दिव्यांग बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनके उभरा है वैशाली का 'तमहर' केंद्र

मुश्किल बीमारियों से ग्रसित बच्चों के लिए स्पेशल नीड्ट को पूरा कर रहा है वैशाली का तमहर केंंद्र ... बैंगलूर, रायचुर, हुट्टी और राजस्थान के पाली में विभिन्न केंद्रों का संचालन कर रही वैशाली दो दशक से 'स्पेशल नी्ड्स' के प्रति समर्पित हैं। 

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हम आज स्पेशल नीड्स वाले बच्चों और उनके लिए काम करने वाली एक संस्था के बारे में बात करेंगे आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में दिव्यांग बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से इन बच्चों के विशेष देखभाल की ज़रूरतें भी बढ़ रही है। एक आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में दिव्यांग लोगों की संख्या 700 मिलियन है, जिसमें से 18 से कम आयु के बच्चे करीब 150 मिलियन यानी कि 15 करोड़ तक होने का अंदाजा है। भारत के संदर्भ में देखें तो स्पेशल नीड्स वाले बच्चों की संख्या करीब 1.20 करोड़ तक होने का अनुमान है। बच्चों को तो भगवान का रूप कहा जाता है, लेकिन हाल के दिनों में लोगों की लाइफ स्टाइल आये बदलाव और तेजी से भागती-दौड़ती जिंदगी में अपने लिए कई बार वक्त की कमी रहती है। ऐसे में अगर घर में कोई बच्चा स्पेशल नीड्स वाला हो तो कई बार तो शुरुआत में उसे हम समझ भी नहीं पाते कि उन्हें क्या दिक्कत है। लेकिन वैज्ञानिक खोजों और रिसर्च से अब स्थितियाँ काफी बदली है। ऐसे में अगर इसका इलाज करने वाली डॉक्टर ही आपकी मदद के लिए आगे आए तो ऐसे बच्चों के पैरेंट्स के लिए ये खुशखबरी से कम नहीं है। बैंगलोर में ऐसी ही एक डॉक्टर हैं वैशाली पाई जो एक अक्यूपेशनल थेरेपिस्ट हैं और साथ ही स्पेशल नीड्स के बच्चों के लिए ‘तमहर’ नामक एक संस्था भी चलाती हैं। ‘तमहर’ कई ऐसे पैरेंट्स के लिए खुश होने की वजह बनकर आई है, जो अपने बच्चों के लिए एक ऐसी संस्था की तलाश में थे जहाँ स्पेशल नीड्स के बच्चों का खास ख्याल रखा जाता हो।

क्या है ‘तमहर’ और कैसे हुई शुरुआत

वैशाली पई पिछले करीब 24 सालों से बैंगलूर में रहती हैं और करीब दो दशक से भी अधिक समय से वो अक्यूपेशनल थेरेपिस्ट हैं। अपने करियर में उन्होंने कई अस्पतालों में अपनी सेवाएं दी और कई कॉपोरेट हॉस्पीटल में भी काम किया। लेकिन वैशाली के मन में स्पेशल नीड्स वाले बच्चों के लिए कुछ करने की इच्छा होती थी। 2009 के पहले तक ये इच्छा कब पूरी होगी इसका पता वैशाली को नहीं था...लेकिन उसी साल यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान वैशाली को स्पेशल नीड्स वालों बच्चों पर नए शोध और दुनिया भर में उनके लिए चल रही एक्टिविटी के बारे में पता चला। बस क्या था, वैशाली के मन में तो पहले से ही स्पेशल नीड्स वाले बच्चों के लिए कुछ करने की बात चल रही थी सो साल 2009 उन्होंने एक संस्था बनाकर इसे आगे बढ़ाने के बारे में सोचा और इस प्रकार ‘तमहर’ की स्थापना हुई। ‘तमहर’ की संस्थापक वैशाली ने हमें बताया कि यहां वो अपनी टीम के साथ स्पेशल नीड्स वाले बच्चों को सामान्य जीवन के लिए तैयार करती हैं।

क्या है ‘तमहर’ की विशेषता :

योर स्टोरी से बात करते हुए वैशाली कहती हैं कि ‘तमहर’ में आने वाले बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, स्पेक्ट्रम डिजऑर्डर, लाइसोसोमल स्टोरेज डिजऑर्डर के अलावे कई जेनेटिक डिजऑर्डर वाले बच्चे भी शामिल हैं। इन बच्चों में से कई तो शुरुआत में कुछ भी नहीं बोलते थे लेकिन अब वो धीरे-धीरे मम्मी-पापा या ऐसे ही कई शब्द और यहां तक कि वाक्य भी बोलते हैं। वैशाली के मुताबिक वो होलिस्टिक डेवल्पमेंटल इंटरवेंशन अप्रोच पर काम करती हैं और अक्यूफेशनल थिरेपी, स्पीच थिरेपी, किनेसियो टैपिंग मेथेडोलॉजी, फिजियोथिरेपी, म्यूजिक थिरेपी, योग, खेल, आर्ट एंड क्राफ्ट एंव डांस आदि के माध्यम स्पेशल नीड्स वाले बच्चों में बदलाव के लिए सकारात्मक पहल करती हैं।

 वैशाली के मुताबिक हर बच्चा दूसरे से अलग होता है सो यहां हरेक बच्चे के लिए अलग-अलग प्रोग्राम तैयार किया जाता है जिसकी जानकारी उनके पैरेंट्स को भी दी जाती है। आगे वैशाली कहती हैं कि हम ‘तमहर’ वक्त-वक्त पर पैरेंट्स सेशन आयोजित कर बच्चों के माता-पिता को उनके बच्चों के लिए तैयार किये गए प्रोग्राम से अवगत कराते हैं और उन्हें बच्चों को पार्टिसिपेट कराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इतना ही नहीं बच्चों में क्लासिकल म्यूजिक का इंटरेस्ट जगाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाती है। स्पेशल नीड्स के बच्चों पर दुनिया भर में हो रहे रिसर्च और नए-नए खोजों से वैशाली खुद को अपडेट रखती हैं जिससे वो अपने यहां आने वाले बच्चों का बेहद खास ख्याल रख सके। वैशाली के मुताबिक आज ‘तमहर’ के बच्चे कई प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं और जीतते भी हैं।

कहांँ-कहाँ है ‘तमहर’ की मौजूदगी :

अपने सात सालों के सफर में ‘तमहर’ ने अभी तक पांच सेंटर्स खोले हैं। अपने मुख्यालय बैंगलूर के मल्लेश्वरम के अलावे ‘तमहर’ का केंद्र कर्नाटक के दो और जगहों रायचुर और हुट्टी में संचालित हो रहा है। इसके अलावा राजस्थान के पाली जिले में भी ‘तमहर’ ने अपना केंद्र खोला है।

भविष्य की योजनाएं :

योर स्टोरी से बात करते हुए वैशाली कहती हैं कि स्पेशल नीड्स वाले बच्चों की जरुरत को देखते हुए हमें अभी और भी सेंटर्स खोलने हैं और मेरी योजना भी है कि ‘तमहर’ के और भी केंद्र संचालित हो सके ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को मैं ठीक कर सकूं। वैशाली कहती हैं खासकर पिछड़े इलाकों में जहां लोग आर्थिक रुप से पिछड़े हैं वहां स्पेशल नीड्स के बच्चों के लिए सुविधाओं का अभाव रहता है ऐसे में ज़रूरतमंद बच्चों के लिए वैशाली एक उम्मीद की किरण सी दिखती हैं। 

... नीरज सिंह