यूपी के किसान हुए स्मार्ट, सीधे घर पर देंगे ताजी सब्जियों की डिलिवरी

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अब वाराणसी, भदोही, मीरजापुर, चंदौली और सोनभद्र के कई सौ किसानों का ऐसा समूह तैयार हुआ है, जिसके तमाम प्रोडक्ट जैसे दूध-सब्जी, गेहूं, चावल, दलहन, तिलहन और इनसे बनने वाले मैदा-सूजी, बेसन व तमाम तरह की खाद्य सामग्री सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगी।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
धर्मनगरी काशी यानी कि वाराणसी और उसके आस पास के जिलों के किसान अब अपनी सब्जियों और फलों को घर-घर पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। 

इस पहल की शुरुआत इसी महीने 21 सितंबर से नवरात्र के पावन अवसर से होगी। वाराणसी में पूर्वांचल का सेवापुरी और बाकी का इलाका सब्दी उत्पादन में काफी आगे है।

हमारे देश के किसानों की स्थिति अक्सर दयनीय ही हो जाती है। पहले तो काफी मेहनत से फसल उगाते हैं और अगर किस्मत उनका साथ दे जाए और फसल अच्छी हो जाए तो उसके सही दाम नहीं मिलते। लेकिन इस समस्या का हल यूपी के कुछ किसानों ने खोज लिया है। धर्मनगरी काशी यानी कि वाराणसी और उसके आस पास के जिलों के किसान अब अपनी सब्जियों और फलों को घर-घर पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। किसान सब्जियों को अपने ब्रांड के साथ बेचेंगे। इसके लिए एक 'किसान क्लब' बनाया गया है और सब्जियां पहुंचाने के लिए एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भी बनाई गई है। सब्जियों की पैकिंग के लिए एक वर्कशॉप का भी निर्माण किया गया है। को-ऑपरेटिव सिस्टम के तहत यह सारा काम हो रहा है।

किसानों की मदद करने और लोगों को ताजी सब्जियां उपलब्ध करवाने के लिए यह पहल समाहित फाउंडेशन ने की है। फाउंडेशन की प्रभारी डॉ. दीप्ति ने बताया कि 'किसान टु डायरेक्ट कस्टमर' योजना का प्‍लान तैयार कर किसानों को बाजार के अनुसार ढालने की तैयारी में करीब छह महीने का समय लग गया। अब वाराणसी, भदोही, मीरजापुर, चंदौली और सोनभद्र के कई सौ किसानों का ऐसा समूह तैयार हुआ है, जिसके तमाम प्रोडक्ट जैसे दूध-सब्जी, गेहूं, चावल, दलहन, तिलहन और इनसे बनने वाले मैदा-सूजी, बेसन व तमाम तरह की खाद्य सामग्री सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगी। जिस ब्रांड से किसान यह सारा सामान पहुंचाएंगे उसका नाम 'ग्रहस्थ' रखा गया है।

खास बात यह है कि इसमें महिला किसानों को भी शामिल किया गया है। समाहित संस्था ने घर-घर जाकर महिला किसानों से मुलाकात की। और नाबार्ड ने किसानों को ट्रेंड किया गया। वैसे तो घरेलू जरूरतों के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करने का प्रचलन काफी पहले से है लेकिन किसानों के खेत से सीधे किचन में सब्जियां, फल और दूध जैसे सामान की डिलिवरी एक अनोखा प्रोजेक्ट है। इस प्रोग्राम के तहत किसान फोन या वॉट्सऐप मेसेज पर डिलिवरी वैन से घर-घर में फ्रेश सब्जी से लेकर दूध, गेहूं-चावल, दाल आदि लेकर पहुंच जाएंगे। एक और खास बात यह है कि पेमेंट के लिए पेटीएम या कार्ड भी एक्सेप्ट किया जाएगा।

इस पहल की शुरुआत इसी महीने 21 सितंबर से नवरात्र के पावन अवसर से होगी। वाराणसी में पूर्वांचल का सेवापुरी और बाकी का इलाका सब्दी उत्पादन में काफी आगे है। लेकिन किसानों को उनकी सब्जियों का उचित दाम नहीं मिल पाता क्योंकि सारे बिचौलिए उनसे औने पौने दाम पर सब्जी खरीदते हैं और उसे काफी महंगे दाम पर बाद में बेच देते हैं। सब्जियों के दाम तय करने का अधिकार किसानों नहीं बल्कि कुछ ठेकेदारों के जिम्मे होता है। किसानों को 'स्मार्ट' बनाने के लिए नाबार्ड के सहयोग से इंडियन वेजिटेबल रिसर्च सेंटर में ट्रेनिंग दी गई। प्रोग्रेसिव रिसर्च किसानों को सब्जियों की क्वॉलिटी व उत्पादकता बढ़ाने के साथ अपना सामान ग्राहक तक पहुंचाने के लिए ट्रेनिंग दी गई है।

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