'hindilessions.co.in' के ज़रिए विदेशियों को ककहरा सीखा रही हैं पल्लवी

अब तक 150 विदेशियों की सीखा चुकी हैं हिंदीमुंबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में सीखा रही हैं हिंदीजैकलीन फर्नांडिस भी पल्लवी से सीख चुकी हैं हिंदी

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देश के 75 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलना जानते हैं, बावजूद इसके काफी लोग ऐसे हैं जो भले ही हिन्दी बोल लें, लेकिन उसे लिख नहीं सकते। सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को आती है जो भारत में लंबे वक्त तक रहने के लिए आते हैं और उनका हिन्दी से कोई वास्ता नहीं होता। हालांकि कई देशों में दूसरे देशों की भाषा सिखाई भी जाती है बावजूद इसके कई लोग हिंदी नहीं सीख पाते। देश में कन्नड, तमिल और दूसरी भारतीय भाषाओं को सीखाने के लिए कई संस्थान हैं लेकिन हिन्दी सिखाने के लिए मुश्किल से ही कोई तैयार होगा। पल्लवी सिंह जो इंजीनियर हैं और मनोविज्ञान की छात्रा रही हैं उन्होने फैसला लिया कि वो बदलाव लाकर रहेंगी और इसके लिए उन्होने hindilessions.co.in की शुरूआत की।

दिल्ली में पैदा हुई और यहीं बड़ी हुई पल्लवी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूनिकेशन में इंजीनियरिंग की। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होने महसूस किया कि टीयर 1 कॉलेज के छात्रों के पास ही आगे बढ़ने के अच्छे मौके होते हैं। फिर चाहे विदेशों में जाकर इंटर्नशिप करनी हो या बड़ी कंपनियों में काम करना हो। पल्लवी ने भी फैसला लिया कि वो सीधे बड़ी कंपनियों जैसे बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप, अर्न्स्ट एंड यंग में आवेदन करेंगी। लेकिन उनको यहां से निराशा ही हाथ लगी क्योंकि वो आईआईटी या एनआईटी की छात्र नहीं थी। पल्लवी जब कॉलेज के तीसरे साल में थी तब उन्होने हिन्दी पढ़ाने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होने सबसे पहले फेसबुक की मदद ली। उन्होने ऐसे ग्रुप की तलाश शुरू की जो निरंतर विदेशी छात्रों के सम्पर्क में रहते हैं। इसके साथ साथ उन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों से सम्पर्क किया।

पल्लवी की कोशिश रंग लाई और उनको पहले छात्र के तौर पर अफ्रीकी मूल के एक छात्र और उनकी दोस्त मिले। पल्लवी ने दोनों को हिन्दी पढ़ाने के लिए एक पाठ तैयार कर उनको हिन्दी सिखाना शुरू किया। जब इन लोगों ने हिन्दी सीख ली उसके बाद पल्लवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पल्लवी ने फैसला लिया कि वो मुंबई जाएंगी जहां पर वो मनोविज्ञान की पढ़ाई करेंगी। इसके लिए उन्होने अपने माता-पिता से पैसे भी नहीं लिये। मुंबई एक महंगा शहर है इसलिए उनके लिए अपनी रोज की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ काम करना जरूरी था। तब उन्होने तय किया कि वो एक बार फिर पढ़ाना शुरू करेंगी। इससे ना सिर्फ उनकी आमदनी होगी बल्कि विदेशी लोगों से मिलना जुलना भी बढ़ेगा। पल्लवी ने चार साल के दौरान 150 विदेशी नागरिकों को हिन्दी सिखाई और आज वो मुंबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में हिन्दी सिखा रही हैं।

पल्लवी का कहना है कि हिन्दी सीखाना भले ही आसान लगता हो लेकिन ये काफी मुश्किल काम है। ज्यादातर विदेशी लोगों को ये शिकायत रहती है कि भारत में हिन्दी सिखाने के लिए कोई उचित कोर्स नहीं है। इसके अलावा फीस को लेकर लोग मोलभाव करते हैं। पल्लवी बताती हैं कि एक बार उनकी एक छात्रा अमांडा जो लुइसियाना की रहने वाली हैं बांद्रा से ऑटो में कहीं जा रही थीं उसी दौरान बाइक सवार दो लोगों ने ऑटोवाले से कहीं का रास्ता पूछा तो वो खुद ही उनको हिन्दी में रास्ता बताने लगी। अमांडा की धारदार हिन्दी सुन दोनों बाइक सवार हक्के बक्के रह गये।

इसी तरह एक बार पल्लवी ने इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल को उनके जन्म दिन पर ऑनलाइन शुभकामनाएं दी। जिसके बाद वो पल्लवी के छात्र बन गए। इसके अलावा वो वॉलिवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को भी हिन्दी का पाठ पढ़ा चुकी हैं। अपने भविष्य के बारे में पल्लवी का कहना है कि उनकी योजना अपना एक स्कूल खोलने की है जहां पर विदेशी लोग हिन्दी सीख सकें।