रिज़र्व बैंक ने एक सप्ताह में 50,000 रुपये निकालने की अनुमति दी 

ओवरड्रॉफ्ट और कैश क्रेडिट खाताधारकों  के लिए यह राहत की बात है।

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नकदी निकासी के नियमों में और ढील देते हुए रिजर्व बैंक ने कहा है, कि ओवरड्रॉफ्ट और कैश क्रेडिट खाताधारक अब एक सप्ताह में बैंक से 50,000 तक की रकम निकाल सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि समीक्षा के बाद इस सुविधा का विस्तार ओवरड्रॉफ्ट और कैश क्रेडिट खातों तक भी करने का फैसला किया गया है। इसी के अनुरूप ऐसे चालू-ओवरड्रॉफ्ट-कैश क्रेडिट खाताधारक जिनके खाते पिछले तीन महीने या उससे अधिक से परिचालन में हैं, अब एक सप्ताह में 50,000 रुपये तक निकाल सकेंगे।

यह सुविधा व्यक्तिगत ओवरड्रॉफ्ट खातों पर नहीं मिलेगी।

रिजर्व बैंक ने कहा कि 50,000 रुपये की निकासी के दौरान संबंधित व्यक्ति को नकदी का भुगतान 2,000 रुपये के नोट में किया जाए। सरकार ने 500 और 1000 का नोट बंद करने के बाद किसानों, छोटे व्यापारियों, समूह सी के केंद्रीय कर्मचारियों आदि के लिए नकदी निकासी की सीमा में छूट के लिए कई फैसले लिए हैं।

उधर दूसरी तरफ भारत सरकार द्वारा 500 और 1000 का नोट बंद करने के फैसले के बाद से बैंकों को 18 नवंबर तक 5.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले या जमा किए हैं।

10 से 18 नवंबर के दौरान बैंकों के काउंटर या एटीएम के जरिये 1,03,316 करोड़ रुपये वितरित किए गये।

सरकार द्वारा 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 का नोट बंद करने की घोषणा के बाद से रिजर्व बैंक ने ऐसे नोटों को बदलने या जमा कराने की व्यवस्था की है। यह सुविधा रिजर्व बैंक और वाणिज्यिक बैंकों के साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा शहरी सहकारी बैंकों में उपलब्ध है। बैंकों के मुताबिक 10 नवंबर से 18 नवंबर के दौरान उन्होंने 5,44,571 करोड़ रुपये के नोट बदले हैं या जमा किए हैं। इसमें से 33,006 करोड़ रुपये के नोट बदले गये हैं, जबकि 5,11,565 रुपये जमा किए हैं। बयान में कहा गया है कि इस दौरान जनता ने अपने खातों या एटीएम से 1,03,316 करोड़ रुपये निकाले हैं। 

नोटबंदी की घोषणा के बाद 10 नवंबर को बैंक खुले थे। उस दिन से आज तक बैंकों में लंबी कतारें लगी हैं। लोग नोट बदलने या जमा कराने के लिए बैंकों और डाकघरों पर लाइनें लगाकर खड़े हैं। एटीएम पर भी बड़ी-बड़ी कतारें देखने को मिल रही हैं। सरकार ने लोगों को अमान्य मुद्रा का इस्तेमाल पेट्रोल-डीजल, रेल या हवाई टिकट खरीदने, बिजली पानी के भुगतान या कर भुगतान के अलावा सरकारी अस्पतालों में करने की अनुमति दी है।

इन्हीं सबके बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में पंपरागत बैंकों में धीरे-धीरे ‘इस्लामी बैंक सुविधा’ देने का प्रस्ताव किया है जिसमें ब्याज-मुक्त बैंकिंग सेवा के प्रावधान किए जा सकते हैं।

केंद्र तथा रिजर्व बैंक दोनों ही लंबे समय से देश में समाज के ऐसे लोगों को इस तरह की बैंक सुविधाएं पेश करने की संभावनाओं पर विचार करते रहे हैं, जो धार्मिक कारणों से बैंकों से दूर हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है, कि ‘हमारा विचार है कि इस्लामी वित्तीय कारोबार की जटिलताओं और उसमें विभिन्न नियामकीय एवं निगरानी तथा पर्यवेक्षण संबंधी चुनौतियों तथा भारतीय बैंकों को इसका अनुभव नहीं होने को देखते हुए देश में इस्लामी बैंकिंग सुविधा की दिशा में धीरे-धीरे कदम रखा जा सकता है।’’ सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी के जवाब में प्राप्त इस पत्र के अनुसार आरबीआई की राय है, कि  ‘सरकार द्वारा जरूरी अधिसूचना के बाद शुरू में इस इस्लामिक बैंक सुविधा के तहत परंपरागत बैंकों में साधारण किस्म की योजनाएं पेश की जा सकती हैं, जो परंपरागत बैंक उत्पादों की योजनाओं जैसी ही होंगी। बाद में समय के साथ होने वाले अनुभव के आधार पर पूर्ण इस्लामिक बैंकिंग पेश करने पर विचार किया जा सकता है जिसमें हानि लाभ में हिस्सेदारी वाले जटिल उत्पाद शामिल किए जा सकते हैं।’

