अपने छोटे बच्चों के लिए स्वस्थ ऑर्गेनिक फूड चाहिये, हैदराबाद का ऑरमील फूड्स है ना 

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33 वर्षीय सिवा सतीश कुमार ने 40 वर्षीय निवेशक पुला प्रवीण कुमार से संपर्क किया और इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2015 में हैदराबाद में ऑरमील फूड्स प्राईवेट लिमिटेड की स्थापना की।

ऑरमील की टीम
ऑरमील की टीम
ऑरमील अपने उत्पादों को ऑनलाइन और कुछ चुनिंदा ऑफलाइन साझीदार स्टोर्स के माध्यम से बेचता है। एक बूटस्ट्रेप्ड उद्यम के रूप में कंपनी को सिर्फ 1 करोड़ रुपये की प्रारंभिक सीड फंडिंग के के साथ शुरू किया गया था। 

अपने सात माह के भतीजे मेधांशु के साथ बिताई गई एक सुबह के दौरान सतीश कुमार को बच्चों के जीवन में पोषक तत्वों की महत्ता का अहसास हुआ। वे कहते हैं, 'मैंने ध्यान दिया कि जब मैं फलों की सलाद खा रहा था तब मेरा भतीजा मेरी तरफ एकटक नजरों से देख रहा था। हालांकि मुझे इस बात का पता था कि एक बच्चे के आहार में प्रारंभिक रूप से फल और सब्जियां जरूर शामिल होनी चाहियें ताकि उन्हें संपूर्ण विकास के लिये आवश्यक तमाम जरूरी पोषक तत्व मिल सकें, मैं इस सोच में था कि मेरे भतीजे को कब ये सारे पौष्टिक फल खाने को मिलेंगे। उसके साथ बिताए गए कुछ ही मिनटों ने मेरे भीतर उसे और उसकी उम्र के अन्य बच्चों को स्वच्छ, स्वस्थ और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध करवाने के लिये प्रेरित किया। और इस मुलाकात के अगले ही दिन ऑरमील फूड का जन्म हुआ।'

33 वर्षीय सिवा सतीश कुमार ने 40 वर्षीय निवेशक पुला प्रवीण कुमार से संपर्क किया और इन दोनों में मिलकर वर्ष 2015 में हैदराबाद में ऑरमील फूड्स प्राईवेट लिमिटेड की स्थापना की। इस कंपनी का प्रमुख उद्देश्य प्रमाणित कार्बनिक मूल के पौष्टिक शिशु खाद्य उत्पादों का उत्पादन कर परंपरागत शिशु खाद्य उद्योग के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करवाना है।

यह फाइन फ्रूट प्यूरी, जैसे खाने के लिये तैयार कार्बनिक शिशु खाद्य पदार्थों की एक पूरी श्रंखला पेश करता है जो छः महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिये बिल्कुल उपयुक्त है। प्रवीण बताते हैं कि उनके उत्पाद कृत्रिम स्वाद, प्रिजर्वेटिव्स के अलावा नमक और चीनी से पूरी तरह मुक्त हैं। ऑरमील अपने उत्पादों को ऑनलाइन और कुछ चुनिंदा ऑफलाइन साझीदार स्टोर्स के माध्यम से बेचता है। एक बूटस्ट्रेप्ड उद्यम के रूप में कंपनी को सिर्फ 1 करोड़ रुपये की प्रारंभिक सीड फंडिंग के के साथ शुरू किया गया था।

अब तक का सफर

प्रवीण बताते हैं कि उनकी कंपनी से सामने सबसे बड़ी समस्या थी बच्चों के लिये संपूर्ण, स्वस्थ और जैविक खाने को उपलब्ध करवाना। उन्होंने कई विकल्पों को आजमाया और समाधान तलाशने की दिशा में पूरे भारत भर की यात्रा की लेकिन नतीजे संतोषजनक नहीं रहे। आखिरकार उन्होंने बेबी फूड सेगमेंट में सर्वश्रेष्ठ कच्चे माल के साथ प्रमाणित प्रक्रिया और विशेषज्ञता पाने के लिए फ्रांस जाने का फैसला किया। यहां उन्होंने ऐसे रंग और स्वाद वाले जैविक, प्रिजर्वेटिव-मुक्त खाने को आजमाया जिसके छोटे बच्चों को पसंद आने की पूरी उम्मीद थी।

