छोटे उद्यमियों की बड़ी उम्मीद, ‘कलारी कैपिटल’

कैसे हासिल करें निवेशई-कामर्स ने बदला कारोबार का चेहराऐप और मोबाइल सेवा के क्षेत्र में कई मौके

0

देश में स्टार्टअप का क्षेत्र साल 2013 में अपनी रफ्तार बना रहा था। उस वक्त कई क्षेत्र जैसे मोबाइल, हेल्थकेयर और शिक्षा का प्रभुत्व स्थापित हो गया था और ई-कामर्स से जुड़े क्षेत्र मजबूत हो रहे थे। दोनों ही क्षेत्र को पूंजी की जरूरत महसूस हो रही थी। तब कलारी कैपिटल के कुमार शिरालागी काफी व्यस्त रहने लगे। हालांकि कुमार के लिये ये नया नहीं था। क्योंकि उनके पास उद्यमी होने के नाते पहले से काफी अनुभव था।

फोटो क्रेडिट 'www.silicondragonventures.com'
फोटो क्रेडिट 'www.silicondragonventures.com'

कुमार के मुताबिक कलारी कैपिटल का फोकस अब तक अपनी जैसी कंपनियों में ही निवेश पर था लेकिन अब उन्होने दूसरे क्षेत्र जैसे सॉफ्टवेयर, आईटी आईटीईएस, मोबाइल, हेल्थकेयर, शिक्षा पर भी ध्यान देने शुरू किया। कलारी कैपिटल्स के लिए करीब 15 से 18 महीने तक निवेश के मामले में काफी व्यस्त रहे और कुमार को विश्वास हो गया कि आने वाले महीने निवेश की सफलता को परिभाषित करेंगे। कुमार का कहना है कि कंपनी ने 8-9 जगह निवेश किया और समय के साथ साथ पता चलने लग गया कि कौन सी कंपनियां सफल हैं और कौन असफल। कुमार का कहना है कि शुरूआत में जिन कंपनियों में निवेश किया गया उनमें से कई कंपनियों में असफलता ही हाथ लगी लेकिन कई कंपनियां ऐसी थी जो लाभदायक स्थिति में पहुंच गई थी और ये उनके लिये अच्छे संकेत था।

कई राज्यों में ई-कॉमर्स इंडस्ट्री का विस्तार हो रहा है। कुमार के मुताबिक बाजार में दो तरह के ई-कॉमर्स के खिलाड़ी हैं। एक वो जो लगातार तरक्की कर रहे हैं तो दूसरे वो जो एक समान रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में कुमार को विश्वास है कि ‘कलारी’ वेंचर कैपिटल जैसी कंपनी को ई-कॉमर्स के क्षेत्र से जुड़े रहना चाहिए। कुमार का मानना है कि आने वाले वक्त में और कई ई-कॉमर्स खिलाड़ी सामने आएंगे। जिनको शुरूआत से ही निवेशक की जरूरत होगी। वीएएस की गिरावट और ई-कामर्स के साथ ऐप में मौके को देखने वाले कुमार का कहना है कि भारतीय मोबाइल के बाजार में इन दोनों क्षेत्रों में किसी भी स्टार्टअप के विकास के लिए पूंजी जुटाना किसी अवरोधक से कम नहीं है। ये क्षेत्र काफी जटिलताओं से भरा है। तो वहीं दूसरी ओर ऐप और मोबाइल सेवा के क्षेत्र में वो कई मौके भी देखते हैं।

कुमार का कहना है कि “हाल ही में जिस तरीके से सेल फोन की मांग बढ़ी है उसे देखकर आप कह सकते हैं कि ग्राहकों के बीच इनकी मांग और बढ़ेगी। इस क्षेत्र में मुख्य चुनौती व्यवहार्य और स्केलेबल राजस्व मॉडल का ढांचा तैयार करना है। अगर इस क्षेत्र से जुड़ा कोई स्टार्टअप अपनी काबलियत शुरूआत में साबित कर दे तो मैं उस पर दांव लगाने को तैयार हूं।”

