नौकरी के लिए भटकने वाले युवा ध्यान दें, इन रास्तों से भी कमाए जा सकते हैं पैसे

युवाओं के लिए रोजी-रोजगार के अवसर हजार...

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कहा गया है कि बेहतर शुरुआत कभी भी की जा सकती है। रोजी-रोजगार की लाख किल्लत के बावजूद बेहतर शुरुआत करने वाले तमाम युवा आज स्कूली शिक्षा के साथ आराम से हर महीने पंद्रह-बीस हजार रुपए की कमाई भी कर ले रहे हैं। बस जरूरत है, ऐसे अवसरों को जान लेने की।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
कॉर्पोरेट कंपनियों, पार्टियों के दफ्तरों, सरकारी कार्यालयों आदि में सोशल मीडिया मैनेज करने वालों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें वैसे लोगों की मांग बढ़ी है, जिसको फेसबुक, ट्विटर, लिंक्गइन, यूट्यूब आदि की समझ हो। 

स्टार्टअप कमाई का एक नया संसार रच रहा है। इसकी अनदेखी करना अपनी असफलताओं को दावत देना है। कमाई के नए-नए तरीके खुद तो विकसित हो ही रहे हैं, उससे युवाओं को सीख लेते हुए खुद भी हाथ आजमाने जरूरत है। मसलन, पेटीएम के जरिए खरीदारी ही नहीं, बिजनेस पार्टनर बनकर अच्‍छी कमाई भी की जा सकती है। साथ ही खुद के नए बिजनेस को भी पेटीएम की मदद से आगे बढ़ाया जा सकता है। पेटीएम ने अपना पेमेंट बैंक शुरू किया है। इसके लिए वह देशभर में एजेंट बना रहा है। इन एजेंटों को पेटीएम प्रोडक्‍ट्स बेचने होते हैं, जिसका उन्‍हें मोटा कमीशन मिल रहा है। पेटीएम मॉल के नाम से ऑनलाइन शॉपिंग भी कराई जा रही है।

गौरतलब है कि इस वक्त पेटीएम की पहुंच लगभग आठ करोड़ लोगों तक है। यदि कोई पेटीएम का सेलर बनता है तो उसका बिजनेस चल निकलने की भरपूर संभावना रहती है। पेटीएम मॉल के नाम से ऑनलाइन शॉपिंग भी कराई जा रही है। पेटीएम का सेलर बनकर तमाम लोग अच्‍छी कमाई कर रहे हैं। पेटीएम का सेलर बनने के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। केवल पेटीएम की ऐप या वेबसाइट पर साइन अप करना होता है। इस तरह के आधुनिक तरीकों से कमाई करने में आखिर हर्ज भी क्या है। देखिए न कि चीयरलीडर्स किस तरह मैदान के अंदर लोगों का मनोरंजन भी करती हैं और अतिरिक्त कमाई भी। यानी कोई काम करते हुए आधुनिक माध्यमों को कमाई का अतिरिक्त जरिया भी बनाया जा सकता है।

दुनिया की सबसे महंगी पांच चीयरगर्ल्स हैं। डलास काउब्यॉएज चियरलीडर्स ग्रुप मैच के अलावा साल भर मॉडलिंग खासतौर से स्विमसूट कैलेंडर गर्ल के लिए ऑफर देता है। इनमें एश्‍ले पी टीम की कप्तान हैं, उन्हें दूसरी चीयरगर्ल्स से ज्यादा पेमेंट मिलता है। सिर्फ स्विमसूट कैलेंडर गर्ल के जरिए इस टीम की चीयरलीडर्स ग्रुप की कमाई 6 करोड़ है। इसी तरह टैंपा बे बुकानियर्स की सिंथिया, जो पेशे से प्रोजेक्ट इंजीनियर हैं, वह पावर सेक्टर में भी काम करती हैं।

कमाई का एक और तरीका है ट्रैवल क्रेडिट कार्ड, जिस पर ज्यादा से ज्यादा एयर माइल्स शॉपिंग क्रेडिट से मिलने वाला रिवार्ड प्वाइंट्स एक बड़ी खासियत है। बैंक अपने क्रेडिट कार्ड कस्टमर को खर्च करने पर कमाई करने के मौके देती हैं। जब इस रिवार्ड प्वांइट्स का इस्तेमाल कहीं सैर-सपाटे, हवाई सफर और होटल बुकिंग में करना हो तो इससे बेहतर और कुछ हो ही नहीं सकता। क्रेडिट कार्ड यूजर्स हमेशा उन नए तरीके और विकल्पों की तलाश में रहते हैं जिससे वो अपने कार्ड पर ज्यादा से ज्यादा एयर माइल्स की कमाई कर सकें और ज्यादा से ज्यादा रिवार्ड प्वाइंट्स कमा सकें।

