केरल की मदद में कलमकार ने बटोरे दस लाख रुपए

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बाढ़ की बर्बादियों से जूझ रहे खूबसूरत केरल के करोड़ों लोगों की मदद में देश-दुनिया के जिन लाखों लोगों ने हाथ बढ़ाए हैं, उनमें कवि-साहित्यकार, लेखक-पत्रकार, कलाकार, संगीतकार, गायक और अभिनेता भी हैं। लेखक अमित वर्मा ने तो ट्विटर पर एक संदेश के जरिए दस लाख रुपए 'मुख्यमंत्री सहायता कोष' के लिए जुटा लिए।

केरल में आई बाढ़ में फंसे लोग
केरल में आई बाढ़ में फंसे लोग
तेलुगु फिल्म 'लेडी गब्बर सिंह' की अभिनेत्री पूनम पांडे भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल रहे केरलवासियों की सहायता के लिए दुनिया भर में अनेक मंच से आवाज उठा रही हैं। उन्होंने फिल्म की पूरी फीस केरल रिलीफ फंड में दान दे दी है। 

अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, उपजाऊ जमीन और रमणीय समुद्र तटों के कारण 'गॉड्स ऑन लैंड' कहे जाने वाले केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जो दुनिया भर में लाखों-लाख हाथ उठे हैं, उनमें तमाम कवि-लेखक, संगीतकार, कलाकार, बुद्धिजीवी भी हैं। वरिष्ठ साहित्यकार प्रफुल्ल कोलख्यान दुख पर काबू पाने के लिए लिखते हैं। साहित्य का पहला मित्र दुखी व्यक्ति होता है। साहित्य उसे जीवन-जगत के प्रति आश्वस्त करता है। संघर्ष करने, जीने की प्रेरणा देता है। ऐसे में देश के कवि-साहित्यकारों, कलाकारों का केरल के दुख में हाथ बंटाना पूरे भारत राष्ट्र को हिम्मत देता है। केरल के लोगों के लिए आज भी सामान्य जिंदगी आसान नहीं हो सकी है। यद्यपि बाढ़ का पानी अब उतरने लगा है लेकिन वे लाखों लोग विवश हैं कि आखिर कैसे ऐसी तबाही का सामना करें। आज भी घर, सड़कें जलमग्न हैं। बैकवॉटर में जानवरों के शव तैर रहे हैं। लैगून के तटों के टूरिज्म को बाढ़ ने धोकर दिया है। नीलकुरुंजी के फूल को दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट की खास पहचान माना जाता है। मन्नार के इलाके में यह बिखरा रहता है। इसी से राज्य टूरिज्म ने इस साल को 'कुरुंजी वर्ष' घोषित किया था। अब वह बात कहां। चारो तरफ श्मशान जैसा सन्नाटा फैला हुआ है।

जबकि तमाम कवि-साहित्यकार, लेखक-पत्रकार ऐसे भी हैं, जो आज भी सिर्फ अपने शब्दों की दुनिया में डूबे हुए हैं, केरल के तमाम कस्बों और गांवों के नामोनिशान तक मिट चुके हैं। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। सारे निर्माण कार्य थम गए हैं। पूरे-के-पूरे समुदाय खो गए हैं। बाढ़ से पहले यहां के हाउसबोटों पर यूरोप, चीन, मलेशिया और भारत के अन्य राज्यों के हजार टूरिस्ट तैरते रहते थे। पिछले साल दस लाख विदेशी और 1.5 करोड़ घरेलू पर्यटक आए थे। अकेले यहां के पर्यटन उद्योग का ही करीब 35.7 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। यहां की विभीषिका और राहत शिविर सैकड़ों लोगों की मौतों और दस लाख से अधिक लोगों के बेघर हो जाने की दुखद दास्तान सुना रहे हैं। केरल पहले जैसा तो नहीं हो पाएगा, फिर भी सामान्य होने, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए उसे लगभग चार अरब डॉलर की दरकार है। इस वक्त भी पूरे राज्य में लाखों वॉलिंटियर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।