आज की तारीख में ऑरमील देशभर के प्रसिद्ध और प्रमाणिक खाद्य वैज्ञानिकों, पोषण विशेषज्ञों और चिकित्सा सलाहकारों द्वारा निर्देशित है। इसके अलावा इनके तमाम उत्पाद यूरोपियन यूनियन द्वारा प्रमाणित होने के अलावा फ्रांस में निर्मित होता है। इस उद्यम के अलावा दोनों ही संस्थापक विभिन्न पृष्ठभूमि से आते हैं। प्रवीण के पुला यूके स्थित एक निवेशक हैं और वे कई स्टार्टअप्स को अपने अपने सपनों को हकीकत में बदलने में मदद करते हैं। इसके अलावा उन्हें वर्ष 2014 में वर्ल्ड कंसल्टिंग एंड रिसर्च कॉर्पोरेशन द्वारा इंडियाज इमर्जिंग लीडर के रूप में चुना गया था। वे हैदराबाद स्थित वॉक्सन स्कूल ऑफ बिजनेस और यूके के ईथेम्स ग्रेजुएट स्कूल के संस्थापक भी हैं।

उद्यमशीलता में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद सतीश कुमार ने छह साल तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने का अनुभव प्राप्त किया। बच्चों के लिये स्वस्थ और स्वच्छ खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने को लेकर उनका जुनून उन्हें ऑरमील को प्रारंभ करने के और करीब ले आया।

बाजार और प्रतिद्वंद्वी

इन संस्थापकों ने प्रारंभ में महत्वाकांक्षी शिशु खाद्य पदार्थों के मामले में भारतीय बाजार में बने रिक्त स्थान को चिन्हांकित की कोशिश की। प्रवीण जिनका मानना है कि जैविक खाने का है, कहते हैं, 'आज की तारीख में करोड़ों ऐसे लोग हैं जो अपने बच्चों के लिये सबसे अच्छा खाने की तलाश में हैं जो खाने के लिये बिल्कुल तैयार हो।' एक प्रमुख मार्केट रिसर्च फर्म ने अनुमान लगाया है कि भारत का शिशु खाद्य पदार्थ का बाजार करीब 240 मिलियन डॉलर का हो जाएगा और इनका कहना है कि यह आंकड़ा वर्ष 2020 तक 10 से 12 प्रतिशत के अच्छे सीएजीआर के साथ 300 मिलियन डॉलर के पार जा सकता है। वर्तमान में जैविक शिशु खाद्य पदार्थों के बाजार में कुछ प्रमुख खिलाड़ी हैं प्रिस्टीन ऑर्गेनिक्स और अर्ली फूड्स।

प्रवीण कहते हैं कि ऑरमील ने अपने बिक्री संचालन शुरू करने के 11 महीनों के भीतर ही भारतीय जैविक शिशु खाद्य पदार्थों के बाजार की 10 प्रतिशत हिससेदारी पर कब्जा करके खुद को प्रभावी स्थिति में स्थापित कर लिया है।

वे आगे कहते हैं, 'हम सात परत वाले अपने पेटेंट पैकेजिंग पर भी पूरा ध्यान और जोर देते हैं जिसमें पदार्थों को एक ऐसे निष्क्रिय वातावरण में डिब्बाबंद किया जाता है जहां खाने को दूषित करने वाले किसी भी माईक्रोबायोलॉजिकल पदार्थ के विकास की जरा भी संभावना नहीं रहती। इस प्रक्रिया के चलते कुछ बेहद प्राचीन शिशु खाद्य उत्पादों को बढ़ाने में मदद की है।'

प्रमुख चुनौतियां

प्रवीण कहते हैं कि अक्सर बिल्कुल अपरिचित और खाली स्थान में हाथ डालने की सलाह नहीं दी जाती है लेकिन जिनके पास स्पष्ट रणनीति और दृष्टि होती है, उन्हें सफलता मिलनी सुनिश्चित ही होती है। इस क्षेत्र में सबसे पहले कदम रखने वाले होने के चलते उनके सामने अनगिनत अवसर मौजूद थे जबकि कोई स्पष्ट मानदंड नहीं था।

