अलीबाबा की तर्ज़ पर ऐमज़ॉन ने भारत में लॉन्च की यह सर्विस, भारतीय निर्यातकों को बड़ा तोहफ़ा

ऐमज़ॉन ने अपने ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ते हुए भारत में लॉन्च की ऐमज़ॉन बिज़नेस सर्विस...

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ऐमज़ॉन ने पिछले साल ही इस प्रोग्राम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था और कंपनी का दावा है कि अभी तक 2,000 बी टू बी निर्यातक इस प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं और इसका लाभ उठा रहे हैं। फ़िलहाल भारत का सबसे बड़ा बी टू बी ऑनलाइन मार्केट प्लेटफ़ॉर्म है, इंडियामार्ट। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 ऐमज़ॉन बिज़नेस की एक और ख़ास बात यह भी है कि सेलर्स को प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए, न सिर्फ़ विदेशी बाजारों के छोटे और मध्यमस्तरीय एंटरप्राइजेज़ के साथ जुड़ने का मौका मिलता है, बल्कि फ़ॉर्च्यून 50 कंपनियों जैसे कि सिमेन्स, स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी समेत कई बड़े नामों के साथ भी व्यापार कर सकते हैं।

मज़ॉन ने अपने ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ते हुए भारत में ऐमज़ॉन बिज़नेस सर्विस लॉन्च की है। यह ठीक उसी तरह का प्रयोग है, जो आज से 20 साल पहले अलीबाबा ने चीन में किया था। ऐमज़ॉन की यह सर्विस एक बी टू बी (B2B) सेलिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसके माध्यम से भारत के निर्यातकों को एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस मुहैया कराया जाएगा, जहां से वह विश्वभर में अपने व्यापार को फैला सकेंगे।

यूके, यूएस, जर्मनी और जापान में यह प्रोग्राम पहले से मौजूद है। हाल ही में, फ्रांस में भी इसे शुरू किया जा चुका है। अब भारतीय निर्यातक भी इस बिज़नेस टू बिज़नेस प्लेटफ़ॉर्म का लाभ उठा सकते हैं। भारतीय निर्यातकों को ऐमज़ॉन बिज़नेस पर जाकर अपना रिजस्ट्रेशन कराना होगा और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे व्यक्तिगत रूप से इन पांच देशों में अपने व्यापार को विस्तार दे सकते हैं और अपने उत्पादों का निर्यात कर सकते हैं। फ़िलहाल ऐमज़ॉन बिज़नेस की सुविधाएं, इन बड़े बाज़ारों तक ही सीमित हैं।

ऐमज़ॉन ने पिछले साल ही इस प्रोग्राम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था और कंपनी का दावा है कि अभी तक 2,000 बी टू बी निर्यातक इस प्रोग्राम से जुड़ चुके हैं और इसका लाभ उठा रहे हैं। फ़िलहाल भारत का सबसे बड़ा बी टू बी ऑनलाइन मार्केट प्लेटफ़ॉर्म है, इंडियामार्ट। इसकी शुरूआत 20 साल पहले हुई थी। बी टू बी ऑनलाइन मार्केटप्लेस में इंडियामार्ट एकमात्र बड़ा सुविधाप्रदाता है। ग्लोकल बाज़ार नाम के स्टार्टअप ने भी इस सेक्टर में अपनी सुविधाएं शुरू की थीं।

ऐमज़ॉन बिज़नेस में सेलर्स (विक्रेता) होम ऐक्सेसरीज़, पीसी, साइंटिफ़िक सप्लाईज़ आदि की प्रोडक्ट्स रेंज प्रस्तुत करते हैं। ऐमज़ॉन बिज़नेस की एक और ख़ास बात यह भी है कि सेलर्स को प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए, न सिर्फ़ विदेशी बाजारों के छोटे और मध्यमस्तरीय एंटरप्राइजेज़ के साथ जुड़ने का मौका मिलता है, बल्कि फ़ॉर्च्यून 50 कंपनियों जैसे कि सिमेन्स, स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी समेत कई बड़े नामों के साथ भी व्यापार कर सकते हैं।

ऐमज़ॉन बी टू बी मार्केटप्लेस के वाइस प्रेज़िडेंट (वीपी) पीयूष नाहर ने मीडिया प्रतिनिधियों से बात करते हुए कहा, “हमारा ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम, ग्लोबल ट्रेड की जटिलताओं को दूर करते हुए, भारतीय विक्रेताओं को उनके बेहतरीन उत्पादों की रेंज दुनियाभर के बड़े बाज़ारों तक पहुंचाने में मदद करता है। इस प्रोग्राम के तहत ऐमज़ॉन, बी टू सी (बिज़नेस टू कन्ज़्यूमर) ग्राहकों को भी टारगेट कर चुका है, जिस प्रयोग को बड़ी सफलता भी मिली और ग्रोथ रेट शानदार रहा। हम बेहद ख़ुश हैं कि ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम के तहत भारत के बी टू बी मार्केट को सुविधाएं पेश करने जा रहे हैं।”

पीयूष के मुताबिक़, इस प्रोग्राम से जुड़ने वाले निर्यातकों को ऑर्डर्स की संख्या के हिसाब से डिस्काउंट के साथ कमिशन दिया जाएगा। साथ ही, ऐमज़ॉन कस्टमर सर्विस, एफ़बीए (फ़ुलफ़िलमेंट बाय ऐमज़ॉन) के साथ लॉजिस्टिक मैनेजमेंट, ख़ास बिज़नेस कस्टमर्स के लिए बिज़नेस प्राइस और क्वॉन्टिटी डिस्काउंट की सुविधाएं दी जाएंगी। इतना ही नहीं, एक ही अकाउंट की मदद से सेलर्स, बी टू बी और बी टू सी, दोनों ही प्रकार की सेलिंग कर सकते हैं। पीयूष कहते हैं कि सिंगल अकाउंट की सुविधा से इन्वेनटरी को मैनेज करने में आसानी होगी। इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण सुविधाओं से लैस है, ऐमज़ॉन बिज़नेस। ऐमज़ॉन ने 2015 में अमेरिका में बी टू बी प्लेटफ़ॉर्म की शुरूआत की थी।

ऐमज़ॉन इंडिया सेलर सर्विसेज़ के जनरल मैनेजर और डायरेक्टर, गोपाल पिल्लई भी प्रेस वार्ता के दौरान मौजूद रहे । उन्होंने कहा, “2015 में लॉन्च के बाद ऐमज़ॉन ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम ने भारत के बी टू सी उत्पाद निर्यातकों की पहुंच को दुनियाभर में मौजूद ऐमज़ॉन कस्टमर बेस तक बेहद सहज बना दिया है। हाल में, ऐमज़ॉन के 10 ग्लोबल बाज़ारों में 32,000 निर्यातक 90 मिलियन से ज़्यादा मेड-इन-इंडिया प्रोडक्ट्स ऑफ़र कर रहे हैं। जैसा कि हम देख पा रहे हैं कि पूरी दुनिया में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, हम समझते हैं कि यह सबसे उपयुक्त समय है कि ग्लोबल सेलिंग प्रोग्राम को और भी मज़बूत किया जाए और भारतीय निर्यातकों के लिए यूएस, यूके, जर्मनी, फ़्रांस और जापान के बी टू सी और बी टू बी बाज़ारों के रास्ते खोले जाएं।” उन्होंने जानकारी दी कि फ़िलहाल इन पांच देशों के निर्यातक, भारत के बी टू बी बाज़ार में अपने उत्पादों के निर्यात में सक्षम नहीं होंगे।

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