लेखक अमित वर्मा ने भी केरल के राष्ट्रीय आपदा पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठा लिया है। उन्होंने गत 17 अगस्त को ट्विटर पर ऐलान किया कि वह उन लोगों की मांग पर तुक्तक (लिमरिक्स- पांच लाइन का मजाकिया छंद) लिखेंगे, जो 'केरल मुख्यमंत्री सहायता कोष' में पांच हज़ार या उससे ज्यादा की आर्थिक सहायता जमा करा देंगे। उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि अपने दान पर अपनी पसंद का शीर्षक साथ भेजें। ये पहल 23 अगस्त तक चली और आखिर तक उन्होंने 104 तुक्तक (लिमरिक्स) लिखकर कुल 10 लाख से ज्यादा की सहायता राशि जुटा ली। अमित वर्मा बताते हैं कि उनके एक दोस्त ने तो अकेले ही पांच लाख रुपये की सहायता राशि दे दी लेकिन उन्होंने इसकी चर्चा अथवा प्रचार करने से साफ मना भी कर दिया।

तेलुगु फिल्म 'लेडी गब्बर सिंह' की अभिनेत्री पूनम पांडे भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल रहे केरलवासियों की सहायता के लिए दुनिया भर में अनेक मंच से आवाज उठा रही हैं। उन्होंने फिल्म की पूरी फीस केरल रिलीफ फंड में दान दे दी है। यही नहीं, उन्होंने अपने और भी दोस्तों, रिश्तेदारों, फैंस, फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। आज देश के तमाम कलाधर्मी अभिनेता, गायक, साहित्यकार, संगीतकार, लेखक, समाजसेवियों के साथ-साथ आमजन भी केरलवासियों की सहायता के लिए अपनी तरफ से सहभागिता कर रहा है। अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, जैक्लीन फर्नांडीज आदि ने भी इस भीषण त्रासदी में देशवासियों से केरल के लोगों के लिए खुले मन से हाथ बढ़ाने का आग्रह किया है। 'केरलवासियों को अब पैकेज्ड फूड, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, मैकेनिक आदि की जरूरत है। बाढ़ पीड़ितों के समर्थन में आने वाले लोग इस में हाथ बंटाएं।'

‘मोजार्ट ऑफ मद्रास’ के नाम से पहचाने जाने वाले ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने भी केरलवासियों के समर्थन में कैलिफोर्निया में आयोजित अपने एक कंसर्ट के दौरान मंच पर गाते-गाते ही गाने के बोल बदल दिए और इसमें केरल को जोड़ दिया। ‘मुस्तफा मुस्तफा, डोंट वरी मुस्तफा’ गाते हुए इस गाने में ‘केरला केरला…Dont Worry Kerala’ जोड़ दिया। कवि-लेखकों, गायकों, संगीतकारों का केरल के अथाह दुख में इस तरह उठ खड़े होना आश्वस्त करता है कि पूरा देश बाढ़ पीड़ितों के साथ है। बालुरघाट (प.बंगाल) के युवा चित्रकार, गायक, साहित्यकार सड़क पर उतर पड़े हैं। वे केरल के बाढ़ पीड़ितों के लिए फंड जुटा रहे हैं। बालुरघाट की जय भादुड़ी, रीतिपल देव आदि ने मिलकर बालुरघाट के थाना मोड़ के पास केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए गीत गाए। कविता पाठ तथा पेंटिंग बनाई। उन्होंने लोगों से गुहार लगाई कि 'हमारे खूबसूरत केरल के भाई-बंधु इस समय मुसीबत में हैं। उनकी मदद करना हमारा क‌र्त्तव्य है। बंगाल के संवेदनशील लोग इस दर्द को समझें। सभी मदद के लिए आगे आएं। हम चाहते हैं कि समाज के और लोग भी राहत के लिए जल्द से जल्द आगे बढ़ें।'

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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