दो साल में 100 करोड़ रुपए कमाएगा नन्हा तिलक

होनहार बिरवान के होत चीकने पात, स्टार्टअप में अब बच्चों का हुनर भी कमाल दिखाने लगा है...

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लॉजिस्टिक स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले तेरह वर्षीय तिलक मेहता का दो साल में सौ करोड़ रुपए कमाने का सपना है तो इक्कीस साल के लिरिक जैन ने फेक न्यूज से निपटने वाले एक ऐसे स्टार्टअप की शुरुआत की है जो 'कल्पना' से 'वास्तविकता' को अलग कर देगा।

लिरिक जैन और  तिलक मेहता
लिरिक जैन और  तिलक मेहता
फेक न्यूज ने इन दिनों पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है। यह मामला उच्च अदालतों तक पहुंच चुका है। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड करना भी उसका समर्थन माना जाएगा।

होनहार बिरवान के होत चीकने पात। स्टार्टअप में अब बच्चों का हुनर भी कमाल दिखाने लगा है। लॉजिस्टिक स्टार्टअप की शुरुआत करने वाले तेरह साल के तिलक मेहता अगले दो साल में अपने बिजनेस से सौ करोड़ रुपए कमाने का दावा कर रहे हैं तो मूलतः मैसूर के रहने वाले कैंब्रिज विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के छात्र 21 वर्षीय लिरिक जैन ने फेक न्यूज से निपटने के लिए अचंभित करने वाला स्टार्टअप शुरू किया है जो कल्पना से वास्तविकता को अलग करने वाली मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म प्लेटफॉर्म में तब्दील कर देता है। इस प्लेटफॉर्म का फिलहाल तकनीकी ट्रायल चल रहा है। कहते हैं न कि काम और कामयाबी के लिए किसी उम्र की जरूरत नहीं होती है। इसे मुंबई के 13 वर्षीय तिलक मेहता ने साबित कर दिया है।

मुंबई के रहने वाले तिलक मेहता ने एक ऐसा प्रेरणादायक काम किया, जो बड़े-बड़े भी नहीं कर पाते। तिलक मेहता आठवीं कक्षा में पढ़ते हैं और पिता के काम से देर से लौटने की शिकायत रखते हैं। अपनी उम्र के बाकी बच्चों से अलग तिलक की एक खासियत है। उन्होंने एक लॉजिस्टिक स्टार्टअप की शुरुआत की है और इनका लक्ष्य 2020 तक 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना है। अपनी बात मीडिया से साझा करते हुए तिलक बताते हैं कि पिछले साल जब उनको शहर के दूसरे छोर से कुछ किताबों की तत्काल जरूरत पड़ी, पिता काम से थके हुए आए, सो वह उनसे अपनी बात कह नहीं सके और कोई दूसरा ऐसा था नहीं, जिसे बता पाते। उसी घटना से उन्हें एक ऐसा स्टार्टअप शुरू करने की प्ररेणा मिली, जो शहर के अंदर एक ही दिन में कागजातों तथा छोटे पार्सलों की डिलीवरी कर सके। उन्होंने अपने पिता विशाल से विचार साझा किया तो उन्होंने भी इसकी जरूरत समझी। अब पेपर्स एन पार्सल्स तिलक का सपना है और वह इसका कारोबार बड़ा करना सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं। स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी घनश्याम पारेख बताते हैं कि कंपनी का लक्ष्य शहर के भीतर लॉजिस्टिक्स बाजार के 20 फीसदी हिस्से पर काबिज होना तथा 2020 तक 100 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना है।

फेक न्यूज ने इन दिनो पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है। यह मामला उच्च अदालतों तक पहुंच चुका है। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड करना भी उसका समर्थन माना जाएगा। यानी कि किसी भी ‘फेक न्यूज’ वाले मैसेज को फॉरवर्ड करना भी अपराध है। हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया खासतौर पर व्हाट्सएप में फैलाए जा रही फेक पोस्ट पर ये अहम आदेश दिया लेकिन कोर्ट की इस टिप्पणी का शायद अब तक कोई असर नहीं हुआ है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर ‘फेक न्यूज’ के रूप में तमाम मैसेज तैर रहे हैं, जिनमें से कई मैसेज अफवाहों को जन्म दे रहे हैं, जिससे देश भर में भीड़ के हमले के वजह से लोगों की जान जा रही है।

फेक न्यूज से निपटने के लिए लिरिक जैन ने वेस्ट यॉर्कशायर में अपना स्टार्टअप ‘लॉजिकली’ शुरू किया है। इसके बाद उन्होंने अपने स्टार्टअप को कल्पना से वास्तविकता को अलग करने वाली मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म प्लेटफॉर्म में तब्दील कर दिया। इस प्लेटफॉर्म का फिलहाल तकनीकी ट्रायल चल रहा है। इसे सितंबर में ब्रिटेन और अमेरिका में लांच करने के बाद भारत में इसे अक्तूबर में लाया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म का लक्ष्य समाचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ तथ्यात्मक शुद्धता का संकेत भी देना है। लिरिक जैन बताते हैं कि ‘लॉजिकली’ प्लेटफॉर्म 70 हजार से अधिक वेबसाइटों से बड़ी संख्या में खबरों को जुटाएगा और हर खबर में किए गए दावों के सत्यता की पुष्टि करेगा। यह सब वह एक मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म का इस्तेमाल करके करेगा। उसका इस तरह से निर्माण किया गया है कि वह तार्किक झूठ, राजनीतिक पूर्वाग्रह और गलत आंकड़ों को पता लगा लेगा। ‘लॉजिकली’ खबरों में दी गई की जानकारी की गुणवत्ता को भी बताएगा ताकि यूजर पारदर्शिता और व्यावहारिकता के पैमाने पर तय कर सकें कि वे कितनी विश्वसनीय हैं।

इस वक्त डिजिटल होती दुनिया में 'फेक' न्यूज एक बड़ी चुनौती बन गया है। वैसे तो फेक न्यूज का समाधान तलाशने में सरकारों के साथ-साथ दिग्गज तकनीकी कंपनियों के भी पसीने छूट रहे हैं। इस बीच भारतीय मूल के ब्रिटिश उद्यमी लिरिक के स्टार्टअप ने फेक न्यूज से लड़ाई के लिए कमर कस ली है। लिरिक ने अपनी इस पूरी योजना को भारत को ध्यान में रखकर तैयार किया है। गौरतलब है कि फेक न्यूज के कारण होने वाली भीड़ हिंसा की घटनाओं और हिंसा को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस एक डिजिटल आर्मीज’ का गठन करने जा रही है। प्रमुख निवासियों की यह डिजिटल आर्मीज भड़काऊ पोस्टों और अफवाहों पर कड़ी नजर रखेगी।

उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का कहना है कि इस पहल के तहत राज्य के 1,469 पुलिस स्टेशनों के पास एक व्हाट्सएप ग्रुप होगा जिसमें पूर्व सैन्यकर्मियों, शिक्षकों, डॉक्टरों, वकीलों और पत्रकारों सहित अन्य क्षेत्रों के करीब 250 लोग शामिल होंगे। यह डिजिटल सेना अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन को सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज के बारे में जानकारी देगी। वहीं इसके साथ ही वे अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए स्थानीय लोगों के बीच सही सूचनाओं पहुंचाने का भी काम करेंगे।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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