लॉ + कार्टून='लॉटून्स', बच्चों को मिलती है क़ानूनी जानकारी...

- लॉटून्स के माध्यम से बच्चों को कानूनी ज्ञान मिल रहा है।- कनन और कैली ध्रू ने पेश की लॉटून्स की सीरीज़।- बच्चों के साथ-साथ हर आयुवर्ग के लोग चाव से पढ़ रहे हैं लॉटून्स।

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कनन ध्रूू और उनकी बहन कैली ध्रू ने भारत में लीगल सिस्टम को सुधारने की दिशा में एक मिशन शुरु किया। उन्होंने पाया कि भारत के नागरिकों को अपने कानूनी हकों और अधिकारों की बहुत कम जानकारी है। जानकारी कम होने की वजह से वे अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाते और न वो उसे फॉलो कर पाते हैं। इस प्रकार लोग पूरी तरह सिस्टम से जुड़ नहीं पाए। इन दोनों बहनों ने इस दिशा में काम करना शुरु किया। इन्होंने तय किया कि वे आसान और मजेदार तरीकों से बच्चों को अपने देश के कानून के विषय में बताएंगे।

लॉटून्स दो शब्दों से मिलकर बना है। लॉ और कार्टून। इस प्रोजेक्ट के तहत वे बच्चों को कार्टून के माध्यम से सरल तरीके से उनके अधिकारों व कानून की जानकारी देते हैं। ताकि बच्चों को बचपन से ही अपने अधिकारों, कर्तव्यों और स्वतंत्रता के विषय में जानकारी हो। दोनों बहनों ने लीगल रिफॉर्म पर पांच साल पहले काम करना शुरु कर दिया था और रिसर्च फाउंडेशन फॉर गर्वनेंस इन इंडिया की शुरुआत की। कनन पेशे से एक वकील हैं उन्होंने नेशनल नॉलेज कमीशन में काम किया है। वहीं कैरी ने विश्व बैंक और कई बड़ी संस्थाओं के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भाग लिया है। और फिर दोनों बहनों ने मिलकर रिसर्च की और लॉटून्स की शुरुआत की।

भारत में नागरिक शास्त्र को केवल पढ़ाया जाता है। उसे समझाने की दिशा में काम नहीं किया जाता। जिस कारण लोग उसे समझ नहीं पाते। ध्रू बहनों ने लॉटून्स के माध्यम से एक प्रयास किया ताकि स्कूली बच्चों को वे आसानी से उनके कानूनी अधिकारों के बारे में समझा सकें। बच्चों को कुछ भी समझाना तभी मुमकिन हो पाता है जब उस विषय को रुचिकर बनाकर पेश किया जाए और उन माध्यमों से समझाया जाए जो उन्हें प्रिय हों। ऐसे में दोनों बहनों के दिमाग में सबसे पहले कार्टून कैरेक्टर्स आए। कार्टून्स के माध्यम से समझाने का विचार बहुत अच्छा और प्रभावशाली भी था। दुनिया भर के बच्चे कार्टून को बहुत चाव से देखते और पढ़ते हैं। कार्टून कैरेक्टर बच्चों को बहुत अपील भी करते हैं। इस प्रकार दोनों बहनों ने कार्टून को माध्यम बनाकर बच्चों और युवाओं को उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी देने की शुरुआत की।

लॉटून्स के माध्यम से कानून, व्यक्ति आधिकार, मौलिक अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में बहुत सरलता से समझाया जाता है। इसको एक कहानी और चित्रों के रूप में पिरोया जाता है जो बच्चों और युवाओं के मन मस्तिष्क में छा जाते हैं। लॉटून्स के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि यह हर आयु वर्ग के लोगों को पसंद आते हैं। बच्चे तो इनकी तरफ बहुत आधिक आकर्षित होते हैं और इन कैरेक्टर्स की बातों को ध्यान से सुनते समझते हैं। दोनों बहनों के प्रयास से अब लॉटून्स एक बहुत अच्छा टीचिंग लर्निंग टूल बन चुका है। जिसे कई शिक्षण संस्थान अपना रहे हैं।

लॉटून्स की टीम में डिज़ाइन विशेषज्ञ हैं। टीचिंग विशेषज्ञ हैं जो अपने महत्वपूर्ण सुझावों और डिज़ाइनों से लॉटून्स को एक अच्छी प्रस्तुति बनाने में मदद करते हैं। इस सिरीज़ का मुख्य फोकस लीगल एलिमेंट्स जैसे मौलिक और मानव अधिकार, बच्चों के अधिकार। नागरिक कर्तव्य यानी सिविक ट्यूटीज के बारे में अवगत कराना है।

जनवरी 2014 में पहली बार इसे बच्चों के सामने पेश किया गया और लॉच के साथ ही इसे बहुत अच्छी प्रतिक्रिया भी मिलीं। फिर एक सर्वे भी कराया गया कि बच्चों को यह विषय किताबों के माध्यम से पढऩा पसंद है या लॉटून्स के माध्यम से? तो अधिकांश छात्रों ने लॉटून्स को स्वीकार किया।

इसके बाद नवंबर 2014 में दो मौलिक अधिकारों जिसमें समानता का अधिकार और बोलने की स्वतंत्रता का अधिकार शामिल था। इस विषय की पहली सिरीज़ पेश की गई। इस सिरीज़ को बहुत सफलता मिली। इसकी सफलता ने उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। अब दोनों बहनों को इस काम को आगे बढ़ाने के लिए काफी फंड भी मिल चुका है ताकि इस सिरीज़ की और किताबें निकाली जा सकें।

भविष्य में ध्रू सिस्टर्स पूरे भारत के बच्चों तक ऑनलाइन व ऑफ लाइन माध्यम से पहुंचना चहाती हैं। इस फंड से यह लोग एक वेबसाइट और एक मोबाइल एप्लीकेशन भी निकालना चाहते हैं।