा कर पाता है, तो फिर प्रतिस्पर्धा कोई मायने नहीं रखती।"

कर्नाटक में अपने आईआईटी के सहपाठियों सुदर्शन रवि (इकोनॉमिक्स 2013-बैच) और अंकित पराशर (इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग 2012-बैच) के साथ मिलकर इस साल की शुरुआत में टेक्नो-लॉजिस्टिक्स सॉल्युशंस प्लेटफॉर्म ‘लेट्स ट्रांसपोर्ट डॉट इन’ की स्थापना करने वाले पुष्कर जानते हैं कि भीड़ में खुद को कैसे खड़ा करना है।

शहर के अंदर-अंदर टेक्नो-लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदान करने वाली कंपनी लेट्स ट्रांसपोर्ट बैंगलोर में स्थित है और व्यवसायियों के साथ-साथ आम ग्राहकों को सेवा देने वाली एक भरोसेमंद, किफायती और पेशेवर सर्विस के तौर पर जानी जाती है।

सीईओ पुष्कर कहते हैं, “लॉजिस्टिक्स स्पेस में एक पेशेवर और मानक सेवा की बहुत ज्यादा ज़रुरत थी, जो कि बिल्कुल अलग है और इसकी अपनी गतिशीलता है। एक ग्राहक की ज़रुरतों को पूरा करने के लिए यही बात समझने की ज़रुरत होती है। अगर इंडस्ट्री को सही उत्पाद मुहैया कराया जा सके तो यहां विकास के मौके काफी ज़्यादा हैं।”

पूरे कर्नाटक में ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की ज़रुरतों का विस्तार देखने के बाद, बड़े पैमाने पर कमर्शियल ज़रुरतों से लेकर रोजमर्रा की घरेलू ट्रांसपोर्ट ज़रुरतों तक – इस उद्यम का लक्ष्य शहर के अंदर के लॉजिस्टिक्स में क्रांति लाने का है, यानी ग्राहकों और व्यवसायियों को एक क्लिक पर सहज लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन देना है।

ये अलग क्यों है?

ये ग्राहकों को दूसरी वैल्यू एडेड सेवाओं के साथ उनकी इच्छा के मुताबिक़ अटैचमेंट सॉल्यूशन देता है, जैसे कि स्क्रीन्ड ड्राइवर्स, ऑडिटेड और जीपीएस लगे हुए वाहन, प्वाइंट-टू-प्वाइंट बिलिंग, स्टेटस अपडेट्स, 24x7 सेवाएं और अधिक-से-अधिक दक्षता, ये सब पारदर्शी और किफायती कीमत में। उदाहरण के लिए, कंपनी पहले 5 किलोमीटर के लिए 350 रुपए में सेवा देती है, वहीं जब इसकी स्थानीय विक्रेताओं से तुलना की गई तो वो इतनी ही दूरी के लिए 800 रुपए लेते हैं, जबकि दूसरे प्रतिस्पर्धी पहले 5 किलोमीटर के लिए 450 रुपए चार्ज करते हैं।

पुष्कर कहते हैं, “ग्राहक की ज़रूरुतों को समझने और उन्हें पूरा करने का विचार हमारे उत्पादों के डीएनए में है।”

LetsTransport.in को लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में रखने की वजह पूछे जाने पर (मार्केट रिसर्च फर्म ‘रिसर्च एंड मार्केट’ के मुताबिक़ 2020 तक लॉजिस्टिक्स सेगमेंट 12.17 के CAGR से बढ़ने की उम्मीद है) या फिर ये किसी ख़ास मुद्दे से संबंधित है जिस पर दूसरे स्टार्ट अप ग्राहकों को परिणाम मुहैया कराने में नाकाम रहे, वो कहते हैं, “ऑपरेशंस और बिजनेस बैकग्राउंड से होने के चलते लेट्स ट्रांसपोर्ट की संस्थापक टीम परिचालन अंतर्दृष्टि और विशेषज्ञता हासिल करने के लिए काम कर रही है, ताकि ऐसा उत्पाद बन सके जो ग्राहकों की विभिन्न आवश्यकताओं को अच्छी तरह पूरा कर सके।”

निवेश, नए उद्यम को जोड़ना

अब तक ये उद्यम संस्थापक टीम से जुड़े लोगों से जुटाए निवेश से वित्तपोषित है, और पैसा तकनीक के विकास, टॉप इंस्टीट्यूट्स जैसे आईआईटी, एनआईटी और बीआईटी आदि से चुने हुए स्कॉलर्स की टीम बनाने में खर्च किया गया है। आईटीसी के पुराने कर्मचारी पुष्कर ने खुलासा किया कि निवेशक इस स्टार्टअप में ज्यादा फंड डालने के लिए तैयार हैं और उनकी टीम कइयों से पहले ही बातचीत में जुटी है।

LetsTransport.in ने उद्योग के नए प्लेयर शिफ्टर, जो कि ऑनलाइन या कॉल के जरिए मिनी ट्रक मुहैया कराती है, को इसकी स्थापना के 5 महीनों के भीतर ही अधिगृहित कर लिया है।

रूबल सिद्धू और प्रशांत गुप्ता द्वारा 2014 में स्थापित शिफ्टर तकनीक के जरिए आसानी से ट्रक किराए पर मुहैया कराती है। ये अच्छा है क्योंकि इससे चालकों की लगातार आमदनी भी सुनिश्चित हो जाती है।

इस अधिग्रहण से लेट्स ट्रांसपोर्ट के कस्टमर बेस और बेड़े में वाहनों की संख्या बढ़ी है, जिसका कई शहरों में जल्द विस्तार का लक्ष्य है।

स्वागत करने योग्य नतीजे

पुष्कर को भरोसा है कि लोग उनके स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। वो कहते हैं, "जिनके लिए हमने काम किया है, उनसे बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला है। हमें हर ग्राहक से बहुत सारा बिजनेस और रेफरेंस मिले हैं।"

इस सेगमेंट की चुनौतियों और उन पर पार पाने के मामले में वो उपभोक्ता की जरुरतों को समझने और ऐसा उत्पाद बनाने पर जोर देते हैं जो उन ज़रुरतों को पूरा कर सके। वो कहते हैं, "चुनौतियों पर जीत पाने का तरीका एक ही है, संचालन में प्रोएक्टिव रहना और ये सुनिश्चित करना कि टेक्नो-लॉजिस्टिक प्लेटफॉर्म इस स्पेस को सेवा देने में उपयुक्त हो।"

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