वे स्पष्ट करते हैं, 'लेकिन हमारे मामले में, हमारे पास अपने देश में कोई श्रेणी नहीं थी। कोई भी अपने बच्चों को जैविक खाना खिलाने की सोचता ही नहीं था। ऐसे में एक बिल्कुल नई श्रेणी का विकास करते हुए उपभोक्ताओं को उसके बारे में तानकारी देना सबसे बड़ी अड़चन था।' प्रवीण कहते हैं, 'प्रारंभ में इस पर नजर डालने वाला कोई नहीं था और साथ ही कोई सरकारी मानदंड भी नहीं थे। अब जब सरकारी स्थापना में चीजें आसान हो गई हैं, हमारे जैसी एक बिल्कुल नवीन अवधारणा के लिये दिशानिर्देश अभी भी बिल्कुल अस्पष्ट हैं।'

वे आगे कहते हैं, 'किसी भी व्यवसाय के विकास में सरकारी सुधार, कानून और नियमों का एक बेहद महत्वपूर्ण हाथ और योगदान होता है। जैविक भोजन के क्षेत्र में एक बिल्कुल नया उपक्रम होने के चलते कंपनी को उत्पाद की लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानदंडों के मामले में कई अड़चनों का सामना करना पड़ा। ऐसा कई बार होता है कि सरकार किसी कानून को तो लागू करती है लेकिन उनकी अनुपालन से संबंधित प्रक्रिया बिल्कुल अस्पष्ट होती है।'

इसके अलावा एक टीम को जोड़ना एक और बड़ी चुनौती था। प्रवीण के मुताबिक, किसी भी स्टार्टअप के लिये वित्तीय संसाधन से भी अधिक मूल्यवान मानव संसाधन होता है। आज ऑरमील के साथ 31 (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) लोग काम कर रहे हैं। पूरे भारत में उपस्थिति रखने वाली कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ सालों में इन्होंने अपने कर्मचारियों की संख्या में दस गुना की वृद्धि की है।

उपभोक्ताओं तक पहुंचना

प्रवीण कहते हैं, 'आज की तारीख में उपभोक्ताओं तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका और साधन है सोशल मीडिया। इसने वास्तव में व्यापार मॉडल/व्यवस्था को उपभोक्ता केंद्रित बनाया है और हम कोई अपवाद नहीं हैं। हम विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स और ऑरलमील डॉट कॉम के जरिये हर समय अपने ग्राहकों की पहुंच में हैं।'

भविष्य की योजनाएं

कंपनी का इरादा जैविक खाद्य उद्योग के क्षेत्र में बड़े पैमाने की किफायतों के जरिये समग्र मूल्य श्रंखला में एक मजबूत भूमिका निभाने का है। प्रवीण कहते हैं, 'उत्पाद लॉन्च और बच्चों के जैविक खाने के विभिन्न चरणों और श्रेणियों में उपस्थिति को लेकर ऑरमील का एक बिल्कुल स्पष्ट और केंद्रित रोडमैप है। उपभोक्ताओं से मिल रहे समर्थन और स्वीकृति के चलते हम आगामी समय में लॉन्च करने वाले उत्पादों को पहले ही लॉन्च करने के लिये पूरी तरह तैयार हैं।'

अंत में वे कहते हैं, 'जबसे हमने परिचालन शुरू किया है बच्चों के खाने के खरीददारों के बीच शुरू हुई हलचल ने प्रमुख खिलाड़ियों को भारत में बच्चों के लिये जैविक खानों और प्यूरीज पर ध्यान देने के लिये मजबूर कर दिया है। ऐसे में अगर कोई बाजार की इस श्रेणी में प्रवेश करने का इच्छुक है तो ऐसा करने के लिये यह सबसे बेहतर समय और मौका है। लेकिन उन्हें पक्के इरादे और दीर्घकालिक योजना के साथ इस क्षेत्र में कदम रखना होगा।'

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