400 बच्चों की जान बचाने के लिए 10 किलो का बम हाथ में लेकर भागे अभिषेक

0

अपनी नींद और आराम का ख्याल किए बिना पुलिस के जवान निगरानी करते रहते हैं और कोई भी वो चीज जिससे हम पर खतरा हो सकता है उसे दूर फेंक देते हैं। मध्य प्रदेश के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने जो बहादुरी का काम किया है, उसे जान कर आप दिल से सलाम करेंगे।

फोटो साभार: सोशल मीडिया
फोटो साभार: सोशल मीडिया
मेरा लक्ष्य सभी बच्चों को सुरक्षित करना था, बम ले जाते समय थोड़ा डर भी लगा लेकिन फिर भी मन में एक खुशी थी कि अगर मुझे कुछ होता है तो मैं इतने लोगों की जान बचा लूंगा। उन्होंने कहा कि इसलिए मैं बस बम को रिहायशी इलाके से लेकर दूर भागता रहा और मुझे इसमें कामयाबी मिली।

खबरों के मुताबिक, जैसे ही अभिषेक को 100 नंबर स्कूल में बम की सूचना मिली, वो तुरंत मौके पर पहुंचे और जान जोखिम में डालकर बम लेकर स्कूल परिसर से भाग निकले।

किसी राज्य के नागरिक अगर बेफिक्री में अपना दिन-रात गुजारते हैं तो इसके पीछे की वजह से मुस्तैदी से उनकी सुरक्षा कर रही पुलिस फोर्स है। हम सबकी सुरक्षा का जिम्मा पुलिस अपने सिर पर लेकर चलती है। अपनी नींद और आराम का ख्याल किए बिना पुलिस के जवान निगरानी करते रहते हैं और कोई भी वो चीज जिससे हम पर खतरा हो सकता है उसे दूर फेंक देते हैं। मध्य प्रदेश के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने जो बहादुरी का काम किया है, उसे जान कर आप दिल से सलाम करेंगे।

चितौरा गांव के हायर सेकेंड्री स्कूल के पास सेना का एक पुराना बम छात्रों ने देखा। स्कूल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस के आते ही स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में छुट्टी भी कर दी। छुट्टी होने से मची अफरा तफरी में बच्चे बम के पास से गुजरने लगे। इस अफरा तफरी में कुछ अनहोनी न हो, लिहाजा हवलदार अभिषेक पटेल ने बम को हाथ में उठाकर मैदान की ओर दौड़ लगा दी। हवलदार ने स्कूल से एक हजार मीटर दूर बम को खुले मैदान में फेंक दिया। उसके बाद मौके पर बम निरोधक दस्ता पहुंचा। मगर इसी दहशत के माहौल के बीच अभिषेक पटेल ने साहस का परिचय देते हुए स्कूल के करीब 400 बच्चों की जान बचाई।

अभिषेक, हमें आप पर गर्व है

खबरों के मुताबिक, जैसे ही अभिषेक को 100 नंबर स्कूल में बम की सूचना मिली, वो तुरंत मौके पर पहुंचे और जान जोखिम में डालकर बम लेकर स्कूल परिसर से भाग निकले। अब उनके पास 400 बच्चों और वहां मौजूद लोगों बचाने के लिए कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था और बम किसी भी समय फट सकता था क्योंकि यह कोई नहीं जानता था कि बम किस हालत में है। यही वजह है कि हवलदार अभिषेक जान हथेली पर रखकर बम को अपने कंधे पर रखकर दौड़ना शुरू कर दिया और स्कूल से दूर ले जाकर उसे फेंक दिया। अभिषेक ने साहस के साथ इस काम को अंजाम दिया और किसी तरह की अनहोनी होने से बचा लिया।

स्कूल के पास कहां से आया बम-

हालांकि, अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि आखिर स्कूल में बम कहां से आई। मामले की जांच चल रही है। यह बम कहां से आया है कि इस सवाल पर आईजी सतीश सक्सेना का कहना था कि अंदेशा है कि स्कूल सेना के फायरिंग रेज के पास ही स्थित है हो सकता है यह वहीं से गिरा हो। यह बम काफी पुराना है। आईजी सक्सेना कहना है कि इससे पहले इसी तरह का एक बम सागर जिले के ही बनाड गांव में पाया गया था जिसकी जांच अभी चल रही है।

अभिषेक के मुताबिक, बम का वजन 10 किलो था और उसकी लंबाई 12 इंच थी। हालांकि, अच्छी बात ये रही कि उन्होंने बम निरोधक दस्ते की ट्रेनिंग ली थी। उन्हें ट्रेनिंग के दौरान बताया गया था कि इतने वजन वाला बम अगर फट जाए तो 500 मीटर के आसपास तक नुकसान पहुंचा सकता है।

दिलेरी की यादगार मिसाल बन गए हैं अभिषेक-

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में अभिषेक ने बताया कि मेरा लक्ष्य सभी बच्चों को सुरक्षित करना था, बम ले जाते समय थोड़ा डर भी लगा लेकिन फिर भी मन में एक खुशी थी कि अगर मुझे कुछ होता है तो मैं इतने लोगों की जान बचा लूंगा। उन्होंने कहा कि इसलिए मैं बस बम को रिहायशी इलाके से लेकर दूर भागता रहा और मुझे इसमें कामयाबी मिली।

बम को हाथ में लेकर भागते हुए उनका एक वीडियो भी लगातार वायरल हो रहा है। इस बीच उनकी टीम के लोग समझाते रहे कि गोला फेंक कर दूर हट जाएं क्योंकि अगर बम फट जाता तो अभिषेक शरीर के परखच्चे उड़ जाते। लेकिन अभिषेक का एक ही मकसद था कि किसी तरह से गोले को रिहायशी इलाके से दूर कर दिया जाए।

यहां पर देखें अभिषेक की बेमिसाल बहादुरी का वीडियो-

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

Related Stories

Stories by प्रज्ञा श्रीवास्तव