छोटे-छोटे परिवर्तन समय के साथ एक महत्वपूर्ण प्रभाव लाते हैं……

“हमें अभी भी लैंगिक समानता को प्राप्त करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है. सुषमा बर्लिया इस दिशा में महिलाओं को कार्यस्थल पर अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रयास कर रही हैं”

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सुषमा एपीजे सत्या समूह की अध्यक्ष हैं, इस समूह का औषधि एवं रसायन, अचल संपत्ति और विकास, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वितरण, वित्तीय निवेश और सेवाओं के साथ और कई उभरते व्यापार जैसे कि सूचना प्रौद्योगिकी और प्रकाशन और मीडिया के क्षेत्र में 7,500 करोड़ रुपए के अंतरराष्ट्रीय कारोबार है.

कार्यस्थल पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, सुषमा एक समय में एक बदलाव ही करती है, उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें सलाह देना. "छोटे परिवर्तन भी कुछ समय बाद एक बड़ा प्रभाव डालते हैं. अगर कोई घर पर प्रतिबद्धताओं की वजह से पूरा समय काम नहीं कर सकता है तो, हम उसे अंशकालिक काम, लचीला कार्य समय या घर से काम करने के अवसर देकर मदद करते हैं. हमारा उद्देश्य आत्मनिर्भर बनने में किसी भी संभव तरीके से उन्हें मदद करना है.”

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से "प्रकांड व्यवसायी पुरस्कार "प्राप्त करते हुए सुषमा बर्लिया
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से "प्रकांड व्यवसायी पुरस्कार "प्राप्त करते हुए सुषमा बर्लिया

उनके प्रयासों को अभिस्वीकृति देने के लिए उन्हें 1995 में कोपेनहेगन (डेनमार्क) में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के विश्व सामाजिक शिखर सम्मेलन में 'कार्य-स्थल पर महिलाओं की भूमिका' पर मुख्य भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था.

सौभाग्य से, उन्हें अपने बचपन में किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. जब वह बच्ची थी, तब उनके पिता स्कूल के बाद अक्सर उन्हें अपने दफ्तर ले जाया करते थे. और वहीँ से उन्होंने व्यापार के बारे में जानना शुरू कर दिया.

सुषमा कहती हैं, उनके पिता उनके सबसे बड़े संरक्षक हैं. "मेरे पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे. वह हमेशा दूसरों के लिए और अधिक करने और लोगों की जितना संभव हो मदद करने के लिए हमें प्रोत्साहित करते थे. उनका शिक्षा और सीखने पर बहुत जोर रहता था. वह अक्सर कहा करते थे, 'व्यवसाय सभी के लिए धन उत्पन्न करने की प्रक्रिया है'," सुषमा कहती हैं.

सुषमा अपने बचपन की एक घटना याद करती हैं, जिसका कि उन पर गहरा प्रभाव पड़ा. "यह 1971 के युद्ध के दौरान की बात है. जब एक बार हम कोलकाता से अपनी कार में यात्रा कर रहे थे, अचानक हमारे आस-पास बमबारी होने लगी. हमें समझ में ही नहीं आया कि ये क्या हो रहा था. हम सब अपनी कार से बाहर आ गए और सुरक्षित आश्रय ढूंढने लगे. मैं बहुत डर गयी थी और मुझे लग रहा था कि हम सब मारे जायेंगें. तभी मेरे पिता ने मेरी तरफ देखा और कहा, 'हम सभी को एक दिन मरना है, और तुम्हे मौत की आशंका से हजार बार मरने की जरूरत नहीं है.'"

उनके पिता हमेशा उन्हें और उनके भाई बहनों को कुछ अलग करने की कोशिश और असफलता से नहीं डरने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे. सुषमा बताती हैं कि उन को हमेशा अपने माता-पिता को निराश करने और उनकी वजह से नीचे देखने का भय सताता था, जिसने उन्हें, उनके जीवन की सभी गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित भी किया. " एक बार मेरे एक विषय में थोड़ा कम अंक आये और मुझे पिताजी को अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाने में का बहुत डर लग रहा था.लेकिन किसी तरह उन्हें इसका आभास हो गया और उन्होंने कहा ठीक है, कोई बात नहीं. उन्होंने कभी मुझ पर दबाव नहीं डाला. "सुषमा कहती हैं.

सुषमा ने 1981 में शादी कर ली."मैं जब अपने पति के कार्यालय में गयी तो मैंने देखा कि वहाँ एक भी महिला नहीं थी. जिस परिवार में मेरी शादी हुयी थी, वह परिवार महिलाओं के काम करने के पक्ष में नहीं था. मेरे पति, विजय भी, शुरू में बहुत उत्साहित नहीं करते थे. लेकिन मेरी सासू माँ पूरी तरह से महिलाओं के काम करने के पक्ष में थी. और उनका विश्वास था कि अगर आप एक शिक्षित महिला से शादी करते है, तो समृद्ध और विकास करने के लिए उसे एक मंच दीजिये,आप उसे घर पर बैठे रहने के लिए नहीं कह सकते.”

वह अपने परिवार से कार्यालय जाने वाली पहली महिला बन गयी. "जब मैंने काम करना शुरू किया तब हमारा व्यापार बहुत अच्छा नहीं चल रहा था. मैं ने व्यापार की बारीकियों को सीखने का फैसला किया. सबसे बड़ी चीजों में से एक जो मैंने सीखा वह था कि आप सब कुछ जानते हैं यह दिखावा करने से हमेशा बेहतर है कि आप दूसरों से मदद लें,” उनका कहना है.

हालात कठिन थे, आप को घर और कार्यालय की प्राथमिकताओं को तय करना था, "अक्सर बैठकों के बीच के समय का इस्तेमाल मैं में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए किया करती थी. और कई बार उनका होमवर्क भी मैंने बोर्डरूम में ही करवाया. जीवन के किसी भी क्षेत्र में, कोई यात्रा आसान कभी नहीं होती है. वहाँ कठिनाइयों और प्रतिफल दोनों हो सकते हैं, और यह कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता है.”

सुषमा अपने तीन महत्वपूर्ण सबक हमसे साझा करती हैं :

1) अपने आप पर विश्वास रखें हैं और अपने दिल की सुने.

2) पैसे के लिए स्वयं को संचालित मत होने दें, एक विचार और एक व्यापार मॉडल स्थापित करें, पैसा अपने आप आ जायेगा.

3) कठिन समय कभी भी बहुत दिनों तक नहीं रहता. लेकिन जो लोग असफल हो जाते हैं, वो जल्दी हार मान लेते हैं.