पिता की मौत के सदमे से उबरकर वाणी भाटिया ने उद्यमिता में पाया नया मुकाम

17 वर्ष की उम्र में पिता को खोने के बाद हिम्मत नहीं हारी और माँ को पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिये किया प्रेरित...फैशन के क्षेत्र मेे परस्नातक करने के दौरान ही प्रतिभा दिखाते हुए संस्थान की ‘सबसे क्रिएटिव डिजाइनर‘ बनने में हुई थीं कामयाब...कोर्स पूरा करने के बाद ई-काॅमर्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए की फैशन पोर्टल Gritstones.com की स्थापना...वर्तमान में उनके परिधानों के दो ब्रांड Gritstones और Vvoguish बाजार में उपभोक्ताओं के लिये हैं उपलब्ध...

0

मात्र 17 वर्ष की उम्र में अपने सिर पर से पिता का साया हमेशा के लिये उठ जाने के बाद वाणी भाटिया ने खुद को अपनी माँ जिन्हें पारिवारिक व्यापार के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और एक 13 वर्षीय किशोर भाई के साथ एक छोटी सी उम्र में बेहद कड़े व्यक्तिगत संकटों से घिरा हुआ पाया।

उस समय उन्हें यह समझ में आया कि उन्हें अपनी माँ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की आवश्यकता होगी। और उसके बाद वे अपने पिता के व्यवसाय दोबारा खड़ा करने में अपनी माँ का प्रोत्साहन और समर्थन कर रही थीं। हालांकि अबतक घर का कामकाज संभालती आ रही उनकी माँ के लिये 42 वर्ष की उम्र में आकर पारिवारिक व्यापार में सामंजस्य बैठाना काफी मुश्किल साबित हो रहा था लेकिन शुरूआती चुनौतियों से पार पाते हुए वाणी की माँ धीरे-धीरे व्यापार की बारीकियों से दो-चार हो गईं।

यह समय वाणी के जीवन का सबसे अधिक महत्वपूर्ण समय था क्योंकि उसी दौरान उन्हें लोगों के बारे में सीखने के अलावा संकट के समय में उनके द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रियाओं को भी जानने का मौका मिला।

एक लोकप्रिय फैशन पोर्टल की Gritstones.com की संस्थापक वाणी कहती हैं, ‘‘हम अपने अच्छे समय से कभी भी कुछ सीखने में सफल नहीं होते हैं लेकिन जीवन में आया हुआ बुरा समय हमें बहुत कुछ सिखा देता है। निश्चित रूप से यह परीक्षा की घड़ी थी जिसमें मैं बहुत कुछ सीखने में सफल रही।’’

एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी और दिल्ली में पली-बढ़ी वाणी ने दिल्ली से अपनी शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की। उन्होंने वाणिज्य में स्नातक करने के बाद इंटरनेश्नल काॅलेज आॅफ फैशन से फैशन में परस्नातक की डिग्री ली।

फैशन का कोर्स करने के दौरान ‘सबसे क्रियेटिव डिजाइनर‘ की उपाधि से नवाजी गई वाणी अपना एक स्वतंत्र व्यापार करने के लिये निकल पड़ीं। वाणी बताती हैं, ‘‘मेरी माँ ने मुझे एमबीए करवाने के लिये कुछ पैसे इकट्ठे कर रखे थे लेकिन मैं उन्हें इस पैसे को अपने व्यवसाय में निवेश करने के लिये राजी करने में सफल रही। हालांकि वे प्रारंभ में राजी नहीं हुई लेकिन मैं उन्हें मनाने में कामयाब रही।’’ प्रारंभ में उन्होंने कुछ स्थानीय ब्रांडों के लिये काम करना शुरू किया और उसके बाद उन्हें वीडियोकाॅन जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिला।

प्रारंभिक चुनौतियों से पार पाने के बाद वाणी को सफलता मिलनी तब प्रारंभ हुई जब वीडियोकाॅन इत्यादि जैसी बड़ी कंपनियों ने उनके काम को पहचाना और उन्हें काॅर्पोरेट आॅर्डर मिलने लगे। जल्द ही वे बीबा, गुड अर्थ और यूनाइटेड कलर्स आॅफ बेनेटन जैसे बड़े ब्रांडों के साथ काम करने लगीं।

