16 साल की लड़की ने दी कैंसर को मात, एक पैर के सहारे किया स्टेज पर डांस

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कोलकाता की रहने वाली अंजलि रॉय को डांस का बेहद शौक था। वह डांस सीखना चाहती थी और बड़े स्टेजिस पर परफॉर्म भी करना चाहती थी, लेकिन हालात ने उससे उसका यह हुनर छीनने की पूरी कोशिश की...

एक पैर पर फरफॉर्म करती अंजलि
एक पैर पर फरफॉर्म करती अंजलि
सर्जरी के बाद आराम करते हुए अंजलि को डॉक्टरों ने 'नाचे मयूरी' दिखाई। फिल्म 'नाचे मयूरी' में अंजलि ने सुधा चंद्रन का डांस देखा। तेलुगू ऐक्ट्रेस सुधा चंद्रन ने एक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था। जिसके बाद उन्होंने सिर्फ एक पैर सहारे डांस परफॉर्म किया।

कोलकाता की रहने वाली अंजलि रॉय को डांस का बेहद शौक था। वह डांस सीखना चाहती थी और बड़े स्टेजों पर परफॉर्म करना चाहती थी। लेकिन हालात ने उससे उसका यह हुनर छीनने की पूरी कोशिश की। अंजलि सिर्फ 11 साल की थीं जब उन्हें पता चला कि वह ऑस्टियोसैरकोमा बीमारी से पीड़ित हैं। यह एक तरह का बोन कैंसर होता है। यह 2013 की बात है अंजलि के बाएं घुटने में घातक कैंसर की पहचान हुई। डॉक्टरों ने कहा कि उनका पैर काटकर निकालना होगा। एक छोटी सी बच्ची के लिए जिंदगी का इतना बड़ा दुख सहना कैसा हो सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। लेकिन अंजलि ने इस मुश्किल हालात का बहादुरी के साथ सामना किया।

सरोज गुप्ता कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शोमा डे ने बताया कि अंजलि बहुत बहादुर लड़की है। उन्होंने कहा, 'हमने सर्जरी के पहले अंजलि और उसके माता-पिता से बात की। हम उसे बताते रहे कि सब कुछ नहीं खोया है।' सर्जरी के बाद आराम करते हुए अंजलि को डॉक्टरों ने 'नाचे मयूरी' दिखाई। फिल्म 'नाचे मयूरी' में अंजलि ने सुधा चंद्रन का डांस देखा। तेलुगू ऐक्ट्रेस सुधा चंद्रन ने एक हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था। जिसके बाद उन्होंने सिर्फ एक पैर सहारे डांस परफॉर्म किया।

नाचे मयूरी सुधा चंद्रन की जिंदगी पर बनी फिल्म थी। उस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे वह उस हादसे से बाहर निकलीं और कृत्रिम पैरों के सहारे फिर से अपना डांस शुरू किया। सुधा से प्रेरणा लेते हुए कैंसर सर्जरी के एक साल बाद अंजलि ने अपने घुंघरू उठाए और डांस की प्रैक्टिस शुरू कर दी। अंजलि के पिता कपड़ों की फैक्ट्री में काम करते हैं। उन्होंने अपनी बेटी की ख्वाहिश को पूरा करने में पूरी मदद की। उन्होंने अपनी पत्नी रीता के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि अंजलि स्कूल भी जाएगी और डांस भी करेगी।

लेकिन अंजलि को डांस स्कूल तक ले जाना और वहां से लाना आसान नहीं था। इसलिए डांस टीचर को घर में ही ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की गई। अंजलि ने अच्छे से डांस की ट्रेनिंग लेने के बाद इस साल पोइला बैशाख (पहले वैशाख) के मौके पर टैगोर के क्लासिक गाने 'मोर बीना उठे कोन शुरे बाजी' पर भरी महफिल में डांस किया। इस प्रोग्राम का आयोजन साउथ पॉइंट एक्स स्टूडेंट असोसिएशन (SPESA) द्वारा किया गया था। अंजलि अब 16 साल की हो गई है। इस डांस परफॉर्मेंस में उसे डॉ. अर्नब सेनगुप्ता का साथ मिला। जिन्होंने वोकल के सहारे अंजलि का साथ दिया।

SPESA के वाइस प्रेसिडेंट संदीप रॉयचौधरी ने कहा कि वह सब अंजलि के साहस को देख अंचभित थे। उन्होंने कहा कि वह सब मिलकर अंजलि को डांस में ही करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। अंजलि की मदद करने के लिए कई सारे संगठन भी आगे आए। उन्होंने अंजलि के डांस को आसान बनाने के लिए प्रॉस्थेटिक पैर भी ऑफर किए। अंजलि की फैमिली आर्थिक रूप से सशक्त नहीं है। अंजलि अभी सुभासग्राम नबात्रा विद्यालय में 8वीं क्लास में पढ़ती है।

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