इस्लामी या शरिया बैंकिग एक प्रकार की वित्त व्यवस्था जो ब्याज नहीं लेने के सिद्धांत पर आधारित है क्योंकि इस्लाम में ब्याज की मनाही है।

केंद्र सरकार का प्रस्ताव अंतर विभागीय समूह (आईडीसी) की सिफारिश के आधार पर देश में इस्लामी बैंक पेश करने की व्यवहार्यता के संदर्भ में कानूनी, तकनीकी और नियामकीय मुद्दों की जांच-परख पर आधारित है। रिजर्व बैंक ने इस्लामी बैंकिंग सेवाओं के बारे में एक तकनीकी रपट भी तैयार की है, जो वित्त मंत्रालय को भेजी गयी है। रिज़र्व बैंक के अनुसार अगर देश में इस्लामी बैंक उत्पाद पेश करने का निर्णय किया जाता है, तो रिजर्व बैंक को परिचालन एवं नियामकीय मसौदे रखने के लिये आगे काम करना होगा, ताकि देश में बैंकों द्वारा इस प्रकार के उत्पादों को सुगमता से पेश किया जा सके।’ रिज़र्व बैंक को शरिया के तहत निर्धारित बातों के अलावा इस्लामिक उत्पादों के लिये उपयुक्त मानदंड भी तैयार करने की जरूरत होगी। केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2015-16 की अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय समाज का कुछ तबका धार्मिक कारणों से बैंकिंग सुविधाओं से वंचित है। धार्मिक कारणों से वे ब्याज से जुड़े बैंक उत्पादों के उपयोग नहीं कर पाते।इस तबकों को मुख्यधारा में लाने के लिये सरकार के साथ विचार-विमर्श के साथ देश में ब्याज मुक्त बैंक उत्पाद पेश करने की संभावना तलाशने का प्रस्ताव किया गया।

उधर दूसरी तरफ सरकार द्वारा पुराने नोटों को बदलने पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों के बाद बैंकों के बाहर लोगों की कतार छोटी हुई है, लेकिन एटीएम के बाहर स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। यहां लोग अभी भी नए नोट पाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगे हुए हैं। बैंकों के बाहर लोग अपने 500 और 1000 रुपये के चलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को बदलवाने के लिए लाइन में जुटने लगे हैं। नोटों को बंद करने के 12वें दिन भी एटीएम के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, क्योंकि अधिकतर मशीनें अभी तक चालू नहीं हुई हैं और जो काम कर रही हैं उनमें पर्याप्त नकदी नहीं है। देशभर में कई स्थानों से ऐसी खबरें आ रही हैं, कि बैंक शाखाओं में नकदी की कमी के चलते लोगों का बैंकों के कर्मचारियों से झगड़ा हुआ है और कुछ शाखाओं पर तो छुटपुट झड़पें भी हुई हैं। इसके अलावा ऐसे परिवार जहां किसी की शादी होने वाली है, उनको नकदी निकासी में सरकार की ओर से राहत देने के पांच दिन बाद भी अभी तक लोग अपने खातों से ढाई लाख रुपये की निकासी नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले में बैंकों का कहना है कि इस संबंध में उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक से अभी तक दिशानिर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। लोग बैंकों में सरकारी आदेशपत्र के साथ जा रहे हैं, जिसमें किसानों और शादियों के लिए नकदी निकासी में छूट की बात कही गई है, लेकिन वे अभी भी बैंकों से निकासी करने में असमर्थ हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है, कि वह यह देखकर दु:खी हैं, कि नोटबंदी के 12 दिन बाद भी समस्या बनी हुई है। हालांकि उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद लोगों के धैर्य की सराहना की है। उन्होंने घोषणा की है, कि रिजर्व बैंक ने आंध्र प्रदेश के लिये छोटी राशि के 2,000 करोड़ रुपये जारी किये हैं। इससे लोगों को कल से कुछ राहत मिलनी चाहिए। साथ ही नायडू ने यह भी कहा, कि ‘मेरे लंबे राजनीतिक जीवन में, यह पहला मौका है जब मैं इतने लंबे समय तक संकट के बने रहने को देख रहा हूं। यह दु:खद है कि कि नोटबंदी की घोषणा के 12 दिन बाद भी समस्या बनी हुई है। मैं धर्य खो रहा हूं लेकिन यह सराहनीय है कि लोग धैर्य बनाये हुए हैं।’

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