स्कूल चलाने के लिए पैसे चाहिए? आपकी मदद के लिए ही है ‘वर्तन’

“ऐसे बहुत से संगठन हैं, जो इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में सहायक हो सकते हैं और ज़्यादातर मामलों में विभिन्न सिरों को जोड़ने का काम भर करना होता है।”

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‘वर्तन’ की वेबसाइट पर एक दृष्टि डालते ही उनके उपक्रम की सारी पृष्ठभूमि आपके सामने उपस्थित हो जाती है- भारत में विद्यार्थियों की विशाल आबादी, शिक्षा पर भारतीय अभिभावकों का सहज विश्वास, सरकारी स्कूलों की शिक्षा का खराब स्तर, शिक्षा-क्षेत्र में मूलभूत सुधारों के लिए पूंजी की सीमित उपलब्धता और छोटे निजी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर।


स्टीव हार्डग्रेव
स्टीव हार्डग्रेव

और दृश्यपटल के इसी बिंदु पर ‘वर्तन’ अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। स्टीव हार्डग्रेव और ब्रजेश मिश्र द्वारा स्थापित वित्त उपलब्ध कराने वाला यह संगठन कम आय वाले समूहों के लिए शिक्षा का स्तर सुधारने की दिशा में काम करने वाले उद्यमियों को ऋण मुहैया कराने का काम करता है। बृजेश के साथ मिलकर पहले भी स्टीव हैदराबाद में एक स्कूल फाइनेंस कंपनी (ISFC) की स्थापना कर चुके हैं। यहाँ स्टीव के साथ हुई बातचीत का सारांश प्रस्तुत हैं:

ऋण और उससे परे

‘वर्तन’ के संस्थापक निम्न-आय वर्ग के विशाल जनसमूह को स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की प्रेरणा द्वारा परिचालित हुए। वे चाहते थे कि यह काम मापनीय और आरोह्य हो अर्थात इसका प्रभाव मापा जा सके और उसे आगे विकसित किया जा सके। इस काम के लिए कटिबद्ध होने के बाद शुरू में सिर्फ कम लागत में और आसानी के साथ ऋण उपलब्ध कराना उनका ध्येय था। “हम यह भी सुनिश्चित करते हैं कि ऋण वितरण के बाद भी हमारा संपर्क स्कूलों के साथ बना रहे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयोजित परियोजना सफलता पूर्वक कार्यान्वित हो रही है,” स्कूलों के साथ अपनी सहभागिता के बारे में स्टीव ने बताया।

ब्रजेश मिश्र
ब्रजेश मिश्र

जबकि स्कूलों के साथ उनके संबंध का प्रारम्भ बिन्दु ऋण वितरण है, संस्थापक यह भी चाहते हैं कि वे स्कूलों को तकनीकी (technology), पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण संबंधी संसाधन भी मुहैया करवाएँ और साथ ही उनके दीर्घकालीन विकास के लिए उपयुक्त साझेदार भी। स्टीव इस बात को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, “ऐसे बहुत से संगठन हैं, जो इन चुनौतियों से निपटने की दिशा में सहायक हो सकते हैं और ज़्यादातर मामलों में विभिन्न सिरों को जोड़ने का काम भर करना होता है।”

‘वर्तन’ के पास उनके रिलेशनशिप मैनेजर उपलब्ध हैं, जो स्कूलों का दौरा करके उनकी जरूरतों की शिनाख्त करते हैं। लेकिन उनके काम की अधिकतर मार्केटिंग लोगों के मौखिक आदान-प्रदान (वर्ड ऑफ माउथ) के जरिए होती है, जो किसी भी संस्था के लिए, स्टीव के शब्दों में, ‘सबसे बढ़िया शुरुआती बिन्दु’ होता है।

इसी साल जनवरी में शुरू किया गया ‘वर्तन’ अब तक 30 ऋण वितरित कर चुका है तथा अब उनकी टीम के सदस्यों की संख्या बढ़कर 10 हो चुकी है। अपनी पहुँच के बारे में चर्चा करते हुए स्टीव कहते हैं, “इतने कम समय में बाज़ार से हमें काफी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है और उसी अनुपात में संस्था के व्यापार में हुई वृद्धि से हम बहुत प्रसन्न हैं। हमें गर्व है कि कुछ असाधारण उद्यमियों और वितरकों का साथ हमें मिला है, जिनका संपर्क उन स्कूलों से है, जिन्हें अपने विस्तार और नियमित संचालन हेतु वित्तपोषण की ज़रूरत पड़ती रहती है।”

ऋणों पर वसूल किया जाने वाला ब्याज इस उपक्रम की आमदनी का मुख्य जरिया है।

भविष्य की योजनाएँ

पहले भी वे ऋण प्रदान करने के अलावा आगे बढ़कर स्कूलों की मदद करते रहे हैं लेकिन स्टीव के अनुसार वे अब शिक्षा के स्तर में सुधार के उद्देश्य से काम कर रहे अन्य संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करना चाहते हैं, जिससे जनसाधारण को बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके। वर्तमान में वे ‘Milaap’, ‘Gooru’ और ‘iEinstein’ जैसे संगठनों के साथ साझेदारी कर रहे हैं। इनमें से ‘Milaap’ गरीब श्रमिकों को कर्ज़ देने की ऑनलाइन सुविधा प्रदान करने वाला एक मंच है, जहाँ कोई भी इच्छुक व्यक्ति घर बैठे किसी दूरस्थ गरीब श्रमिक की सहायता कर सकता है। ‘Gooru’ शिक्षकों की सहायता के उद्देश्य से तैयार किया गया सर्च इंजिन है, जो विभिन्न शैक्षणिक विषयों से संबंधित वेब सामग्रियों की जानकारी और उन्हें कक्षाओं में पढ़ाए जाने योग्य बनाने में मदद करता है। ‘iEinstein’ फॉर प्रॉफ़िट, नॉन प्रॉफ़िट तथा सरकारी एजेंसियों के साथ काम करते हुए 21 वीं सदी के मानदंडों के अनुसार ऐसा परितंत्र (ecosystem) तैयार करता है, जिसके ज़रिए कम आय वाले भारतीय सस्ती ‘eLearning’ सुविधा प्राप्त कर सकें।

जबकि भविष्य में और अधिक विस्तार करने पर सामने आने वाली चुनौतियों से यह युगल भली भाँति परिचित है, एक सच्चे उद्यमी की तरह स्टीव यह कहते हुए अपनी बात पूरी करते हैं, "असली हीरो तो ये स्कूल चलाने वाले उद्यमी, वहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थी और उनके माता-पिता हैं, जो गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए बहुत बड़ा त्याग कर रहे हैं।"

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