वाणी कहती हैं, ‘‘एक समय पर आकर मुझे अहसास हुआ कि मुझे इन ब्रांडों के लिये काम करने के स्थान पर अपना ही एक ब्रांड शुरू करना चाहिये और इस प्रकार वर्ष 2011 में Gritstones (ग्रिटस्टोन्स) की स्थापना हुई। उस समय ई-काॅमर्स का बाजार तेजी से अपने पांव पसार रहा था और हमने इस आॅनलाइन बाजार का फायदा उठाने के लिये अपने ब्रांड को आॅनलाइन लाने का फैसला किया।’’ बेहद मामूली शुरुआत के चलते इन्होंनेे प्रारंभ में बहुत छोटे-छोटे कदम आगे बढ़ाए लेकिन समय के साथ विस्तार करते हुए गुजरात के अहमदाबाद में अपना पहला आॅफलाइन स्टोर खोला।

बहुत छोटे स्तर से अपने काम को प्रारंभ करते हुए वाणी एक बहुत लंबा रास्ता तय करने में सफल रही हैं। वर्तमान में उनके परिधानों के दो ब्रांड बाजार में उपभोक्ताओं के लिये उपलब्ध हैं - Gritstones (ग्रिटस्टोन्स) और Vvoguish (वोग्युइश)। इनमें से ग्रिटस्टोन्स मुख्यतः एक परुष केंद्रित परिधानों को तैयार करने वाला ब्रांड है और दूसरा महिलाओं के लिये परिधान तैयार करने के लिये मशहूर है। जहां एक तरफ ग्रिटस्टोन्स के परिधान मंत्रा, जबोंग, फ्लिपकार्ट और मेजन जैसे लगभग सभी आॅनलाइन पोर्टलों पर उपलब्ध है वहीं दूसरी तरफ वोग्युइश के परिधान होमशाॅप 18 इत्यादि जैसे टेलीविजन चैनलों पर उपलब्ध हैं।

भीतर से रचनात्मक मस्तिष्क की मालकिन वाणी कहती हैं कि भविष्य में अगर वे स्टाइलिश परिधानों को तैयार नहीं कर रही होंगी तो धारावाहिकों या फिल्मों के निर्देशन में अपने हाथ आजमा रही होंगी।

हालांकि अब वे एक सफल व्यवसाई हैं लेकिन फिर भी वाणी को बहुत छोटी सी उम्र से अपने पिता को खो देख का काफी दुःख और पछतावा है। इसके अलावा उन्हें एक महिला होने के चलते एक पुरुष प्रधान व्यवसायिकता की दुनिया में अपना एक अगल नाम बनाने के लिये काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वाणी कहती हैं,

‘‘आपके ऊपर हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने का एक दबाव तो रहता ही है इसके अलावा आपको समय-समय पर खुद को साबित भी करके दिखाना पड़ता है क्योंकि लोग इतनी आसानी से आपकी क्षमताओं पर भरोसा नहीं करते हैं। ऐसे में मेरे सामने अपने खुद को व्यवसाय को खड़ा करना, वित्त इत्यादि को संभालते हुए व्यापार की देखभाल करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी।’’

पेशेवर मोर्चे पर भी वाणी इस वर्ष के अंत तक अपने कैटालाॅग का विस्तार करते हुए उसमें डेनिम, ब्लेजर्स और समर कोट को भी शामिल करने की तैयार में हैं। इसके अलावा वे फ्रेंचाइजी माॅडल का प्रयोग करते हुए और कुछ अन्य आॅफलाइन स्टोर खोलकर व्यापार और ब्रांड के नाम के विस्तार की योजनाएं भी तैयार कर रही हैं।

अगर व्यक्तिगत मोर्चे पर देखा जाए तो वे इस अहसास से ही काफी प्रसन्न होती हैं कि वे एक व्यवसाय का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं और अर उनके पिता आज जीवित होते तो उनकी तरक्की देखकर फूले नहीं समाते। वे हमेशा से ही अपने पिता के साथ दिल से जुड़ी रहीं और उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिये कि उनके पिता हमेशा अपने बच्चों के माध्यम से जीवित रहें कुछ करने का फैसला किया है। और वे बिल्कुल ऐसा ही करने में सफल रही हैं। उनके भाई धीरज भाटिया इसस कंपनी के दूसरे निदेशक हैं।

फिल्में देखने की बेहद शौकीन वाणी मिले हुए खाली समय में अपनी पसंदीदा फिल्में देखना काफी पसंद करती हैं। इसके अलावा उन्हें एक और काम से बेहद प्यार है। वे दूसरों की समस्याओं को सुलझाने के अलावा उनकी स्थिति का विश्लेषण करने, समस्याओं की जड़ को तलाशने और उचित समाधान खोजने के काम में लगी रहती हैं। यह उनके विश्लेषणात्मक मस्तिष्क का कमाल है कि वे सवालों की तरफ देखने के बजाय जवाबों को तलाशने में सफल रहती हैं।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel