स्कूल छोड़कर दिहाड़ी मजदूरी करने वाला अर्जुन सोलंकी आज खुद के काम से कमा रहा लाखों

जो था कभी दिहाड़ी मजदूर वो आज पेंटिंग से कमा रहा है लाखों...

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 अर्जुन के पिता को शराब की लत थी इसलिए उनकी तबीयत खराब होती रहती थी और आए दिन घर में झगड़े भी होते रहते थे। हालांकि अर्जुन की मां कड़ी मेहनत से कुछ पैसे जुटाने की कोशिश करती थीं लेकिन वह दो बच्चों की परवरिश करने के लिए नाकाफी होता था। 

अर्जुन सोलंकी और उसका परिवार
अर्जुन सोलंकी और उसका परिवार
आज अर्जुन लाखों रुपये के पेंटिंग के ठेके लेता है और अपने परिवार को अच्छे से पाल रहा है। इतना ही नहीं वह अपनी कमाई का एक हिस्सा गावं के गरीब बच्चों की पढ़ाई पर भी लगाता है। वह बच्चों की फीस खुद ही भरता है। 

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एक गांव में रहने वाले अर्जुन सोलंकी की उम्र उस वक्त सिर्फ 14 साल थी जब उसके पिता का देहांत हो गया। उनकी मां ने किसी तरह अपने दो बेटों का पालन पोषण किया। लेकिन पैसों के आभाव में अर्जुन की पढ़ाई नहीं हो पाई और उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह भी घर का खर्च चलाने के लिए काम करने लगा। घर में अपनी मां और भाई को मिलाकर कुल तीन लोगों का पेट भरना ही अर्जुन का मकसद था। लेकिन वक्त ने करवट बदली और आज अर्जुन लाखों रुपये का कारोबार करने लगा है। उसे ICICI बैंक की तरफ से स्किल ट्रेनिंग मिली थी।

अर्जुन का परिवार इंदौर के पास बरोडा सिंधी गांव में रहता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उसके माता-पिता दोनों दिहाड़ी मजदूर थे। इसलिए बड़ी मुश्किल से ही परिवार का गुजारा होता था। अर्जुन के पिता को शराब की लत थी इसलिए उनकी तबीयत खराब होती रहती थी और आए दिन घर में झगड़े भी होते रहते थे। हालांकि अर्जुन की मां कड़ी मेहनत से कुछ पैसे जुटाने की कोशिश करती थीं लेकिन वह दो बच्चों की परवरिश करने के लिए नाकाफी होता था। इसके बाद अर्जुन और उसके बड़े भाई ने पढ़ाई छोड़कर काम करना शुरू कर दिया। इसी दौरान उन्हें ICICI बैंक की ओर से पेंट एप्लिकेशन टेक्निक का फ्री में कोर्स करने का मौका मिला।

दोनों भाईयों के लिए अपना काम छोड़कर यह कोर्स करना आसान नहीं था क्योंकि वही उनकी आय का एकमात्र जरिया था। लेकिन उनकी मदद की गई और वे कोर्स करने में कामयाब रहे। अर्जुन ने बताया, 'मुझे कई तरह के पेंट्स के बारे में जानने और सीखने को मिला। इसके अलावा मैंने फाइनैंस और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और कम्यूनिकेशन की भी बुनियादी शिक्षा ली।' इसके बाद दोनों भाइयों के सपनों को तो जैसे पंख लग गए। कोर्स खत्म होने के बाद उन्होंने कुछ दिन पेंटिंग करने के क्षेत्र में ही नौकरी की फिर उसके बाद उन्होंने खुद ही पेंटिंग का ठेका लेना शुरू कर दिया।

आज अर्जुन लाखों रुपये के पेंटिंग के ठेके लेता है और अपने परिवार को अच्छे से पाल रहा है। इतना ही नहीं वह अपनी कमाई का एक हिस्सा गावं के गरीब बच्चों की पढ़ाई पर भी लगाता है। वह बच्चों की फीस खुद ही भरता है। पिछले लगभग दो दशक में ICICI बैंक ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व के तहत लाखों प्रतिभाओं को उनके सपनों को साकार बनाने में मदद की है। इसमें महिला सशक्तिकरण, स्किल डिवेलपमेंट, डिजिटल विलेज, क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया जैसे अभियान शामिल हैं।

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