मिलजुल कर खाना, सिखा रहा है बैंकर से बना डिब्बावाला

Mutterfly ऐप किया लांचटीम में हैं 4 सदस्यफिलहाल मुंबई में चल रहा है कारोबार

0

बात जब खाने की हो तो हर कोई गरमा गरम खाना खाना चाहता है क्योंकि उस खाने के स्वाद में बात ही कुछ और होती है। लंदन में मॉर्गन स्टेनली में बैंकर अक्षय भाटिया काम करते थे और वो वहां रहकर ठंडा खाना खाकर परेशान हो गए थे। इसकी वजह थी कि वो खाना बनाना नहीं जानते थे। इस वजह से कई बार उनके टोस्ट तक जल जाते। लंबे वक्त तक एक निवेश बैंक में काम करने के कारण वो लजीज खानों का लुत्फ नहीं उठा पाते। इस वजह से वो ज्यादातर सबवे सैंडविच पर निर्भर रहते। कई बार उनको ताज्जुब होता कि उनको सैंडविच के लिए पांच पाउंड चुकाने पड़ते हैं जबकि ये ना सिर्फ बड़ी मात्रा में तैयार होते हैं बल्कि ठंडे भी रहते हैं। संघर्षों को याद करते हुए उन्होने बढ़िया सस्ते भोजन की तलाश शुरू कर दी।

अक्षय, लंदन में लंच के दौरान
अक्षय, लंदन में लंच के दौरान

अक्षय घर से दूर लंदन में अकेले रहते थे इसलिए उन्होने अच्छे खाने के लिए अपने दोस्तों के लंच बॉक्स पर नजर रखनी शुरू कर दी। क्योंकि वहां पर कई लोग अपने परिवार के साथ रहते थे और लंच के लिए ये लोग ऑफिस में डिब्बा लेकर आते थे। जिसमें से अक्षय कई बार खाने के एक दो कोर ले लेते लेकिन वो इससे काफी झिझकते भी थे इसलिए उन्होने तलाश की दूसरे विकल्पों की ताकि दूसरे लोग उनको खाने के मामले में लालची ना समझें। इस विचार से उनको ताकत मिली और उन्होने इस बारे में सोचना शुरू किया। उन्होने तय किया कि वो एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करेंगे जहां पर सभी दोस्त मिलकर अपने खाने को मिल बांट कर खायें लेकिन लंदन जैसी जगह पर ऐसा होना संभव नहीं था क्योंकि यहां पर लोग खुद ही सारे काम करने में माहिर होते हैं। ऐसे में अगर किसी का लंच बच जाता है तो वो उसे शाम के खाने के लिए बचा लेता है। दरअसल बांटकर खाना खाने की आदत एशियाई देशों के लोगों के बीच ज्यादा है।

हालांकि अक्षय के दोस्त उनसे कहते थे कि वो जो खाना खाना चाहते हैं वो उसे घर से तैयार कर ले आएंगे लेकिन अक्षय को लगता कि वो उनको किसी काम को थोप रहे हैं क्योंकि बदले में उनके दोस्त पैसे लेने को तैयार नहीं थे। इस तरह उनकी दुविधा बरकरार रही। जिस तरह शहरों का विस्तार हो रहा है कि ठीक उसी के साथ परिवार भी अकेले होते जा रहे हैं। लोगों की अक्सर इच्छा होती है कि वो पड़ौस में बनने वाले खाने का टेस्ट ले सकें। अक्षय छुट्टियों में अपने घर मुंबई आये तो उन्होने फैसला लिया को वो अपने विचार मिलकर भोजन करने के लिए प्लेटफॉर्म के बारे में यहां पर जमीन तलाशें। इसके लिए उन्होने सबसे पहले पवई में अपनी कॉलोनी में एक सर्वे किया। इस सर्वे में वो लोगों से उनके खाने की आदतों के बारे में पूछते और ये जानते कि क्या वो दूसरे के खाने को खाना चाहेंगे। इस सर्वे में उनको साफ पता चल गया कि लोग पड़ौसी के घर में बना खाना खान पसंद करते हैं। इस तरह जिस विचार ने लंदन में जन्म लिया उसने अपनी जड़ भारत में जमाई।

अक्षय पढ़ाई के सिलसिले में इंग्लैंड चले गए थे वहां उन्होने साल 2011 में वारविक विश्वविद्यालय से अकाउंट और फाइनेंस से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद वो मॉर्गन स्टेनली के लिए काम करने लगे। करीब तीन साल यहां पर काम करने के दौरान वो अक्सर अपने आप से सवाल करते कि क्या वो अपने काम में कुछ नया जोड़ भी रहे हैं। इससे वो निराश होते और वो सोचते कि अगर वो इस काम को छोड़ देंगे तो कोई उनको याद नहीं करेगा। इसलिए उन्होने सोचा कि क्यों ना खुद का एक कारोबार शुरू किया जाये जिसमें वो जब चाहे बदलाव भी ला सकते हैं।

अक्षय अपनी दादी के साथ
अक्षय अपनी दादी के साथ

मिल बांट कर खाना खाने के लिए प्लेटफॉर्म का विचार लागू करने से पहले उन्होने एक ऐप बनाया और उसका नाम रखा Mutterfly । शुरूआत में इसका इस्तेमाल उन्होने अपने अपार्टमेंट से किया। इसके लिए उन्होने एक कार्यक्रम का आयोजन किया और रविवार के दिन लोगों को अपने अपने घर से ब्रेकफास्ट लाने को कहा। इसमें उनको काफी सफलता मिली क्योंकि 120 मकानों में से 70 लोग इसमें शामिल हुए जिनकी आयु 40 से 60 साल के बीच थी। इसके बाद अक्षय अपने काम पर नहीं लौटे और अपने माता पिता को विश्वास में लेने के बाद इसे कारोबार की शक्ल देने में जुट गए। लेकिन इसके लिए उनको सबसे पहले अपनी दादी का सामना करना था। अक्षय के मुताबिक उनका संयुक्त परिवार है। दादी का मानना था कि उनका पोता अपना दिमाग खो चुका है क्योंकि वो इतनी शानदार नौकरी को छोड़ टिफिनवाला बनने जा रहा है क्योंकि वो सोचती थी कि अक्षय लोगों से फोन पर खाने का ऑडर्र लेने का काम करेंगे।

अक्षय का कहना है कि फूड सर्विस का ये कारोबार 50 बिलियन डॉलर का है और ये हर साल 16 से 20 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है। अक्षय की टीम में 4 लोग हैं। इनमें से एक उनकी मां धवल मेहता भी हैं। अगले कुछ महिनों में उनकी योजना मिल बांट कर खाना खाने की योजना को पूरी मुंबई में लागू करने की है। अब ये लोग आय जुटाने के लिए विभिन्न तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं। जैसे कई शेफ अपना कारोबार बढ़ाने के लिए ऐप की मदद ले रहे हैं वैसे ही इनकी योजना ऐसे खाने के ऐसे मसाले तैयार करने की है जिनसे जल्द से जल्द कोई व्यंजन तैयार हो जाए इसके लिए ये लोग कई वीडियो बनाने पर विचार कर रहे हैं। निकट भविष्य में ये लोग डेजर्ट के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाने की इच्छा रखते हैं। इसके तहत कोई भी अपने पड़ौसी के खाने के बदले उसे मिठाई दे सकता है। फिलहाल अक्षय बैंक में नौकरी के दौरान की गई बचत को ही अपने इस कारोबार में लगा रहे हैं।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...