सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिला आईएएस के.बी. वत्सला

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केरल सरकार की सहमति के बावजूद सबरीमाला मंदिर में आज भी महिलाओं को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है लेकिन हाईकोर्ट से आदेश प्राप्त कर केरल की ही एक महिला आईएएस के.बी. वत्सला वर्ष 1995 में इस मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने के साथ ही, भगवान अयप्पा की पूजा भी कर चुकी हैं।

केबी वत्सला
केबी वत्सला
केरल में अठारह पहाड़ियों के बीच स्थित सबरीमाला मंदिर की गणना भारत के विश्व-प्रसिद्ध मंदिरों में है। कंब रामायण, महाभारत के अष्टम स्कंध और स्कंद पुराण के असुर-कांड में जिस शिशु 'शास्ता' का जिक्र है, अयप्पन उसी के अवतार माने जाते हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आज तक केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश नहीं मिला है। पिछले दिनो भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सामाजिक कार्यकर्ता रेहाना फातिमा ने एक पत्रकार महिला के साथ मंदिर में दाखिल होने की कोशिश की तो पुजारियों, प्रदर्शनकारियों ने गर्भगृह से मात्र अठारह सीढ़ी दूर दोनों को बैरंग लौटा दिया। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने रेहाना के घर पहुंच कर तोड़-फोड़ की। जब कुछ महिलाएं सबरीमाला पहाड़ी पर चढ़ने लगीं तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें भी लौटने पर मजबूर कर दिया लेकिन यह बहुतों को ज्ञात नहीं होगा कि केरल की ही एक ऐसी आईएएस रही हैं, जिन्हे एक पहली और आखिरी महिला के रूप में इस मंदिर में जाने का अवसर मिल चुका है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आज भी लगातार तनाव बना हुआ है।

आज, जबकि महिलाएं स्वयं माता-पिता के क्रियाकर्म, श्राद्ध-तर्पण तक कर रही हैं, घोड़ी पर चढ़कर शादियां रचा रही हैं, वही सबरीमाला मंदिर में उनको प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में धर्म विभाग की प्रोफेसर वसुधा नारायणन अपने लेख 'जेंडर ऐंड प्रीस्टहुड इन द हिंदू ट्रेडिशन' में कहती हैं- 'मैं 1975 में जब हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल में अध्ययन के लिए आई थी तो कुछ छात्राओं ने मुझसे पूछा कि क्या हिंदू धर्म में महिलाएं भी पुरोहित बन सकती हैं?' वह सवाल आज चार दशक बाद भी प्रासंगिक बना हुआ है। किसी हिंदू महिला के पुरोहित होने का विचार आज भी कुछ लोगों को बेतुका लगता है। महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में कई संस्थान महिलाओं को हिंदू पुरोहित बनने के लिए प्रशिक्षण देकर एक दूरगामी पहल जरूर कर रहे हैं। वडोदरा के वस्त्र सलाहकार गिरीश जोशी अपनी शादी के विधि-विधान में महिला पुरोहितों को शरीक कर चुके हैं।

केरल में अठारह पहाड़ियों के बीच स्थित सबरीमाला मंदिर की गणना भारत के विश्व-प्रसिद्ध मंदिरों में है। कंब रामायण, महाभारत के अष्टम स्कंध और स्कंद पुराण के असुर-कांड में जिस शिशु 'शास्ता' का जिक्र है, अयप्पन उसी के अवतार माने जाते हैं। सबरीमाला में अयप्पन का मशहूर मंदिर पूणकवन के नाम से विख्यात है। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं। माना जाता है कि परशुराम ने अयप्पन पूजा के लिए सबरीमला में मूर्ति स्थापित की थी। मंदिर में अयप्पन के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे उप देवताओं की भी मूर्तियां हैं। कुछ लोग इसे शबरी से भी जोड़कर देखते हैं। सवाल उठता है कि जिस मंदिर का नाम शबरी से जुड़ा हो, वहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित क्यों होना चाहिए? यहां प्रायः रोजाना ही हजारों दर्शनर्थी पहुंचते हैं, जिनमें बाल-वृद्ध, युवा, सभी होते हैं, लेकिन उनमें महिलाएं नहीं होती हैं।

यहां दो प्रमुख उत्सव होते हैं। मकर संक्रांति और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के संयोग के दिन। पंचमी तिथि और वृश्चिक लग्न के संयोग के समय अयप्पन का जन्मदिवस मनाया जाता है। उत्सव के दौरान अयप्पन का घी से अभिषेक किया जाता है। मंत्रों का जोर-जोर से उच्चारण होता है। परिसर के एक कोने में सजे-धजे हाथी दिखते हैं तो पूजा के बाद चावल, गुड़ और घी से बना प्रसाद 'अरावणा' बांटा जाता है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि शुद्धता बनाए रखने के लिए 10 से 50 आयुवर्ग की रजस्वला स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है। बराबरी की मांग को लेकर देश-दुनिया में उठ रही आवाजों का भी उन पर कोई असर नहीं। वोट की राजनीति के कारण राष्ट्रीय पार्टियों के कार्यकर्ता, नेता भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए चुपचाप मंदिर प्रबंधन के साथ हो लिए हैं। यद्यपि यहां प्रवेशार्थियों के लिए न तो जात-पांत का कोई बंधन है, न अमीर-गरीब का, वर्जना है तो सिर्फ, और सिर्फ महिलाओं के लिए।