कुमार का मानना है कि किसी भी स्टार्टअप में निवेशक की भूमिका काफी खास होती है उसे स्टार्टअप के हर काम से जुड़ना जरूरी होता है। उनके मुताबिक जब कोई निवेशक उद्यमी के साथ काम करता है तब उसे कई ऐसी चीजें दिखती हैं जो कंपनी के लिए ठीक नहीं होती। तब निवेशक ही उनको सही ढंग से सामना कर सकता है। जिसका असर कंपनी के विकास में भी दिखता है। निवेशक होने के नाते उसके पास कई विचार होते हैं जिनको विभिन्न स्तरों में इस्तेमाल कर फायदा उठाया जा सकता है। फिर चाहे वो नया कौशल तैयार करना हो या फिर दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण। कुमार इससे भी एक कदम आगे बढ़कर ये कहते हैं कि निवेशक कई तरह की जिम्मेदारी भी उठा सकते हैं फिर चाहे कंपनी में नये पेशेवर लोगों की नियुक्ति हो या नये संभावित ग्राहकों को अपने साथ जोड़ना हो। लिस्टेड कंपनियों की जगह शुरूआती कंपनियों में निवेशकों की ज्यादा भूमिका की जरूरत होती है।

कुमार का कहना है कि वो हर रोज कई ई-मेल देखते हैं इनमें से कई ई-मेल ऐसी होती हैं जो दूसरों से अलग होती हैं। निश्चित तौर पर ये ऐसी ई-मेल होती हैं जो पढ़ने में भले ही 100 पन्नों की ना हो लेकिन वो दिलचस्पी पैदा करती हैं। उनका कहना है कि कभी भी किसी भी निवेशक को पहली बाचतीच में ज्यादा जानकारी देने की जरूरत नहीं होती, तब केवल दो पन्नों की संक्षिप्त जानकारी काफी होती है। हालांकि ज्यादा जानकारी से निवेशक की रूची बढ़ती है लेकिन इस काम को अगली बैठकों के दौरान करना चाहिए। ऐसा करने से किसी की भी बेहतर साख बनती है। इसके अलावा बातचीत के दौरान निवेशक के सामने रखे जाने वाले आकड़ों को लेकर स्पष्ट होना चाहिए। उदाहरण देते हुए कुमार कहते हैं जैसे कोई कहता है कि आप एक मिलियन बना रहे हैं जो हमारे लिए आसान नहीं हैं। इस दौरान लोग ये नहीं बताते है कि वो एक मिलियन डॉलर हैं या रुपये।

कुमार का कहना है कि कलारी कैपिटल की कुछ सीमाएं हैं। बावजूद इसके वो 3 से 5 मिलियन डॉलर विभिन्न कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं जिनमें कुछ संभावनाएं हैं। ये लोग ऐसी कंपनियों में निवेश करने से बचते हैं जो फिलहाल आइडिया के स्तर पर होती हैं। इसके अलावा किसी भी कंपनी में निवेश से पहले से ये कई चीजें देखते हैं जैसे वो किस तरह का उत्पाद बनाते हैं, उनका बिजनेस मॉडल क्या है, बाजार में उस कंपनी के लिए क्या क्या चुनौतियां हैं और वो दूसरों से अलग कैसे है। कुमार का कहना है कि उद्यमियों को निवेशकों से सम्पर्क करने से पहले जान लेना चाहिये कि वो निवेशक से जुड़ी थोड़ी बहुत जानकारी रखें।

कुमार के मुताबिक कलारी कैपिटल किसी भी कंपनी की टीम को काफी महत्व देता है जहां पर वो निवेश की योजना बना रहे होते हैं। उनका कहना है कि वो अच्छे उद्यमी चाहते हैं जिनके साथ काम कर मजा आए। उद्यमियों के नैतिक मूल्य और उनके विचारों की ये लोग काफी जांच पड़ताल करते हैं। कुमार का कहना है कि किसी भी उदयमी को बातचीत और अपने काम में स्पष्ट रहना चाहिए। ऐसा करने से वो अपनी चीज को बेच पाता है और दूसरों को अपने कारोबार के प्रति उत्साहित कर सकता है।