'पद्मावती' का चरित्र काल्पनिक फिर इतनी महाभारत क्यों?

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मलिक मोहम्मद जायसी का 'पद्मावत' तो एक साहित्य का हिस्सा है। उसे इतिहास नहीं माना जा सकता है। अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर विजय हासिल करने के 250 वर्षों बाद मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' में रानी पद्मावती के किरदार का जिक्र मिलता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा है कि 'पद्मावती नाम का चरित्र काल्पनिक है। ऐसा कोई किरदार कभी इतिहास में दर्ज ही नहीं हुआ है। ये सब किस्से-कहानियों की तरह से दर्ज हैं।

जाने-माने फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल का कहना है कि धमकियों पर सरकार कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही है। लोग खुलेआम सिर काटने की बात करते हैं, उसके बदले पैसे का ऑफर दे रहे हैं। राजस्थान सरकार इस पर चुप है।

गोवा की राजधानी पणजी के पास डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में अड़तालीसवें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) का आगाज हो चुका है। इसमें फिल्मी सितारों और मशहूर हस्तियों के जमावड़े के बीच जाहिर है, सेंसर बोर्ड द्वारा लौटाई गई फिल्म 'पद्मावती' पर कानाफूसी भी हो रही है, जो सिर्फ इतना ही होकर रह जाए क्योंकि बॉलिवुड के कई बड़े नाम इसके सपॉर्ट में सामने नहीं आए हैं। इस बीच 'पद्मावती' पर देश के ख्यात इतिहासकारों के खोजपरक बयान सामने आने लगे हैं। मीडिया से बातचीत में इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा है कि 'पद्मावती नाम का चरित्र काल्पनिक है। ऐसा कोई किरदार कभी इतिहास में दर्ज ही नहीं हुआ है। ये सब किस्से-कहानियों की तरह से दर्ज हैं।

मलिक मोहम्मद जायसी का 'पद्मावत' तो एक साहित्य का हिस्सा है। उसे इतिहास नहीं माना जा सकता है। अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर विजय हासिल करने के 250 वर्षों बाद मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' में रानी पद्मावती के किरदार का जिक्र मिलता है। अगर ऐसा कुछ था तो सरकारी इतिहासकार शयामल दास ने कभी पद्मावती का जिक्र क्यों नहीं किया है क्यों उन्होंने भी जायसी के पद्मावत का ही जिक्र किया है।' इसी तरह इतिहासकार के शिक्षक लोकेश सिंह चुंडावत का कहना है - 'मुस्लिम इतिहासकार पद्मावती को काल्पनिक मानते हैं, जबकि पद्मावती के होने के कई प्रमाण मौजूद हैं। इतना फर्क जरूर है कि उन रानी का नाम पद्मावती नहीं पदमिनी था लेकिन ये बात सरासर गलत है कि खिलजी ने पद्मिनि को हासिल करने के लिए मेवाड़ पर हमला किया था। पद्मिनी को शीशे में देखने का किस्सा भी झूठ का एक हिस्सा है। 1303 में शक्ल देखने वाला शीशा था ही नहीं। शीशा तो 1710 में महाराणा संग्राम सिंह द्वीतीय बेल्जियम से लेकर आए थे। साथ ही ये बात भी साफ है कि खिलजी कभी किले में दाखिल हो ही नहीं पाया था।

इस बीच गौरतलब होगा कि गोवा में फिल्म महोत्सव का उद्घाटन करने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी 'पद्मावती' विवाद पर अभी तक जुबान नहीं खोली है। सलमान खान तो खैर समापन समारोह के दौरान पहुंचेंगे। आयोजन फिल्म महोत्सव के निदेशक और गोवा सरकार की मनोरंजन समिति संयुक्त रूप से कर रहे हैं। समारोह में भारतीय फिल्मों के मेगास्टार अमिताभ बच्चन को भारतीय फिल्म पर्सनालिटी ऑफ द ईयर और कनाडा के डायरेक्टर एटम इगोयन को लाइफटाइम एचिवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि विवाद, विरोध और धमकियों के बीच फंसी फिल्म 'पद्मावती' को निर्माताओं ने अब एक दिसंबर को रिलीज नहीं करने का फैसला किया है। फिल्म निर्माता कंपनी वायकॉम18 के प्रवक्ता का कहना है कि रिलीज स्वेच्छा से टाली है। नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। वह देश के कानून और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) जैसी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं। उम्मीद है कि फिल्म रिलीज करने के लिए जल्द ही जरूरी मंजूरियां मिल जाएंगी। कंपनी का दावा है कि उनकी फिल्म में राजपूतों की वीरता, परंपरा और मर्यादाएं बेहतर तरीके से दिखाई गई हैं। उधर, हरियाणा भाजपा के चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर सूरजपाल अम्मू ने दीपिका और भंसाली का सिर काटने पर 10 करोड़ देने का ऐलान किया है। आरोप हैं कि पद्मावती फिल्म के माध्यम से डायरेक्टर संजय लीला भंसाली व अभिनेत्री दीपिका पादुकोण देश की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं, जिससे अशांति पैदा हो गई है। पद्मावती फिल्म में देवी रूप पदमनी उर्फ पद्मावती का गलत चित्रण किया जा रहा है, जिससे लाखों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

जाने-माने फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल का कहना है कि धमकियों पर सरकार कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही है। लोग खुलेआम सिर काटने की बात करते हैं, उसके बदले पैसे का ऑफर दे रहे हैं। राजस्थान सरकार इस पर चुप है। धमकियां देने वालों में करणी सेना के लोग ही नहीं, कई राज्यों में भाजपा के जिम्मेदार पदाधिकारी भी हैं। इस बीच उल्लेखनीय है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को चिट्ठी लिख कर कहा है कि फिल्म में जब तक जरूरी बदलाव न हो, तब तक इसे रिलीज नही किया जाना चाहिए। इस पर इतिहासकारों, जाने माने बुद्धिजीवियों से मंत्रणा होनी चाहिए।

इस बीच केंद्रीय मंत्री थंवर सिंह गहलोत ने सेंसर बोर्ड को फिल्म से आपत्तिजनक दृश्य हटाने की नसीहत दी है। सबसे ज्यादा इस वक्त निर्माता संजय लीला भंसाली मुश्किलों में फंसे हैं। एक ओर बॉलिवुड के कुछ लोग 'पद्मावती' का समर्थन कर रहे हैं तो इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाले बड़े लोगों ने इस मामले को लेकर चुप्पी साध रखी है। अमिताभ बच्चन ने कोई ट्वीट नहीं किया है। आमिर खान और शाहरुख खान भी चुप हैं। उधर, 'पद्मावती' की लीड ऐक्ट्रेस दीपिका पादुकोण फिल्म के समर्थन में लगातार मीडिया के सामने आ रही हैं जबकि अभिनेता रणवीर सिंह और शाहिद कपूर खामोश हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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