मंदिर में पहली और अब तक आखिरी बार किसी महिला के मंदिर में प्रवेश का वाकया वर्ष 1994-95 का है। उस समय केरल के उस जिला पथानमथिट्टा की कलेक्टर हुआ करती थीं के.बी.वत्सला, जिस जनपद-क्षेत्र में सबरीमाला मंदिर आता है। उस समय वत्सला की उम्र 41 वर्ष थी। यह तो विधि-सम्मत है कि किसी भी तरह की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कलेक्टर अपने जिले के किसी भी स्थान का निरीक्षण कर सकता है। सबरीमाला मंदिर परिक्षेत्र में तमाम सरकारी विभाग भी सक्रिय हैं। वहां की देख-रेख, व्यवस्थाओं के लिए जिला कलेक्टर की भी जिम्मेदारियां रहती हैं। जब कलेक्टर वत्सला ने एक दिन अचानक सबरीमाला मंदिर के भीतर की व्यवस्थाओं का सरकारी दौरे पर जायजा लेना चाहा तो वहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने के नाते उनको कानून का सहारा लेना पड़ा। जैसे ही उनके मंदिर जाने की सूचना फैली, विरोध शुरू हो गया। इसके बाद कलेक्टर ने मंदिर में प्रवेश के लिए केरल हाईकोर्ट से आदेश प्राप्त किया।

हाईकोर्ट का निर्देश रहा कि कलेक्टर के.बी. वत्सला मंदिर में ऑफिशियल ड्यूटी के तहत प्रविष्ट होंगी, न कि एक महिला श्रद्धालु के रूप में। यहां तक कि कलेक्टर को मंदिर में स्थित अठारहवीं सोने की सीढ़ी (पथीनेट्टम पदी) चढ़ने से हाईकोर्ट ने मना किया। इसी सीढ़ी के रास्ते मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया जाता है। बाद में कलेक्टर के.बी. वत्सला ने पत्रकारों से बातचीत में हाईकोर्ट के आदेश का शुक्रिया अदा करते हुए बताया था कि वह मंदिर की 18वीं सोने की सीढ़ी (पथीनेट्टम पदी) चढ़ चुकी हैं और भगवान अयप्पा की पूजा भी कर चुकी हैं। उन्होंने सबरीमाला मंदिर के आसपास जल निकासी सिस्टम ठीक कराने के साथ ही निकटवर्ती पंबा नदी को भी साफ करा दिया है। मंदिर के रास्तों पर पेय जल के इंतजाम दुरुस्त करा दिए गए हैं। मंदिर में प्रवेश करने के बाद वत्सला को भी धमकियों और उलाहनों का सामना करना पड़ा। इस समय वह रिटायर हो चुकी हैं।

केरल राज्य के साथ नौकरशाही के और भी तरह के गौरतलब संयोग जुड़े हैं। मसलन, भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना राजाम मल्होत्रा भी केरल की ही रहने वाली थीं। उनका जन्म 17 जुलाई, 1927 को केरल के एक गांव में हुआ था। केरल की ही 2010 बैच में भारत में चौथे रैंक की महिला आईएस अधिकारी टीवी अनुपमा का नाम सुनते ही मिलावटखोरों में अफरातफरी मच जाती है। डेढ़ साल के भीतर उन्होंने साढ़े सात सौ मिलावटखोरों पर मुकदमा दर्ज करा दिया। जब अगस्त 2017 में अनुपमा की पोस्टिंग अलाप्पुझा में हुई तो किसी ने यह उम्मीद भी नहीं की थी कि एक महिला अफसर के कारण केरल के सबसे अमीर मंत्री थॉमस चांडी को इस्तीफ़ा देना पड़ेगा।

मंत्री चांडी पर जमीन कब्जा कर रिसॉर्ट बनाने का आरोप था। इसी तरह का एक और सुखद संयोग केरल के साथ जुड़ा है। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2016 में 124वीं रैंक लाकर देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस बनने वाली प्रांजल पाटिल की सहायक कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग एर्नाकुलम (केरल) में ही हुई। केरल कैडर की ही आईएएस अधिकारी अरुणा सुंदरराजन की राज्य में ई-गवर्नेंस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्हें एक व्यावसायी की तरह सोचने वाली आईएएस अधिकारी कहा जाता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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