मिलिए आर्मी कॉलेज की पहली महिला डीन मेजर जनरल माधुरी कानितकर से

चार दशक तक मेडिकल फील्ड में काम करने के बाद सेना की पहली ट्रेन्ड पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट माधुरी कानितकर

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माधुरी ने पुणे के ही फरगुसन कॉलेज से अपनी स्कूल की पढ़ाई की और उसके बाद मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें एक दोस्त के जरिए AFMC के बारे में मालूम चला।

फोटो साभार- फेमिना और इंडियन एक्सप्रेस
फोटो साभार- फेमिना और इंडियन एक्सप्रेस
1980 में माधुरी ग्रैजुएट हुईं और एमबीबीएस की टॉपर बनीं। उन्हें इसके लिए बेस्ट स्टूडेंट का खिताब मिला और गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसके बाद माधुरी ने पीडियाट्रिक्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया और एम्स से पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी की ट्रेनिंग ली।

माधुरी कानितकर ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे कभी सेना का हिस्सा बनेंगी। यहां तक कि उन्हें 12वीं तक आर्म फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) के बारे में भी नहीं मालूम था। लेकिन आज वे सेना में डॉक्टर हैं और डेप्युटी जनरल के पद पर तैनात हैं। वे AFMC की पहली महिला डीन हैं। उन्होंने यहीं से अपनी मेडिकल की पढ़ाई भी की है। माधुरी ने पुणे के ही फरगुसन कॉलेज से अपनी स्कूल की पढ़ाई की और उसके बाद मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें एक दोस्त के जरिए AFMC के बारे में मालूम चला।

वह कहती हैं, 'मेरे कुछ दोस्तों का सेलेक्शन एनडीए में हो गया था और मैं हमेशा उनके बारे में सुना करती थी। मुझे उनकी लाइफस्टाइल पसंद थी। इसके अलावा मेरी एक रूममेट थी जो एयरफोर्स बैकग्राउंड से थी। तो इस वजह से वो AFMC जाना चाहती थी उसी से मैंने सबसे पहले AFMC का नाम सुना था। उसके साथ ही मैं यहां आई और यहां की सफाई, इलाज का स्तर, अनुशासन जैसी चीजों से प्रभावित हो गई।' यह पेशा AFMC और सेना में आमतौर पर पुरुषों का वर्चस्व होता था। लेकिन माधुरी ने फैसला कर लिया कि वे यहीं से मेडिकल की पढ़ाई करेंगी। हालांकि इसके लिए उन्हें कई तरह के संघर्ष भी करने पड़े।

1980 में माधुरी ग्रैजुएट हुईं और एमबीबीएस की टॉपर बनीं। उन्हें इसके लिए बेस्ट स्टूडेंट का खिताब मिला और गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसके बाद माधुरी ने पीडियाट्रिक्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया। उन्होंने एम्स से पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी की ट्रेनिंग ली। उन्होंने सिंगापुर और लंदन के कुछ श्रेष्ठ मेडिकल इंस्टीट्यूट्स से भी ट्रेनिंग हासिल की। लगभग चार दशक तक मेडिकल फील्ड में काम करने के बाद वे सेना की पहली ट्रेन्ड पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट बनीं। उन्हें AFMC का डीन बनाया गया। वह कहती हैं कि AFMC देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में शुमार होता है। इसलिए इसे बरकरार रखना मेरी जिम्मेदारी है।

वह कहती हैं, 'AFMC का हिस्सा होने के नाते मैं कह सकती हूं कि इसने मुझे जिंदगी में काफी कुछ सिखाया है। अब वक्त है कि मैं इसके लिए जितना हो सके करूं। कॉलेज में फैकल्टी और काम करने वाले कर्मचारी सब काफी अच्छे हैं और अब हम इसे एक रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा यहां कम्यूनिकेशन स्किल और बाकी सॉफ्ट स्किल्स सिखाने पर जोर दे रहे हैं।' अपने क्षेत्र में शिखर पर पहुंचने वाली माधुरी अपने काम और मेहनत के दम पर आज न जाने कितनी लड़कियों के लिए मिसाल हैं।

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