एक तेंदुए को तीस मीटर गहरे कुएं से बचाकर लाने वाले डॉ. बिजॉय गोगोई

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जगंली जानवरों को मारे जाने की तमाम खबरों के बीच असम से मानवता भरी एक खबर आई है। एक खूंखार जानवर को अपने कब्जे में करके उसको मार देने की बजाय एक शख्स तीस मीटर गहरे कुएं में जाकर उसकी जान बचाई है...

साभार: रॉयटर्स
साभार: रॉयटर्स
गुवाहटी के एक 30 फीट गहरे कुएं में एक मादा तेंदुआ जाने कैसे गिर गई थी। तेंदुए को बचाने के लिए एक डॉक्टर बिजॉय गोगोई ने अपनी जान की बाजी लगाकर कुएं में उतरे और उसकी जान बचाई।

करीब दो घंटे तक चलने वाले बचाव अभियान को देखने के लिए एक विशाल भीड़ इकट्ठी हुई। 

जंगल के जंगल कट रहे हैं, वन्यजीवों के आशियाने को नष्ट किया जा रहा है, उन्हें मारा जा रहा है। अपनी सुरक्षा और रिहाइश के लिए आतंकित ये जंगली जानवर गाहेबगाहे इंसानी बस्ती में घुस आते हैं। कभी इंसानों को अपना शिकार बनाते हैं और अक्सर इंसानी भीड़ के गोली-डंडों के शिकार हो जाते हैं। सुरक्षा के नाम पर उनकी जान ले ली जाती है। इंसान उन्हें अंततः जंगली करार देत है लेकिन ये भूल जाता है कि उनकी सही जगह जंगल है और वो उनकी जमीन पर जबर्दस्ती अतिक्रमण कर रहा है इसलिए उन निरीह जानवरों को इंसानों का सामना करना पड़ता है। जगंली जानवरों को मारे जाने की तमाम खबरों के बीच असम से मानवता भरी एक खबर आई है। एक खूंखार जानवर को अपने कब्जे में करके उसको मार देने की बजाय एक शख्स तीस मीटर गहरे कुएं में जाकर उसकी जान बचाई है।

गुवाहटी के एक 30 फीट गहरे कुएं में एक मादा तेंदुआ जाने कैसे गिर गई थी। वो मादा तेंदुआ गुवाहटी के ग्रामीण इलाके के एक कुएं में घंटों तक फंसी रही, जब तक गांव वालों ने उसे देखा नहीं। वह शिकार की तलाश में आबादी की ओर आ गई थी। थोड़ी देर बाद लोगों की भीड़ लग गई। लोग डरे हुए थे। तेंदुए को फंसा देखकर कैमरा भी चमकने लगे। सब अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित थे। तेंदुआ कैमरा देखकर खूब गुर्रा रहा था। उसकी ये गुर्राहट सुनकर जनता और भयभीत हुए जा रही थी। उसे सूखे कुंए से तब निकाला जा सका जब वन विभाग के अधिकारी और सैकड़ों गांव वाले वहां पर इकट्ठा हो गए। इसी बीच तेंदुए को बचाने के लिए एक डॉक्टर बिजॉय गोगोई ने अपनी जान की बाजी लगाकर कुएं में उतरे और उसकी जान बचाई।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

डॉ गोगोई वन विभाग में पशु विशेषज्ञ हैं। एएनआई द्वारा साझा किया गए इस घटना के वीडियो में डॉ बिजॉय गोगोई उस जानवर को शांत करने के बाद एक सीढ़ी और रस्सी की मदद से सूखे कुएं में उतर गए। तेंदुए को एक रस्सी से बांधा और कुएं से बाहर निकाल लाए। करीब दो घंटे तक चलने वाले बचाव अभियान को देखने के लिए एक विशाल भीड़ इकट्ठी हुई। असम ट्रिब्यून ने बताया कि पशु को असम स्टेट चिड़ियाघर और बॉटनिकल गार्डन में स्थानांतरित कर दिया गया था जहां उसकी एक चिकित्सा जांच की गई। तेंदुए की चिकित्सा परीक्षा में कोई चोट नहीं मिली है।

एक और तेंदुए ने असम के दूसरे गांव में प्रवेश किया था वो इस वाले तेंदुए की तरह भाग्यशाली नहीं था। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, एक बुजुर्ग आदमी पर हमला करने और मारने के बाद लगभग 100 लोगों की भीड़ ने इस लुप्तप्राय पशु का शिकार कर लिया। तेज हथियारों और पत्थरों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इसे मार दिया। बिगकैट्स के जीवविज्ञानी अलेक्जेंडर ब्राकज़ोवस्की के मुताबिक, "यह पहली बार ऐसा नहीं हुआ है और यह आखिरी नहीं होगा, जब लोग जंगलों पर अतिक्रमण करते रहेंगे तो यह केवल बदतर होने जा रहा है।"

तकरीबन एक महले पहले ही, एक तेंदुए ने उत्तर प्रदेश राज्य के एक गांव में एक आदमी पर हमला किया। जानवर ने पहले से ही तीन अन्य लोगों को मार दिया था। एक आदमी ने उसे डंडे से खूब मारा। जंगलों में केवल 12,000 से 14,000 भारतीय तेंदुए बचे हैं। अपने प्राकृतिक आवासों में अत्यधिक अतिक्रमण के कारण, इन बिगकैट्स ने शहरी क्षेत्रों में अक्सर प्रवेश करना शुरू कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्य के साथ संघर्ष हो रहा है।


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