खतरों के बावजूद पूरी दुनिया में 'सेक्सटिंग' बूम

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किसी ने कहा है कि चोरियां जितनी ज्यादा होंगी, ताले उतने एडवांस होंगे। दुनिया रोज-रोज आधुनिक हो रही है तो उसके साथ तरह तरह के खतरे भी अपडेट हो रहे हैं। ये हालात सबसे अधिक महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी ने ऐसी ही पीड़ित महिलाओं को संगठित तरीके से एक नया अस्त्र दे दिया है- 'सेक्सटिंग'।

सांकेतिक तस्वीर (साभार- सोशल मीडिया)
सांकेतिक तस्वीर (साभार- सोशल मीडिया)
अंतरंग संदेश और तस्वीरों के लीक होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके लिए एक शब्द रखा गया 'रिवेंज पोर्न,' मतलब, जिसे बदला लेने की भावना से बनाया गया। 

दुनिया भर में पंद्रह से उन्नीस साल आयुवर्ग की लगभग डेढ़ करोड़ लड़कियों को पेशेवर संबंधों के लिए मजबूर किए जाने की चिंताएं कई नए तरह के प्रयोगों को जन्म देने लगी हैं। समाज की इस घृणित मानसिकता का ही एक सवाल है कि गंदे दिमाग के लोग क्यों रेलवे स्टेशन की दीवारों और शौचालयों में लड़कियों के नाम और नंबर लिख देते हैं? ऐसे निर्लज्ज मनोरोगी आखिर किस मुंह से अपनी मां-बहनों का सामना करते होंगे? इनकी भी बेटियां होंगी या भविष्य में ये भी किसी बच्ची के पिता बनेंगे, तो क्या उनसे नजरें मिला पाएंगे? चिकित्सकों का कहना है कि यह मनोदशा दोहरा जीवन जीने वाले उन्हीं लोगों में देखने को मिलती है, जो महिलाओं को सिर्फ जिस्मानी वस्तु समझते हैं। पुलिस भी इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती है। ऐसे में आज जरूरी हो गया है कि लड़कियां इससे डर कर चुप न बैठें जाएं।

आज देश-समाज में लड़कियों को भला क्या-क्या नहीं झेलना पड़ रहा है। बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' के आंकड़े तो और भी हैरान कर देते हैं। हर हफ्ते 15 से 24 साल की उम्र की लगभग सात हजार लड़कियां एचआईवी से संक्रमित हो रही हैं। दुनिया भर में 20 करोड़ ऐसी लड़कियां और महिलाएं हैं जिनका खतना यानी एफजीएम किया गया है। अलग अलग युद्धों और संघर्षों के कारण बेघर होने वाली लड़कियों की संख्या तीस लाख से भी ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि 6.2 करोड़ लड़कियां ऐसी हैं जिनकी पढ़ने लिखने की उम्र है लेकिन वे स्कूल नहीं जा पा रही हैं।

संभवतः ऐसे ही हालात से विवश होकर इधर एक नया ट्रेंड चल पड़ा है- 'यूजर सेक्सटिंग', यानी सेक्स के बारे में संदेश भेज कर चर्चा करना। मेक्सिको में अब महिला अधिकार संगठन लोगों को सेक्सटिंग की जानकारी दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों मुताबिक मेक्सिको में रोजाना कम से कम सात महिलाओं की हत्या कर दी जाती है। हाल ही में मेक्सिको में सरकार के सहयोग से महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह 'ल्युचाडोरस' ने मेक्सिको में इस पर महिलाओं का एक वर्कशॉप किया, जिसमें बताया गया कि कैसे सेक्सटिंग का ठीक ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसमें लोगों को सेक्सटिंग के प्रति जागरुक किया गया। उन्हें बताया गया कि सेक्सटिंग एक तरह से अभिव्यक्ति का माध्यम है।

ऐसा माध्यम जहां लोग सेक्स जैसे विषयों पर खुलकर बोल सकते हैं साथ ही इसके खतरे को भी समझ सकते हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी के युग में इसके खतरे भी कुछ कम नहीं। जानकारों का कहना है कि अंतरंग संदेश और तस्वीरों के लीक होने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके लिए एक शब्द रखा गया 'रिवेंज पोर्न,' मतलब, जिसे बदला लेने की भावना से बनाया गया। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान समेत कई देशों ने इसके खिलाफ कानून भी बनाए हैं। साथ ही अब लोगों के फोन और इनबॉक्स तक हैकरों की भी पहुंच हो गई है, जो सेक्सटिंग के लिए एक खतरा है।

आज पूरी दुनिया में तेजी से 'सेक्सटिंग' का चलन बढ़ता जा रहा है। हाल ही में इस पर एक रिसर्च भी आ गई है। महिला अधिकारों की बात करने वाले तमाम संगठन भी 'सेक्सटिंग' को लेकर सक्रिय हो गए हैं। उनका मानना है कि 'सेक्सटिंग' के जरिए इंसान अपने अंदर की झिझक से छुटकारा पा लेता है। कई एक मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि 'सेक्सटिंग' के माध्यम से इंसान खुद को बेहतर तरीके से जान सकता है। 'सेक्सटिंग' फोरप्ले की तरह है। इशारों में समझाना, स्पष्ट बात कहने से बेहतर भी है और गलत भी। शब्दों और कैमरे का सही और बुद्धिमत्ता से इस्तेमाल करते हुए नग्नता से बचना चाहिए। इसका असर ज़्यादा प्रभावशाली होता है।

'सेक्सटिंग' में फ़ोन पर बात करना आमने-सामने बात करने जितना अजीब भी नहीं होता है और इससे यह समझने का मौका भी मिल जाता है कि सामने वाले के ख्यालात कितने समान या असमान हैं। सामने वाले की 'सही पहचान' सुनिश्चित कर लेना बेहद महत्त्वपूर्ण है। कई बार उतावलेपन में आदमी यह भूल जाता है कि सामने वाला व्यक्ति वैसा ही हो, जैसा फोटो में दिख रहा हो या जैसा उसने अपना वर्णन किया हो। हो सकता है, वो कोई सनकी हो, या कोई कपटी हो या फिर कोई जानने वाला हो, जो दुश्मनी साधना चाहता हो या बदला लेना चाहता हो। वह पूर्व प्रेमी भी हो सकता है।

इसलिए जरूरी रहता है कि 'सेक्सटिंग' जितना हो सकता हो, उतनी ही बातें करें और जानने की कोशिश करें कि सामने वाला कोई धोखा तो नहीं दे रहा है। इसमें उसकी फेसबुक प्रोफाइल जांच के काम आ सकती है, बशर्ते उसके बारे में पता हो, या पता लगाया जा सके। तकनीकी जानकारों का कहना है कि 'सेक्सटिंग' के वक्त खास तौर से अपना चेहरा न दिखाएं या कुछ भी ऐसा ना करें, जिसके लिए बाद में पछताना पड़े।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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