'आकांक्षा' में कोचिंग: अब ऑटो-चालक की बेटी भी बनेगी इंजीनियर

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है...

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर ग्राम सेरों के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली दीपा वारे को पता ही नहीं था कि आईआईटी क्या होता है? बी. टेक किस चिड़िया का नाम है? वह तो बस पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी करने के सपने देख रही थी। एक दिन उसे 'आकांक्षा' योजना के बारे में पता चला। फिर उम्मीद जागी। आज वह हॉस्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही है।

आकांक्षा कोचिंग में पढ़ती छात्राएं
आकांक्षा कोचिंग में पढ़ती छात्राएं
आकांक्षा योजना के तहत ऐसे ही होनहार छात्रों का चयन किया गया है। कोटा के मोशन एजुकेशन एकेडमी के आईआईटीअन्स या अनुभवी लेक्चरर उनके हुनर को निखार रहे हैं।

दीपा के पिता रवि कुमार वारे ऑटो चालक हैं। रोज की आमदनी से घर चल जाता है। परिवार का खर्च अलग। बड़ा भाई बिलासपुर में बी. एससी फाइनल की पढ़ाई कर रहा और दीदी रायगढ़ के कॉलेज में बीएससी सेकंड ईयर की स्टूडेंट है। जब 10वीं का रिजल्ट आया तो दीपा की खुशी का ठिकाना न रहा। उसे 89% अंक मिले थे। माता ओम बाई ने आरती उतारी। परिवार में खूब वाहवाही हुई। बड़ों का आशीर्वाद मिला। सहेलियों ने बधाई दी। यहां तक तो सबकुछ ठीक था, लेकिन अच्छे रिजल्ट के साथ बेहतर भविष्य के लिए विकल्प की तलाश शुरू हुई। उसने सोचा गणित लेकर 11वीं की पढ़ाई करुंगी। स्कॉलरशिप मिलने लगेगी। ग्रेजुएशन करुंगी। सरकारी नौकरी लग जाएगी। बस इतना ही। इसके आगे वह कुछ जानती भी नहीं थी। फिर जब 'आकांक्षा' योजना के तहत होनहार बच्चों के फ्री कोचिंग का पता चला तो उम्मीद की किरण नजर आई।

दीपा ने अपने परिवार को इस योजना के बारे में बताया। माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने फौरन हामी भरी। आज दीपा हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही है और उसे उम्मीद है कि वह अच्छे कॉलेज से इंजीनियरिंग करेगी। दीपा ने बताया कि आकांक्षा योजना के तहत आर्थिक तंगी से जूझ रहे होनहार बच्चों को सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। फ्री कोचिंग के अलावा हॉस्टल की सुविधा है। लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग। केवल यही नहीं सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। हॉस्टल में हर दिन का अलग मीनू है। यहां हर विषय के विशेषज्ञ हैं। पूरी दिनचर्या शेड्यूल्ड है। सप्ताह में छह दिन तक कड़ी मेहनत करते हैं और सातवें दिन रविवार को परिवार मिलने आता है। सोमवार से फिर वही दिनचर्या शुरू हो जाती है।

'आकांक्षा' कोचिंग सेंटर में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों के कई ऐसे स्टूडेंट्स हैं, जिनके आर्थिक हालात उनकी उच्च शिक्षा में बाधक है। आकांक्षा योजना के तहत ऐसे ही होनहार छात्रों का चयन किया गया है। कोटा के मोशन एजुकेशन एकेडमी के आईआईटीअन्स या अनुभवी लेक्चरर उनके हुनर को निखार रहे हैं। बताया गया कि पढ़ाई के बाद समय-समय पर उनका टेस्ट लिया जाता है, जिसके प्रश्नपत्र कोटा से आते हैं। शिक्षकों का कहना है कि जांजगीर-चांपा की इस कोचिंग में कोटा के स्तर की पढ़ाई हो रही है। उम्मीद है कि इस बार ज्यादा से ज्यादा छात्रों का चयन इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों में होगा।

जिले में 286 हाई स्कूल हैं। यहां से बड़ी संख्या में बच्चे 90 प्लस अंकों के साथ परीक्षा पास करते हैं, पर सब बेहतर शिक्षा के लिए बाहर नहीं जा सकते। इसलिए इस साल से जिला प्रशासन ने एसे बच्चों को निशुल्क काेचिंग देने की योजना शुरू की है, जिसे 'आकांक्षा' नाम दिया गया है। इसके लिए ऑल इंडिया लेवल से शिक्षकों का आवेदन मंगाया गया था। पहले चरण में 50 बच्चों को प्रवेश गया, जिसमें अभी तक 88 प्रतिशत कट ऑफ मार्क्स गया था। कलेक्टर नीरज कुमार बनसोड़ के निर्देश में 'आकांक्षा परियोजना' के तहत मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं के लिए निशुल्क आवासीय कोचिंग प्रारंभ की गई है।

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