बड़े बैंक आजकल ट्रैवल क्रेडिट कार्ड भी इश्यू करते हैं। कमाई का एक और माध्यम है सोशल मीडिया। कॉर्पोरेट कंपनियों, पार्टियों के दफ्तरों, सरकारी कार्यालयों आदि में सोशल मीडिया मैनेज करने वालों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसमें वैसे लोगों की मांग बढ़ी है, जिसको फेसबुक, ट्विटर, लिंक्गइन, यूट्यूब आदि की समझ हो। कॉलेज स्टूडेंट इन ठिकानों पर हाथ आजमा सकते हैं। रोजाना दो-चार घंटे समय देकर पंद्रह हजार रुपए तक की कमाई हो सकती है। ज्यादातर कंपनियां प्रोडक्ट लॉन्च करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करती हैं।

इसके अलावा कॉलेज भी अलग-अलग टॉपिक पर रिसर्च कराती हैं। इसके लिए कॉलेज के डिपार्टमेंट्स पेड रिसर्च को पार्ट टाइम हायर करती हैं। उससे भी पंद्रह हजार तक की कमाई हो रही है। कॉलेज टाइम के बाद पार्ट टाइम जॉब के रूप में तीन चार घंटे समय देकर कॉफी-डे, बरिस्ता, केएफसी, डोमिनोज, बड़े डिपार्टमेंट स्टोर से छह से सोलह हजार रुपए तक की आय की जा सकती है। शहरों में इवेंट ऑर्गेनाइजर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके लिए पार्ट टाइम लड़के, लड़कियां हर महीने दस से बीस हजार रुपए कमा सकते हैं। कंटेंट राइटर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। कंटेंट एडिटिंग, राइटिंग के करियर में दो-चार घंटे समय देकर बीस हजार तक की कमाई की जा सकती है।

यद्यपि स्टार्टअप और नौकरी दो अलग-अलग कार्यक्षेत्र हैं लेकिन इनमें किसी एक से दूसरी राह भी निकल आती है, जैसेकि वैभव सिंह का स्टार्टअप। उनके स्टार्टअप में तो ट्विटर के सहसंस्थापक बिज स्टोन ने उनके दिल्ली के स्वास्थ्य आधारित स्टार्टअप में अपना भी निवेश किया है। वैभव के ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित चैटबोट का उपयोग किया जाता है। उनके स्टार्टअप का नाम है 'विजिट', इसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित 'चैटबोट' की शुरुआत की है, जो डॉक्टरों से परामर्श लेने में रोगियों की मदद के लिए डिजिटल सहायक के रूप में सफल हो रहा है।

वैभव सिंह का दावा है कि यह देश का पहला एआई आधारित स्वास्थ्य ऐप है और उन्होंने इससे निवेशकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। गौरतलब है कि 'विजिट' की शुरुआत सबसे पहले बिट्स पिलानी के चार स्टुडेंट्स ने की थी, जिसमें वैभव सिंह भी एक थे। उनके स्टार्टअप में स्नैपडील के सहसंस्थापक कुणाल बहल और रोहित बंसल ने भी पैसा निवेश कर दिया है। आज के वक्त में किसी भी कार्यक्षेत्र में ग्रोथ के लिए समय से अपनी राह तय कर लेना बहुत जरूरी हो गया है वरना कदम-कदम पर रुकावटें आने लगती हैं।

स्टार्टअप में जाएं या नौकरी में, इसका फैसला वक्त रहते युवा कर लें तो कामयाबी उनके कदम चूम सकती है। वरना दोराहे ही दोराहे। सवाल उठना स्वाभाविक है- स्टार्टअप या नौकरी? ये प्रश्न हर पढ़े-लिखे युवा के मन में आता है। यानी अपना बिजनेस डालने की बजाय अच्छी नौकरी करना फ़ायदेमंद है या नहीं। अधिकांश समय कॉर्पोरेट की नौकरियां स्थाई करियर का विकल्प देती हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर देखा जाए तो स्टार्टअप से जुड़ना सुरक्षा और स्थायित्व से कहीं अधिक लाभ देने लगा है। जहाँ तक सुरक्षा और स्थायित्व की बात है तो वह सिर्फ़ कठिन परिश्रम और भाग्य से मिलता है।

जब एक स्टार्टअप की बात करें तो इसमें एक कॉर्पोरेट जॉब की तुलना में काम करने कहीं अधिक अवसर होते हैं। स्टार्टअप कम्पनी के लिए काम करने पर आपके हाथ में ज़्यादा अवसर होते हैं। जैसा कि हम जानते हैं स्टार्टअप में कम लोग काम करते हैं तो हर को काम करने के समान अवसर मिल जाते हैं। करियर के शुरुआती दौर में किसी बड़े कॉर्पोरेट की नौकरी में बड़े स्तर पर काम करने का अवसर मिलता है। कॉर्पोरेट जॉब में किसी एक्सपर्ट के गाइडेंस में काम करने का अवसर मिलता है। भविष्य में इसके कई फ़ायदे होते हैं। जबकि किसी स्टार्टअप के साथ काम करने पर हर चीज़ एकदम शुरु से स्वयं करनी होती है। बस इस अंतर को जानते हुए भविष्य की नींव रखनी चाहिए।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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